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134ए: मेधावी व जरूरतमंद बच्चे कर रहे दाखिले का इंतजार
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कैथल। एक ओर तो सरकार द्वारा सरकारी स्कूलों में कैचअप कार्यक्रम चलाया जा रहा है। जिसमें सरकारी स्कूलों के बच्चों के कक्षा अनुसार ज्ञान की जांच-पड़ताल की जा रही है। वहीं दूसरी ओर जिले के जरूरतमंद परिवारों के लगभग 4000 से अधिक मेधावी बच्चे जो अपने परिवार की आर्थिक स्थिति से ज्यादा महंगे स्कूलों में सरकार की निशुल्क पढ़ाने की योजना के तहत पढ़ना चाहते हैं, वे पिछले एक माह से घर पर खाली बैठे हैं।
परिजनों के साथ-साथ इन बच्चों को चिंता सता रही है कि उनका दाखिला नहीं हुआ तो वे कैसे इस एक माह की पढ़ाई को पूरा करेंगे। चिंता उन स्कूलों को भी है, जिनमें ये बच्चे पिछले साल पढ़ रहे थे और इन बच्चों को लग्न से पढ़ाते हुए स्कूल के बेहतर परीक्षा परिणाम के लिए तैयार किया गया था। लेकिन विभागीय अधिकारी पिछले एक माह से रोज नए-नए नियम लाद कर बच्चों को खाली बैठने पर मजबूर कर रहे हैं। सरकार का इस ओर कोई ध्यान नहीं हैं कि इन बच्चों की पढ़ाई खराब हो रही है।
अभिभावक राकेश कुमार, संजय, विजय, राजेंद्र कुमार, रवि प्रकाश सहित अन्य ने कहा कि अमूमन तो दाखिले की पूरी प्रक्रिया मार्च माह में ही पूरी हो जानी चाहिए। ताकि नए सत्र की शुरुआत के तुरंत बाद बच्चे को यह पता हो कि उसे इस बार किस स्कूल में पढ़ना है। जिससे उसकी पढ़ाई खराब न हो। लेकिन अबकी बार पूरा अप्रैल माह निकल गया है। विभाग यह तय नहीं कर पाया है कि बच्चे दाखिला किस स्कूल में लेंगे। ऊपर से निजी स्कूल वेलफेयर एसोसिएशन का एलान है कि वे बच्चों को दाखिला नहीं लेंगे। उन्हें अपने बच्चों की चिंता सता रही है।
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अमरगढ़ गामड़ी में रह रहे नूर, हर्षप्रीत ने कहा कि उन्होंने बड़े स्कूल में दाखिले के लिए परीक्षा थी। परीक्षा भी पास कर ली। लेकिन अब न जाने कम्प्यूटर में क्या करना है। उन्हें दाखिले के लिए इंतजार करना पड़ रहा है।
14 को ली गई थी परीक्षा, 18 को आया था परिणाम, दाखिले अभी तक नहीं : शिक्षा विभाग ने 14 अप्रैल को बच्चों की परीक्षा ली थी। इसके बाद 18 को परिणाम आया। इसके बाद 21 को स्कूल अलॉट होने थे। जिसे बढ़ाकर 22 कर दिया गया। 22 अप्रैल आई तो नया शिगूफा दिया गया कि 27 अप्रैल से दाखिले होंगे। इसके बाद 26 अप्रैल की शाम को पत्र जारी हुआ कि अब अभिभावकों को खुद स्कूल चयन करने होंगे। इसके लिए 29 तारीख तक का समय दिया गया। साइट महज एक दिन चली, 28 अप्रैल को साइट भी नहीं चली।
अध्यापक संघ के जिला अध्यक्ष सतबीर गोयत का कहना है कि यह शर्मनाक स्थिति है कि बच्चे सरकारी तंत्र की ढुल-मुल नीति के कारण एक महीने से घर बैठे हैं। सरकार के साथ-साथ शिक्षा विभाग के उन आला अधिकारियों को जवाब देना चाहिए, जिनको यह जिम्मेदारी सौंपी गई है। क्या वे इन बच्चों की एक माह की पढ़ाई खराब होने का जवाब देंगे? अध्यापक संघ की मांग है कि शीघ्र ही 134ए के तहत बच्चों के दाखिले का निर्णय लिया जाए। ताकि बच्चे घर न रहें।
इस संबंध में डीईओ जोगेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि एक-दो दिन में पूरी प्रक्रिया हो जाएगी। यह पूरे प्रदेश स्तर पर स्थिति है। कई जगह की खाली सीटें का ब्योरा नहीं मिल पाया था। जल्द ही बच्चों को दाखिला दे दिया जाएगा। बच्चों के एक माह तक खाली बैठने के प्रश्न पर उन्होंने कहा कि व्यवस्था में समय लग रहा है। अब जल्द कर दिया जाएगा।
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परिजनों के साथ-साथ इन बच्चों को चिंता सता रही है कि उनका दाखिला नहीं हुआ तो वे कैसे इस एक माह की पढ़ाई को पूरा करेंगे। चिंता उन स्कूलों को भी है, जिनमें ये बच्चे पिछले साल पढ़ रहे थे और इन बच्चों को लग्न से पढ़ाते हुए स्कूल के बेहतर परीक्षा परिणाम के लिए तैयार किया गया था। लेकिन विभागीय अधिकारी पिछले एक माह से रोज नए-नए नियम लाद कर बच्चों को खाली बैठने पर मजबूर कर रहे हैं। सरकार का इस ओर कोई ध्यान नहीं हैं कि इन बच्चों की पढ़ाई खराब हो रही है।
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अभिभावक राकेश कुमार, संजय, विजय, राजेंद्र कुमार, रवि प्रकाश सहित अन्य ने कहा कि अमूमन तो दाखिले की पूरी प्रक्रिया मार्च माह में ही पूरी हो जानी चाहिए। ताकि नए सत्र की शुरुआत के तुरंत बाद बच्चे को यह पता हो कि उसे इस बार किस स्कूल में पढ़ना है। जिससे उसकी पढ़ाई खराब न हो। लेकिन अबकी बार पूरा अप्रैल माह निकल गया है। विभाग यह तय नहीं कर पाया है कि बच्चे दाखिला किस स्कूल में लेंगे। ऊपर से निजी स्कूल वेलफेयर एसोसिएशन का एलान है कि वे बच्चों को दाखिला नहीं लेंगे। उन्हें अपने बच्चों की चिंता सता रही है।
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अमरगढ़ गामड़ी में रह रहे नूर, हर्षप्रीत ने कहा कि उन्होंने बड़े स्कूल में दाखिले के लिए परीक्षा थी। परीक्षा भी पास कर ली। लेकिन अब न जाने कम्प्यूटर में क्या करना है। उन्हें दाखिले के लिए इंतजार करना पड़ रहा है।
14 को ली गई थी परीक्षा, 18 को आया था परिणाम, दाखिले अभी तक नहीं : शिक्षा विभाग ने 14 अप्रैल को बच्चों की परीक्षा ली थी। इसके बाद 18 को परिणाम आया। इसके बाद 21 को स्कूल अलॉट होने थे। जिसे बढ़ाकर 22 कर दिया गया। 22 अप्रैल आई तो नया शिगूफा दिया गया कि 27 अप्रैल से दाखिले होंगे। इसके बाद 26 अप्रैल की शाम को पत्र जारी हुआ कि अब अभिभावकों को खुद स्कूल चयन करने होंगे। इसके लिए 29 तारीख तक का समय दिया गया। साइट महज एक दिन चली, 28 अप्रैल को साइट भी नहीं चली।
अध्यापक संघ के जिला अध्यक्ष सतबीर गोयत का कहना है कि यह शर्मनाक स्थिति है कि बच्चे सरकारी तंत्र की ढुल-मुल नीति के कारण एक महीने से घर बैठे हैं। सरकार के साथ-साथ शिक्षा विभाग के उन आला अधिकारियों को जवाब देना चाहिए, जिनको यह जिम्मेदारी सौंपी गई है। क्या वे इन बच्चों की एक माह की पढ़ाई खराब होने का जवाब देंगे? अध्यापक संघ की मांग है कि शीघ्र ही 134ए के तहत बच्चों के दाखिले का निर्णय लिया जाए। ताकि बच्चे घर न रहें।
इस संबंध में डीईओ जोगेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि एक-दो दिन में पूरी प्रक्रिया हो जाएगी। यह पूरे प्रदेश स्तर पर स्थिति है। कई जगह की खाली सीटें का ब्योरा नहीं मिल पाया था। जल्द ही बच्चों को दाखिला दे दिया जाएगा। बच्चों के एक माह तक खाली बैठने के प्रश्न पर उन्होंने कहा कि व्यवस्था में समय लग रहा है। अब जल्द कर दिया जाएगा।