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न डेंटल डाक्टर, न सर्जन डाक्टर, राजौंद का स्वास्थ्य केंद्र बना सफेद हाथी
Updated Thu, 30 Nov 2017 12:30 AM IST
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खुद बीमार हो गया प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र किठाना
अमर उजाला ब्यूरो
राजौंद। गांव किठाना का प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र लोगों के लिए सफेद हाथी बनकर रह गया है। स्वास्थ्य केंद्र में पिछले लंबे समय से कोई भी डाक्टर नहीं है। यहां तक की लेडी डाक्टर की पोस्ट भी खाली पड़ी है। जिससे महिलाओं को भारी परेशानी हो रही है।
आसपास के दो दर्जन से भी अधिक गांवों के लोगों के लिए यह नाम का स्वास्थ्य केंद्र रह गया है। स्वास्थ्य केंद्र में न डेंटल डाक्टर है, न सर्जन डॉक्टर, न लेडी डॉक्टर के साथ-साथ यहां कोई लैब टेक्निकल भी नही हैं। जिसे लेकर लोगों में स्वास्थ्य विभाग के प्रति भारी रोष है। स्वास्थ्य विभाग के दावे टांय-टांय फिस हो रहे है। ग्रामीण मा. रामकुमार, कृष्ण नंबरदार, कुलदीप ढांडा, वेदप्रकाश, राजेश प्रजापत, राजेश पंच, राजेश धीमान, अंकित शर्मा ने बताया कि स्वास्थ्य केंद्र में पिछले लंबे समय से स्टाफ की भारी किल्लत होने के कारण यह स्वास्थ्य केंद्र लोगों के लिए केवल कागजों में ही स्वास्थ्य केंद्र रह गया है। स्वास्थ्य केंद्र में एक फार्मासिष्ट ही सभी मरीजों को देखता है। डाक्टरों के रिक्त पड़े पदों को लेकर ग्रामीणों ने स्वास्थ्य मंत्री तक गुहार लगाई लेकिन कुछ भी नहीं हो पाया। लोगों को आपातकालीन के लिए जींद व कैथल जाना पड़ता है। इसके अलावा कोई भी आसपास स्वास्थ्य केंद्र नहीं है। सरपंच प्रतिनिधि कृष्ण कुमार ने बताया कि गांव की पंचायत के साथ मिलकर कई बार वह चिकित्सकों की नियुक्ति के लिए गुहार लग चुके हैं। लेकिन अभी तक डाक्टरों के पद खाली पड़े हैं। ग्रामीणों ने एक स्वर में कहा कि अगर जल्दी ही डाक्टरों की नियुक्ति नहीं की गई तो सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर होंगे।
इस बारे में एसएमओ डॉ. रजनीश ने बताया कि डाक्टरों के पद खाली है। इस बारे में विभाग को लिखा हुआ है। लैब टेक्निशियन का पद भी खाली है राजौंद से लैब टेक्निशियन सप्ताह में एक दिन वहां जाता है।
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अमर उजाला ब्यूरो
राजौंद। गांव किठाना का प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र लोगों के लिए सफेद हाथी बनकर रह गया है। स्वास्थ्य केंद्र में पिछले लंबे समय से कोई भी डाक्टर नहीं है। यहां तक की लेडी डाक्टर की पोस्ट भी खाली पड़ी है। जिससे महिलाओं को भारी परेशानी हो रही है।
आसपास के दो दर्जन से भी अधिक गांवों के लोगों के लिए यह नाम का स्वास्थ्य केंद्र रह गया है। स्वास्थ्य केंद्र में न डेंटल डाक्टर है, न सर्जन डॉक्टर, न लेडी डॉक्टर के साथ-साथ यहां कोई लैब टेक्निकल भी नही हैं। जिसे लेकर लोगों में स्वास्थ्य विभाग के प्रति भारी रोष है। स्वास्थ्य विभाग के दावे टांय-टांय फिस हो रहे है। ग्रामीण मा. रामकुमार, कृष्ण नंबरदार, कुलदीप ढांडा, वेदप्रकाश, राजेश प्रजापत, राजेश पंच, राजेश धीमान, अंकित शर्मा ने बताया कि स्वास्थ्य केंद्र में पिछले लंबे समय से स्टाफ की भारी किल्लत होने के कारण यह स्वास्थ्य केंद्र लोगों के लिए केवल कागजों में ही स्वास्थ्य केंद्र रह गया है। स्वास्थ्य केंद्र में एक फार्मासिष्ट ही सभी मरीजों को देखता है। डाक्टरों के रिक्त पड़े पदों को लेकर ग्रामीणों ने स्वास्थ्य मंत्री तक गुहार लगाई लेकिन कुछ भी नहीं हो पाया। लोगों को आपातकालीन के लिए जींद व कैथल जाना पड़ता है। इसके अलावा कोई भी आसपास स्वास्थ्य केंद्र नहीं है। सरपंच प्रतिनिधि कृष्ण कुमार ने बताया कि गांव की पंचायत के साथ मिलकर कई बार वह चिकित्सकों की नियुक्ति के लिए गुहार लग चुके हैं। लेकिन अभी तक डाक्टरों के पद खाली पड़े हैं। ग्रामीणों ने एक स्वर में कहा कि अगर जल्दी ही डाक्टरों की नियुक्ति नहीं की गई तो सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर होंगे।
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इस बारे में एसएमओ डॉ. रजनीश ने बताया कि डाक्टरों के पद खाली है। इस बारे में विभाग को लिखा हुआ है। लैब टेक्निशियन का पद भी खाली है राजौंद से लैब टेक्निशियन सप्ताह में एक दिन वहां जाता है।
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