{"_id":"5c670e2ebdec2273673673ba","slug":"51550257710-kaithal-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"भाट, रैबारी, जंगम जोगी और मदारी जाति को घुमंतू जाति में किया जाएगा शामिल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
भाट, रैबारी, जंगम जोगी और मदारी जाति को घुमंतू जाति में किया जाएगा शामिल
विज्ञापन
भाट, रैबारी, जंगम जोगी और मदारी जाति को घुमंतू जाति में किया जाएगा शामिल
फोटो नंबर-52
अमर उजाला ब्यूरो
कलायत। विमुक्त जनजाति विकास बोर्ड के चेयरमैन डॉ. बलवान सिंह ने शुक्रवार को कलायत के वार्ड 2 में स्थित गाडियां लोहार बस्ती का दौरा किया। कर्मबीर बजरिया, महाबीर, महेंद्र, सलिंद्र, टेका, सुरजा, भागो देवी और दूसरे लोगों ने कहा कि घुमंतू जाति होने के कारण पुराने समय में उनके आधार कार्ड न होने के कारण पेंशन बनवाने की सुविधा उपलब्ध ही नहीं हो पाई। न ही सरकार द्वारा स्वच्छता अभियान के तहत आस-पास के क्षेत्र में शौचालय मुहैया करवाए गए है। उन्होंने गरीबी रेखा के तहत उन्हें बीपीएल सूची में शामिल करने के साथ-साथ शहरों में हुड्डा या हाउसिंग बोर्ड व गांव में 100-100 वर्ग गज के प्लाट दिलवाने की भी मांग रखी। डा.बलवान सिंह ने कहा कि विमुक्त घुमंतू जातियों के लोग लंबे समय से सरकार की योजनाओं के लाभ से वंचित रहते आए हैं। चेयरमैन ने कहा कि प्रदेशभर में विमुक्त घुमंतु जाति के 20 से 25 हजार ऐसे परिवार हैं, जिनके पास किसी प्रकार का कोई पहचान पत्र नहीं है। उन्होंने कहा कि इन परिवारों के पास रहने के लिए मकान भी नहीं है जिसकी वजह से वे खुले आसमान के नीचे अपना जीवन बसर करने पर मजबूर हैं। पहचान नहीं होने पर सरकार के सामने भी इनके लिए पुनर्वास करने की मुश्किल बनी है बलवान सिंह ने बताया कि वर्षों से भाट, रैबारी, जंगम जोगी, मनियार और मदारी जाति के लोगों द्वारा मांग की जा रही थी कि इन जातियों को भी घुमंतू जाति में शामिल किया जाए। इस बारे सरकार द्वारा विचार विमर्श कर जल्द ही इन जातियों को घुमंतू जाति में शामिल किया जाएगा।
विज्ञापन
फोटो नंबर-52
अमर उजाला ब्यूरो
कलायत। विमुक्त जनजाति विकास बोर्ड के चेयरमैन डॉ. बलवान सिंह ने शुक्रवार को कलायत के वार्ड 2 में स्थित गाडियां लोहार बस्ती का दौरा किया। कर्मबीर बजरिया, महाबीर, महेंद्र, सलिंद्र, टेका, सुरजा, भागो देवी और दूसरे लोगों ने कहा कि घुमंतू जाति होने के कारण पुराने समय में उनके आधार कार्ड न होने के कारण पेंशन बनवाने की सुविधा उपलब्ध ही नहीं हो पाई। न ही सरकार द्वारा स्वच्छता अभियान के तहत आस-पास के क्षेत्र में शौचालय मुहैया करवाए गए है। उन्होंने गरीबी रेखा के तहत उन्हें बीपीएल सूची में शामिल करने के साथ-साथ शहरों में हुड्डा या हाउसिंग बोर्ड व गांव में 100-100 वर्ग गज के प्लाट दिलवाने की भी मांग रखी। डा.बलवान सिंह ने कहा कि विमुक्त घुमंतू जातियों के लोग लंबे समय से सरकार की योजनाओं के लाभ से वंचित रहते आए हैं। चेयरमैन ने कहा कि प्रदेशभर में विमुक्त घुमंतु जाति के 20 से 25 हजार ऐसे परिवार हैं, जिनके पास किसी प्रकार का कोई पहचान पत्र नहीं है। उन्होंने कहा कि इन परिवारों के पास रहने के लिए मकान भी नहीं है जिसकी वजह से वे खुले आसमान के नीचे अपना जीवन बसर करने पर मजबूर हैं। पहचान नहीं होने पर सरकार के सामने भी इनके लिए पुनर्वास करने की मुश्किल बनी है बलवान सिंह ने बताया कि वर्षों से भाट, रैबारी, जंगम जोगी, मनियार और मदारी जाति के लोगों द्वारा मांग की जा रही थी कि इन जातियों को भी घुमंतू जाति में शामिल किया जाए। इस बारे सरकार द्वारा विचार विमर्श कर जल्द ही इन जातियों को घुमंतू जाति में शामिल किया जाएगा।