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बेटा खोया था हादसे में...आज परिवार की उम्मीदें भी खत्म हैं
Updated Wed, 14 Feb 2018 12:01 AM IST
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कमल कुमार
कैथल। ‘मैं रोज कहता था हेलमेट पहन कर जाना, मेरी मान लेता तो शायद आज मेरा भरा-पूरा परिवार होता।’ यह एक पिता और उसके परिवार की पीड़ा नहीं बल्कि ताउम्र हरा रहने वाला वह जख्म है, जिसकी कोई दवा नहीं है। यह दर्द है उस परिवार का है, जिसने नौजवान बेटा उसके विवाह के महज 2 माह बाद एक सड़क हादसे में महज हेलमेट ना पहनने के कारण खो दिया था। वर्ष 2015 में यह हादसा अर्जुन नगर निवासी कश्मीर सिंह के परिवार के साथ हुआ। कश्मीर के बेटे अशोक की बस की चपेट में आने से मौत हो गई थी। अशोक से पिता कश्मीर सिंह व बड़े भाई नरेंद्र को उम्मीदें थीं, उम्मीदों पर वह खरा भी उतरा। सफल हुआ। लेकिन आज स्थिति ये है कि पिता व भाई को अपना पुराना काम करते हुए परिवार चलाना पड़ रहा है।
छात्रावास रोड पर अपने पिता के साथ लोहार की दुकान चला रहे अशोक के बड़े भाई नरेंद्र ने बताया कि उसके छोटे भाई ने हादसे से कुछ दिनों पहले ही बाइक चलाना सीखा था। उसे ड्राइविंग का जुनून था। उसका यही जुनून उसके परिवार के दुख का कारण बना। उसने बताया कि हादसे से पांच महीने पहले ही भाई की शादी हुई थी। उसके दो महीने बाद उसे एक्सिस बैंक की नौकरी भी मिली थी।
ऐसे हुआ था हादसा : अशोक वर्ष 2015 की 10 अगस्त को चीका बैंक में ड्यूटी पर जा रहा था। जब वह पटियाला रोड पर अर्जुन नगर स्थित गली नंबर चार के पास पहुंचा तो पीछे से बस आ रही थी। बस उसे ओवरटेक कर उसकी मोटरसाइकिल की बगल से निकल रही थी। सड़क पर बजरी होने के कारण अचानक उसकी मोटरसाइकिल का टायर स्लिप हो गया। जिससे वह असंतुलित होकर सड़क पर गिर गया और उसका सिर बस की टायर के नीचे आ गया। उसकी मौके पर ही मौत हो गई।
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मेरी मान लेता तो शायद आज परिवार सदमे में न होता : नरेंद्र ने बताया कि अशोक नौकरी लगने के बाद रात को देर से आता था। मैं उसे हर रोज हेलमेट पहन कर जाने के लिए टोकता था। इस कारण उसने हादसे से दो दिन पहले ही अपने किसी दोस्त से हेलमेट भी मंगवाया था। लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। उसकी नौकरी से हमलोगों की आस जगी थी कि अब हमलोगों के दिन बदल जाएंगे। वह परिवार का सहारा भी बन गया था।
कमी कभी नहीं हो सकती पूरी : मृतक के परिवार में मां, भाई-भाभी, पिता बचे हैं। मां के आंसू थमने का नाम नहीं लेते। पिता को भी सदमा लगा। लेकिन वे परिवार चलाने के लिए आज भी दुकान पर संघर्षरत हैं। उनका कहना है कि यह कमी कभी पूरी नहीं हो सकती।
बहू मायके चली गई, क्लेम के रुपये भी नहीं मिले : अशोक के पिता कश्मीर ने बताया कि उसके बेटे अशोक की हादसे में मौत के बाद उसकी पत्नी मायके चली गई। उसने उसके ससुराल वालों से गुजारिश की थी कि वे अपनी बहू को बेटी बनाकर उसकी धूमधाम से अन्य स्थान पर शादी कर देंगे। लेकिन ससुराल वाले नहीं माने और उसे साथ ले गए। उसने बताया कि उसे मौत के बाद उसका क्लेम भी नहीं मिला। बेटे की बैंक में नौकरी के बाद परिवार को उससे काफी उम्मीदें थी। जिससे ऐसा लगने लगा था कि अब उसे उसके बुढ़ापे की लाठी मिल गई है। लेकिन उसकी मौत ने उसे जिंदगी भर का एक गहरा कभी न भरने वाला जख्म दे दिया।
हम करेंगे हेलमेट पहनने की अपील, ताकि बच सके बेशकीमती जान
कैथल। अमर उजाला द्वारा हेलमेट पहनने के मुहिम पर छात्राओं ने इस पर अपने परिवार वालों सहित अपने आस पड़ोस के लोगों का जागरूक करने की अपील की बात कही है। छात्राओं का कहना है जिंदगी अनमोल है। दोपहिया वाहन पर हादसे के दौरान इसे बचाने में संजीवनी साबित होने वाले हेलमेट का प्रयोग अनिवार्य किया जाना चाहिए।
आरकेएसडी की बीसीए की छात्रा तनीशा ने कहा कि हम अपने परिवार और आस पड़ोस के लोगों को सड़क सुरक्षा के संदर्भ में उदाहरण देकर हेलमेट पहनने के प्रति जागरूक करेंगे। इसे हलके में नहीं लेना चाहिए। यह ड्राइविंग के समय हमारे लिए संजीवनी साबित हो सकती है।
छात्रा मनु ने कहा कि अगर हम ड्राइविंग के समय हेलमेट नहीं पहनेंगे तो यह हमारे लिए घातक साबित हो सकता है। कभी भी ड्राइविंग जिंदगी के लिए घातक सिद्ध न हो इसके लिए हेलमेट जरूर पहनें।
छात्रा कीर्ति ने कहा कि अगर जिंदगी है तो सब कुछ है। हमें अपनी जिंदगी को बचाने के लिए हेलमेट जरूर पहनना चाहिए। इसके लिए मैं अपनी सहेलियों, सगे संबंधी और परिवारवालों को हेलमेेट पहनने के लिए जागरूक करूंगी।
छात्रा दिव्या ने कहा कि आज की युवा पीढ़ी हेलमेट पहनना बालों के किए गए फैशन को खराब करना समझती है। लेकिन उन्हें अपनी इस सोच को बदलना चाहिए। अधिकांश युवा बिना लाइसेंस बनवाए ही ड्राइविंग करते हैं। ऐसा बिल्कुल नहीं होना चाहिए।
फ्लैग-- हेलमेट न पहनने के कारण सड़क हादसे में जान गंवाने वाले युवक के भाई ने अमर उजाला से बयां किया दर्द
‘मैं रोज कहता था हेलमेट पहन कर जाना, मेरी मान लेता तो शायद...’
- पिता ने कहा- बेटा के साथ ही सारी उम्मीदें भी हो गई खत्म
- शादी के तीन महीने बाद लगी थी बैंक में नौकरी, दो महीने बाद हादसे में हुई मौत घर से दो सौ मीटर की दूरी पर पहुंचते ही पटियाला रोड पर हुआ था हादसा
फोटो नंबर-6 से 9
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कैथल। ‘मैं रोज कहता था हेलमेट पहन कर जाना, मेरी मान लेता तो शायद आज मेरा भरा-पूरा परिवार होता।’ यह एक पिता और उसके परिवार की पीड़ा नहीं बल्कि ताउम्र हरा रहने वाला वह जख्म है, जिसकी कोई दवा नहीं है। यह दर्द है उस परिवार का है, जिसने नौजवान बेटा उसके विवाह के महज 2 माह बाद एक सड़क हादसे में महज हेलमेट ना पहनने के कारण खो दिया था। वर्ष 2015 में यह हादसा अर्जुन नगर निवासी कश्मीर सिंह के परिवार के साथ हुआ। कश्मीर के बेटे अशोक की बस की चपेट में आने से मौत हो गई थी। अशोक से पिता कश्मीर सिंह व बड़े भाई नरेंद्र को उम्मीदें थीं, उम्मीदों पर वह खरा भी उतरा। सफल हुआ। लेकिन आज स्थिति ये है कि पिता व भाई को अपना पुराना काम करते हुए परिवार चलाना पड़ रहा है।
छात्रावास रोड पर अपने पिता के साथ लोहार की दुकान चला रहे अशोक के बड़े भाई नरेंद्र ने बताया कि उसके छोटे भाई ने हादसे से कुछ दिनों पहले ही बाइक चलाना सीखा था। उसे ड्राइविंग का जुनून था। उसका यही जुनून उसके परिवार के दुख का कारण बना। उसने बताया कि हादसे से पांच महीने पहले ही भाई की शादी हुई थी। उसके दो महीने बाद उसे एक्सिस बैंक की नौकरी भी मिली थी।
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ऐसे हुआ था हादसा : अशोक वर्ष 2015 की 10 अगस्त को चीका बैंक में ड्यूटी पर जा रहा था। जब वह पटियाला रोड पर अर्जुन नगर स्थित गली नंबर चार के पास पहुंचा तो पीछे से बस आ रही थी। बस उसे ओवरटेक कर उसकी मोटरसाइकिल की बगल से निकल रही थी। सड़क पर बजरी होने के कारण अचानक उसकी मोटरसाइकिल का टायर स्लिप हो गया। जिससे वह असंतुलित होकर सड़क पर गिर गया और उसका सिर बस की टायर के नीचे आ गया। उसकी मौके पर ही मौत हो गई।
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मेरी मान लेता तो शायद आज परिवार सदमे में न होता : नरेंद्र ने बताया कि अशोक नौकरी लगने के बाद रात को देर से आता था। मैं उसे हर रोज हेलमेट पहन कर जाने के लिए टोकता था। इस कारण उसने हादसे से दो दिन पहले ही अपने किसी दोस्त से हेलमेट भी मंगवाया था। लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। उसकी नौकरी से हमलोगों की आस जगी थी कि अब हमलोगों के दिन बदल जाएंगे। वह परिवार का सहारा भी बन गया था।
कमी कभी नहीं हो सकती पूरी : मृतक के परिवार में मां, भाई-भाभी, पिता बचे हैं। मां के आंसू थमने का नाम नहीं लेते। पिता को भी सदमा लगा। लेकिन वे परिवार चलाने के लिए आज भी दुकान पर संघर्षरत हैं। उनका कहना है कि यह कमी कभी पूरी नहीं हो सकती।
बहू मायके चली गई, क्लेम के रुपये भी नहीं मिले : अशोक के पिता कश्मीर ने बताया कि उसके बेटे अशोक की हादसे में मौत के बाद उसकी पत्नी मायके चली गई। उसने उसके ससुराल वालों से गुजारिश की थी कि वे अपनी बहू को बेटी बनाकर उसकी धूमधाम से अन्य स्थान पर शादी कर देंगे। लेकिन ससुराल वाले नहीं माने और उसे साथ ले गए। उसने बताया कि उसे मौत के बाद उसका क्लेम भी नहीं मिला। बेटे की बैंक में नौकरी के बाद परिवार को उससे काफी उम्मीदें थी। जिससे ऐसा लगने लगा था कि अब उसे उसके बुढ़ापे की लाठी मिल गई है। लेकिन उसकी मौत ने उसे जिंदगी भर का एक गहरा कभी न भरने वाला जख्म दे दिया।
हम करेंगे हेलमेट पहनने की अपील, ताकि बच सके बेशकीमती जान
कैथल। अमर उजाला द्वारा हेलमेट पहनने के मुहिम पर छात्राओं ने इस पर अपने परिवार वालों सहित अपने आस पड़ोस के लोगों का जागरूक करने की अपील की बात कही है। छात्राओं का कहना है जिंदगी अनमोल है। दोपहिया वाहन पर हादसे के दौरान इसे बचाने में संजीवनी साबित होने वाले हेलमेट का प्रयोग अनिवार्य किया जाना चाहिए।
आरकेएसडी की बीसीए की छात्रा तनीशा ने कहा कि हम अपने परिवार और आस पड़ोस के लोगों को सड़क सुरक्षा के संदर्भ में उदाहरण देकर हेलमेट पहनने के प्रति जागरूक करेंगे। इसे हलके में नहीं लेना चाहिए। यह ड्राइविंग के समय हमारे लिए संजीवनी साबित हो सकती है।
छात्रा मनु ने कहा कि अगर हम ड्राइविंग के समय हेलमेट नहीं पहनेंगे तो यह हमारे लिए घातक साबित हो सकता है। कभी भी ड्राइविंग जिंदगी के लिए घातक सिद्ध न हो इसके लिए हेलमेट जरूर पहनें।
छात्रा कीर्ति ने कहा कि अगर जिंदगी है तो सब कुछ है। हमें अपनी जिंदगी को बचाने के लिए हेलमेट जरूर पहनना चाहिए। इसके लिए मैं अपनी सहेलियों, सगे संबंधी और परिवारवालों को हेलमेेट पहनने के लिए जागरूक करूंगी।
छात्रा दिव्या ने कहा कि आज की युवा पीढ़ी हेलमेट पहनना बालों के किए गए फैशन को खराब करना समझती है। लेकिन उन्हें अपनी इस सोच को बदलना चाहिए। अधिकांश युवा बिना लाइसेंस बनवाए ही ड्राइविंग करते हैं। ऐसा बिल्कुल नहीं होना चाहिए।
फ्लैग-- हेलमेट न पहनने के कारण सड़क हादसे में जान गंवाने वाले युवक के भाई ने अमर उजाला से बयां किया दर्द
‘मैं रोज कहता था हेलमेट पहन कर जाना, मेरी मान लेता तो शायद...’
- पिता ने कहा- बेटा के साथ ही सारी उम्मीदें भी हो गई खत्म
- शादी के तीन महीने बाद लगी थी बैंक में नौकरी, दो महीने बाद हादसे में हुई मौत घर से दो सौ मीटर की दूरी पर पहुंचते ही पटियाला रोड पर हुआ था हादसा
फोटो नंबर-6 से 9