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अद्वितीय है मां कात्यायनी शक्ति पीठ में स्थापित मां का विग्रह
Updated Wed, 10 Oct 2018 12:30 AM IST
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अद्वितीय है मां कात्यायनी शक्ति पीठ में स्थापित मां का विग्रह
निशीकांत शर्मा
कलायत। कुरुक्षेत्र 48 कोस में द्वापर युग के असंख्य स्मारक विद्यमान हैं पर कलायत क्षेत्र में द्वापर के अलावा पौराणिक युग के साक्षी के रूप में कपिल मुनि का ऐतिहासिक स्थान विद्यमान है। यहां भगवान कपिल ने मां देवहुति को सांख्य का ज्ञान दिया। कपिल मुनि मंदिर परिसर में ही स्थापित है मां कात्यायनी शक्ति पीठ। देवी की नवरात्र में छठा नवरात्र मां कात्यायनी को समर्पित होता है। कलायत में स्थित मां कात्यायनी शक्ति पीठ में पूरे वर्ष स्थानीय व दूर दराज से आने वाले श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है जो पूरे नवरात्रि अखंड जोत जलाकर नौ दिन का प्रवास करते हैं।
अद्भुत है मां का श्री विग्रह
मां कात्यायनी शक्ति पीठ के मुख्य पुजारी वेदप्रकाश गौतम ने बताया कि शक्ति पीठ में स्थित मां का विग्रह अपने आप में अद्वितीय तथा दुर्लभ है। उन्होंने बताया कि दो सौ वर्ष पूर्व बने इस पीठ में मां का जो विग्रह है उस पर मां शेर की सवारी घोड़े की सवारी की तरह से कर रही है। मां का श्री विग्रह जयपुर से सिर पर रख कर ही लाया गया था तथा मंदिर में तभी से अखंड ज्योति जल रही है।
ऋषिकुल में जन्म लेने से पड़ा नाम कात्यायनी
मां कात्यायनी के बारे में उन्होंने बताया कि एक बार कात्यायन ऋषि ने तप करके देवी से वरदान मांगा कि आप मेरे कुल में पुत्री के रूप में जन्म लें। देवी को अजन्मा माना जाता है और उसके बावजूद मां शक्ति ने अजन्मा स्वरूप त्याग कर ऋषिकुल में जन्म लिया इसी कारण उनका नाम कात्यायनी पड़ा। गौत्र परंपरा के हिसाब से कुल का गौत्र पुत्र से चलता है लेकिन देवी मां यहां सदा सर्वदा के लिए कात्यायन गौत्र से जुड़ गई।
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छट से है मां का गहरा नाता
नवरात्र में इस रात्रि का विशेष महत्व है। छटा स्वरूप मां कात्यायनी को बेमाता भी माना जाता है। माना जाता है बच्चे के जन्म के छठे दिन उसे वस्त्र डाले जाते हैं तथा मां कात्यायनी छठे दिन बच्चे का भाग्य भी लिखती है।
भगवान कृष्ण से है मां का सीधा संबंध
भागवताचार्य स्वामी इंद्राचार्य का कहना है कि कुछ भागवताचार्य मां कात्यायनी का संबंध भगवान कृष्ण से भी जोड़ कर देखते हैं। उनका कहना है कि कंस की कारागार में भगवान कृष्ण व मां कात्यायनी के बीच हुए समझौते में भगवान ने मां से वायदा किया था कि उनका सहयोग करने पर कलियुग में भगवान कृष्ण से पहले मां कात्यायनी की पूजा होगी।
हर दृष्टि से अद्वितीय है मां का शक्ति पीठ
कलायत के मां कात्यायनी शक्ति पीठ में स्थित मां का मंदिर हर दृष्टि से अपने आप में अद्वितीय है। दक्षिणोमुखी इस मंदिर में आठ कोण हैं जो हर देवी को समर्पित हैं और मां के दर्शनों के लिए आठ सीढ़ियां चढ़नी होती है। इस रात्रि में यदि पूरा रात जाग कर मां की पूजा की जाए तो विशेष फल की प्राप्ति होती है।
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निशीकांत शर्मा
कलायत। कुरुक्षेत्र 48 कोस में द्वापर युग के असंख्य स्मारक विद्यमान हैं पर कलायत क्षेत्र में द्वापर के अलावा पौराणिक युग के साक्षी के रूप में कपिल मुनि का ऐतिहासिक स्थान विद्यमान है। यहां भगवान कपिल ने मां देवहुति को सांख्य का ज्ञान दिया। कपिल मुनि मंदिर परिसर में ही स्थापित है मां कात्यायनी शक्ति पीठ। देवी की नवरात्र में छठा नवरात्र मां कात्यायनी को समर्पित होता है। कलायत में स्थित मां कात्यायनी शक्ति पीठ में पूरे वर्ष स्थानीय व दूर दराज से आने वाले श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है जो पूरे नवरात्रि अखंड जोत जलाकर नौ दिन का प्रवास करते हैं।
अद्भुत है मां का श्री विग्रह
मां कात्यायनी शक्ति पीठ के मुख्य पुजारी वेदप्रकाश गौतम ने बताया कि शक्ति पीठ में स्थित मां का विग्रह अपने आप में अद्वितीय तथा दुर्लभ है। उन्होंने बताया कि दो सौ वर्ष पूर्व बने इस पीठ में मां का जो विग्रह है उस पर मां शेर की सवारी घोड़े की सवारी की तरह से कर रही है। मां का श्री विग्रह जयपुर से सिर पर रख कर ही लाया गया था तथा मंदिर में तभी से अखंड ज्योति जल रही है।
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ऋषिकुल में जन्म लेने से पड़ा नाम कात्यायनी
मां कात्यायनी के बारे में उन्होंने बताया कि एक बार कात्यायन ऋषि ने तप करके देवी से वरदान मांगा कि आप मेरे कुल में पुत्री के रूप में जन्म लें। देवी को अजन्मा माना जाता है और उसके बावजूद मां शक्ति ने अजन्मा स्वरूप त्याग कर ऋषिकुल में जन्म लिया इसी कारण उनका नाम कात्यायनी पड़ा। गौत्र परंपरा के हिसाब से कुल का गौत्र पुत्र से चलता है लेकिन देवी मां यहां सदा सर्वदा के लिए कात्यायन गौत्र से जुड़ गई।
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छट से है मां का गहरा नाता
नवरात्र में इस रात्रि का विशेष महत्व है। छटा स्वरूप मां कात्यायनी को बेमाता भी माना जाता है। माना जाता है बच्चे के जन्म के छठे दिन उसे वस्त्र डाले जाते हैं तथा मां कात्यायनी छठे दिन बच्चे का भाग्य भी लिखती है।
भगवान कृष्ण से है मां का सीधा संबंध
भागवताचार्य स्वामी इंद्राचार्य का कहना है कि कुछ भागवताचार्य मां कात्यायनी का संबंध भगवान कृष्ण से भी जोड़ कर देखते हैं। उनका कहना है कि कंस की कारागार में भगवान कृष्ण व मां कात्यायनी के बीच हुए समझौते में भगवान ने मां से वायदा किया था कि उनका सहयोग करने पर कलियुग में भगवान कृष्ण से पहले मां कात्यायनी की पूजा होगी।
हर दृष्टि से अद्वितीय है मां का शक्ति पीठ
कलायत के मां कात्यायनी शक्ति पीठ में स्थित मां का मंदिर हर दृष्टि से अपने आप में अद्वितीय है। दक्षिणोमुखी इस मंदिर में आठ कोण हैं जो हर देवी को समर्पित हैं और मां के दर्शनों के लिए आठ सीढ़ियां चढ़नी होती है। इस रात्रि में यदि पूरा रात जाग कर मां की पूजा की जाए तो विशेष फल की प्राप्ति होती है।