फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Kaithal News ›   कैथल से पिहोवा नेशनल हाइवे का 80 प्रतिशत काम पूरा, गांव प्यौदा, सेगा व तितरम ने नहीं दी जमीन

कैथल से पिहोवा नेशनल हाइवे का 80 प्रतिशत काम पूरा, गांव प्यौदा, सेगा व तितरम ने नहीं दी जमीन

Wed, 10 Jan 2018 12:25 AM IST
Updated Wed, 10 Jan 2018 12:25 AM IST
विज्ञापन
कैथल से पिहोवा नेशनल हाइवे का 80 प्रतिशत काम पूरा, गांव प्यौदा, सेगा व तितरम ने नहीं दी जमीन

विज्ञापन
अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। एनएचएआई की ओर से बनाए जा रहे तितरम से प्यौदा नेशनल हाईवे के 80 प्रतिशत काम को पूरा करने के बाद भी एनएचएआई को 45 किलोमीटर में से 9 किलोमीटर पर कब्जा नहीं मिल रहा है। गांव प्यौदा, सेगा व तितरम ने जमीन के अधिग्रहण के बदले पैसे लेने के बावजूद कब्जा नहीं दिया है तो हरसौला में दिसंबर माह तक ही भुगतान हो पाया है तो लोगों ने गेहूं की बुआई कर दी। मंगलवार को गांव प्यौदा में जमीन पर कब्जा लेने के लिए प्रशासन ने गांव के लोगों के साथ बैठक की। इसमें लोगों ने दो टूक कह दिया कि वे गेहूं उठाने के बाद ही कब्जा देंगे। जबकि प्रशासन ने कहा है कि खुद कब्जा दे दें, या फिर प्रशासन को लेना पड़ेगा। 9 जुलाई 2018, 45 किलोमीटर के टुकड़े के पूरा होने की टारगेट तिथि है। इस पर कुल 459 करोड़ रुपये खर्च आना है।
तितरम मोड़ से अंबाला तक के लगभग 95 किलोमीटर लंबे नेशनल हाईवे को एनएचएआई की ओर से बनाया जा रहा है। इसमें पिहोवा तक 45 किलोमीटर का प्रोजेक्ट अलग से बन रहा है। इसके लिए लगभग 80 प्रतिशत काम पूरा हो गया है। पिछले माह तक गांव ग्योंग, प्यौदा, हरसौला, सेगा व नरड़ में जमीन का कब्जा नहीं मिल पाया था। लेकिन भुगतान होते ही गांव ग्योंग के लोगों ने कब्जा दे दिया। इन गांवों में से हरसौला में लगभग 50 प्रतिशत लोगों को भुगतान नहीं हो पाया था। अब उन्हें भी भुगतान कर दिया गया है। जबकि गांव प्यौदा, सेगा व नरड़ में 1 या 2 प्रतिशत लोगों का अभी भी भुगतान होना बाकी है। दो साल पहले इन गांवों में 70 प्रतिशत लोगों ने अपनी जमीन के बदले पैसे ले लिए थे। इसमें से बचे 27 से 28 प्रतिशत लोगों को दिसंबर 2017 में भुगतान कर दिया गया है। लेकिन एनएचएआई को जमीन पर कब्जा नहीं मिल पाया है।
विज्ञापन


गांव प्यौदा में हुई बैठक
मंगलवार को गांव प्यौदा में तहसीलदार रविंद्र मलिक, एनएचएआई की ओर से राजेश पूंडरी सहित अन्य प्रशासनिक अधिकारियों व गांव के सरपंच राममेहर की मौजूदगी में एक बैठक हुई। इसमें प्रशासनिक अधिकारियों ने गांव के लोगों से आग्रह किया कि वे जमीन से कब्जा छोड़ दें। ताकि यहां से सडक़ बनाई जा सके। वहीं गांव के लोगों ने कहा कि गांव में दिसंबर माह के अंत तक कई लोगों को पैसा मिला है। तब तक पूरे गांव के लोगों ने जमीन में गेहूं की बुआई कर दी। या तो प्रशासन उन्हें पहले रोकता। अब किसानों का जमीन की बुआई पर काफी खर्च हो चुका है। इसकी भरपाई कौन करेगा? इसीलिए फसल की कटाई तक कब्जा संभव नहीं। इसके बाद लोग उठकर चले गए।
विज्ञापन
विज्ञापन

तहसीलदार रविंद्र मलिक ने कहा कि गांव के लोगों से आग्रह किया गया है कि वे कब्जा छोड़ दें। क्योंकि उन्हें पूरा पैसा दिया जा चुका है। साथ ही एक साल का 12 प्रतिशत की दर से ब्याज भी दिया जा चुका है। जब जमीन सरकार की हो गई है तो उन्हें फसल की बुआई ही नहीं करनी चाहिए थी। यदि लोग कब्जा नहीं देते हैं तो प्रशासन कब्जा लेगा। लैंड रेवेन्यू एरिया के तहत लोगों से फसल की रिकवरी भी की जाएगी।
एनएचएआई के अधिकारी राजेश पूंडरी ने बताया कि 45 में से 11 किलोमीटर में एक इंच भी जमीन का कब्जा नहीं मिला है। जबकि शेष 80 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। गांव नरड़, सेगा, प्यौदा, तितरम व हरसौला में जमीन का मामला लटका हुआ है। हरसौला में 50 प्रतिशत लोगों को जमीन का भुगतान देरी से हुआ। लेकिन अब यह हो गया है। शेष गांवों में भी 70 प्रतिशत को भुगतान पहले दिया जा चुका है। 30 प्रतिशत का भुगतान दिसंबर 2017 में हो गया है। ग्योंग गांव ने सहयोग करते हुए 11 में से 2 किलोमीटर पर कब्जा दे दिया। अब 9 किलोमीटर का टुकड़ा बच गया है। सेगा व प्यौदा, तितरम ने एक इंच भी जमीन नहीं दी।
इस दर से मिला है गांव के लोगों को भुगतान
तितरम मोड़ से पिहोवा तक जमीन के अधिग्रहण के लिए पहले 28 लाख रुपये प्रति एकड़ की दर से भुगतान की बात हुई थी। इसके बाद किसानों ने कई दिनों तक आंदोलन किया तो सरकार के साथ बातचीत के बाद करीब 45 लाख रुपये प्रति एकड़ की दर से जमीन अधिग्रहण का मुआवजा दिया गया। अब ब्याज सहित प्रति एकड़ की दर से करीब 50 लाख रुपये का मुआवजा दिया जा चुका है।


ग्रामीण जमीन पर कब्जा देने को राजी नहीं
सरपंच राम मेहर प्यादा ने कहा कि गांव में लोग फसल उठाने तक कब्जा देने पर राजी नहीं हैं। लोगों का कहना है कि यदि कब्जा ही लेना था तो प्रशासन गेहूं की बुआई से पहले बताता। अब जब लोगों का गेहूं की बिजाई पर खर्च आ चुका है तो उन्हें फसल उठाने दे। यह गांव का सामूहिक फैसला है। पूरा गांव एकजुट है। गांव के लोग यह बात कहकर बैठक से उठकर चले गए। प्रशासन कानूनन कब्जा लेने की बात कहकर चला गया।


जब भुगतान मिल गया है तो जमीन पर दे दें कब्जा : तहसीलदार
पहले बताना चाहिए, गेहूं कटने के बाद ही खाली करेंगे : ग्रामीण
कैथल से पिहोवा नेशनल हाईवे निर्माण के लिए गांव प्यौदा, सेगा व तितरम ने नहीं दी जमीन, मंगलवार को हुई बैठक
फोटो संख्या 5 से 7
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed