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महापर्व छठ: व्रती महिलाओं ने अस्ताचलगामी सूर्य को दिया पहला अध्र्य
Updated Wed, 14 Nov 2018 12:38 AM IST
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महापर्व छठ: व्रती महिलाओं ने अस्ताचलगामी सूर्य को दिया पहला अर्घ्य
आज होगा जगारण, भोजपुरी गायक करेंगी शिरकत
फोटो नंबर-18 से 26
अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। महापर्व छठ के तीसरे दिन डेरा बाबा शीतलपुरी के तालाब में व्रती महिलाओं ने अस्ताचलगामी सूर्य को पहला अर्घ्य दिया। इससे पहले व्रतियों ने सोमवार को सूर्य के ढलने के बाद प्रसाद के लिए मिट्टी के चूल्हे पर आम की लकड़ियाें से गुड़ व चावल की खीर व रोटियां बनाई। जन विकास सेवा समिति के सदस्य बीएन शस्त्री व रविंद्र शास्त्री ने बताया कि मान्यता के अनुसार छठी मईया इस दौरान मायके आती हैं। लिहाजा निकाले गए नेवज पर सिंदूर लगाया जाता है। छठ व्रतियों ने व्रत को सफल बनाने और घर में सुख-समृद्धि की कामना के बाद प्रसाद के लिए बनाए गए रसियाव-रोटी, अदरख, मूली का सेवन किया। परिवार के अन्य सदस्य व्रतियों की ओर से निकाले गए नेवज को प्रसाद के रूप में ग्रहण किया। महिलाओं ने सोमवार को चंद्रास्त के साथ ही व्रती अगले 36 घंटे का निराहार व्रत शुरू किए। परंपरा के अनुसार व्रती अगले दो दिनों तक स्वच्छ कमरे में जमीन पर ही कंबल बिछाकर के सोते है। जिस कमरे में व्रत का सामान रहता है वहां भी परिवार के अन्य सदस्य शुद्घता के साथ ही प्रवेश करते है। इस मौके पर राधा, सरिता, हेमलता, संगीता, वनीता, अंजू, चंदेश सहित अन्य महिलाओं ने व्रत रखकर पूजा अर्चना की।
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फोटो नंबर-18 से 26
अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। महापर्व छठ के तीसरे दिन डेरा बाबा शीतलपुरी के तालाब में व्रती महिलाओं ने अस्ताचलगामी सूर्य को पहला अर्घ्य दिया। इससे पहले व्रतियों ने सोमवार को सूर्य के ढलने के बाद प्रसाद के लिए मिट्टी के चूल्हे पर आम की लकड़ियाें से गुड़ व चावल की खीर व रोटियां बनाई। जन विकास सेवा समिति के सदस्य बीएन शस्त्री व रविंद्र शास्त्री ने बताया कि मान्यता के अनुसार छठी मईया इस दौरान मायके आती हैं। लिहाजा निकाले गए नेवज पर सिंदूर लगाया जाता है। छठ व्रतियों ने व्रत को सफल बनाने और घर में सुख-समृद्धि की कामना के बाद प्रसाद के लिए बनाए गए रसियाव-रोटी, अदरख, मूली का सेवन किया। परिवार के अन्य सदस्य व्रतियों की ओर से निकाले गए नेवज को प्रसाद के रूप में ग्रहण किया। महिलाओं ने सोमवार को चंद्रास्त के साथ ही व्रती अगले 36 घंटे का निराहार व्रत शुरू किए। परंपरा के अनुसार व्रती अगले दो दिनों तक स्वच्छ कमरे में जमीन पर ही कंबल बिछाकर के सोते है। जिस कमरे में व्रत का सामान रहता है वहां भी परिवार के अन्य सदस्य शुद्घता के साथ ही प्रवेश करते है। इस मौके पर राधा, सरिता, हेमलता, संगीता, वनीता, अंजू, चंदेश सहित अन्य महिलाओं ने व्रत रखकर पूजा अर्चना की।