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42 डिग्री सेल्सियस तापमान में जिला अस्पताल में पीने के पानी का संकट
Updated Tue, 12 Jun 2018 11:52 PM IST
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42 डिग्री सेल्सियस तापमान में जिला अस्पताल में पीने के पानी का संकट
एक भी वाटर कूलर से नहीं मिल रहा ठंडा पानी
पहली मंजिल पर रखा वाटर कूलर सूखा
ग्राउंड फ्लोर पर रखे दो वाटर कूलरों से गर्म पानी
बाहर बोतल उठाए घूमते हैं मरीज व तिमारदार, स्वास्थ्य विभाग का ध्यान नहीं
कई मरीजों ने खुद कैंफर भरवाकर रखते हैं बैड पर
अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। नागरिेक अस्पताल में 42 डिग्री सेल्सियस तापमान के बीच पीने के पानी का संकट बना हुआ है। विभाग का इस ओर कोई ध्यान नहीं हैं। मरीजों व उनके तिमारदारों के लिए एक भी वाटर कूलर ढंग से काम नहीं कर रहा। कुछ बाहरी लोगों की मदद व अधिकतर मरीजों व उनके तिमारदारों द्वारा खुद पानी का प्रबंध करना पड़ रहा है। कई मरीज अपने घर से ही कैंफर लेकर आ रहे हैं तो कई बोतल उठाए अस्पताल के बाहर गेट पर रखे वाटर कूलर से पानी के लिए भटकते रहते हैं।
ग्राउंड फ्लोर पर रखे दो वाटर कूलरों में कूलिंग नहीं:-जिला अस्पताल में ग्राउंड फ्लोर पर रखे दो वाटर कूलरों में कूलिंग नहीं है। इनमें से गर्म पानी मरीज पीते हैं। सुबह यहीं पर हजारों की संख्या में लोगों की भीड़ रहती है। एक अनुमान के अनुसार हर रोज लगभग 1800 से 2000 मरीजों की ओपीडी होती है। दाखिल रहने वाले व मरीजों के साथ आने वाले लोगों की संख्या अलग है। ऐसे में पीने के पानी के लिए लोग परेशान रहते हैं। इसी प्रकार से पहली मंजिल पर एक वाटर कूलर रखा है। जो कई दिनों से खराब पड़ा हुआ है। इसमें गर्म पानी भी नहीं है।
अपने कैंफर लिए हुए हैं मरीज:-वार्ड में दाखिल एक मरीज के परिजनों ने बताया कि वे तो मजबूरन अपना कैंफर ही घर से भरकर लाते हैं। ताकि पानी के लिए यहां भटकना ना पड़े। बाकि मरीज बोतल उठाकर या तो नीचे समाजसेवी लोगों द्वारा रखी गई टंकी से आरओ का पानी लाते हैं या फिर प्रवेश द्वार पर रखे गए वाटर कूलर से पानी लेकर जाते हैं। कुछ लोगों को पानी खरीदना भी पड़ता है।
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स्टॉफ सदस्य घर से लाते हैं पानी:-नर्सिंग सहित अन्य स्टॉफ सदस्य भी अपने घर से ही पीने का पानी लेकर जाते हैं। एक नर्स ने कहा कि यहां जो पानी है, उसमें शोर भी है और पीने के लिए यह भी नहीं मिल पाता। जिस कारण अधिक स्टॉफ सदस्य घर से ही पीने का पानी लाती हैं।
पानी की व्यवस्था तो सही होनी चाहिए-जिले के गॉव बीरबांगड़ा निवासी सुनील पुत्र भीेम सिंह ने बताया कि वो पिछले छह महीनों से उसके पिता के लिए काले पीलिया की दवाई लेने के लिए आता है। यहां पानी की समस्या ज्यों की त्यों बनी हुई है।
इसी प्रकार से बुजुर्ग महिला ने कहा कि रे बेटा..पानी लेणा है तो नीचे चला जा...आड़े पानी कोनी। हाम भी नीचे तै ल्याएं हां। आड़े एक कूलर पड्या है, बंद ए रहवै है।
इस संबंध में पीएमओ डा. ओमप्रकाश ने कहा कि नीचे के दो वाटर कूलर चल रहे हैं। यदि कूलिंग नहीं है तो उन्हें ठीक करवाया जाएगा। ऊपर का वाटर कूलर आजकल में ही खराब हुआ होगा, इसे जल्द ठीक करवा दिया जाएगा। अस्पताल में पेयजल की समस्या नहीं रहेगी।
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एक भी वाटर कूलर से नहीं मिल रहा ठंडा पानी
पहली मंजिल पर रखा वाटर कूलर सूखा
ग्राउंड फ्लोर पर रखे दो वाटर कूलरों से गर्म पानी
बाहर बोतल उठाए घूमते हैं मरीज व तिमारदार, स्वास्थ्य विभाग का ध्यान नहीं
कई मरीजों ने खुद कैंफर भरवाकर रखते हैं बैड पर
अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। नागरिेक अस्पताल में 42 डिग्री सेल्सियस तापमान के बीच पीने के पानी का संकट बना हुआ है। विभाग का इस ओर कोई ध्यान नहीं हैं। मरीजों व उनके तिमारदारों के लिए एक भी वाटर कूलर ढंग से काम नहीं कर रहा। कुछ बाहरी लोगों की मदद व अधिकतर मरीजों व उनके तिमारदारों द्वारा खुद पानी का प्रबंध करना पड़ रहा है। कई मरीज अपने घर से ही कैंफर लेकर आ रहे हैं तो कई बोतल उठाए अस्पताल के बाहर गेट पर रखे वाटर कूलर से पानी के लिए भटकते रहते हैं।
ग्राउंड फ्लोर पर रखे दो वाटर कूलरों में कूलिंग नहीं:-जिला अस्पताल में ग्राउंड फ्लोर पर रखे दो वाटर कूलरों में कूलिंग नहीं है। इनमें से गर्म पानी मरीज पीते हैं। सुबह यहीं पर हजारों की संख्या में लोगों की भीड़ रहती है। एक अनुमान के अनुसार हर रोज लगभग 1800 से 2000 मरीजों की ओपीडी होती है। दाखिल रहने वाले व मरीजों के साथ आने वाले लोगों की संख्या अलग है। ऐसे में पीने के पानी के लिए लोग परेशान रहते हैं। इसी प्रकार से पहली मंजिल पर एक वाटर कूलर रखा है। जो कई दिनों से खराब पड़ा हुआ है। इसमें गर्म पानी भी नहीं है।
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अपने कैंफर लिए हुए हैं मरीज:-वार्ड में दाखिल एक मरीज के परिजनों ने बताया कि वे तो मजबूरन अपना कैंफर ही घर से भरकर लाते हैं। ताकि पानी के लिए यहां भटकना ना पड़े। बाकि मरीज बोतल उठाकर या तो नीचे समाजसेवी लोगों द्वारा रखी गई टंकी से आरओ का पानी लाते हैं या फिर प्रवेश द्वार पर रखे गए वाटर कूलर से पानी लेकर जाते हैं। कुछ लोगों को पानी खरीदना भी पड़ता है।
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स्टॉफ सदस्य घर से लाते हैं पानी:-नर्सिंग सहित अन्य स्टॉफ सदस्य भी अपने घर से ही पीने का पानी लेकर जाते हैं। एक नर्स ने कहा कि यहां जो पानी है, उसमें शोर भी है और पीने के लिए यह भी नहीं मिल पाता। जिस कारण अधिक स्टॉफ सदस्य घर से ही पीने का पानी लाती हैं।
पानी की व्यवस्था तो सही होनी चाहिए-जिले के गॉव बीरबांगड़ा निवासी सुनील पुत्र भीेम सिंह ने बताया कि वो पिछले छह महीनों से उसके पिता के लिए काले पीलिया की दवाई लेने के लिए आता है। यहां पानी की समस्या ज्यों की त्यों बनी हुई है।
इसी प्रकार से बुजुर्ग महिला ने कहा कि रे बेटा..पानी लेणा है तो नीचे चला जा...आड़े पानी कोनी। हाम भी नीचे तै ल्याएं हां। आड़े एक कूलर पड्या है, बंद ए रहवै है।
इस संबंध में पीएमओ डा. ओमप्रकाश ने कहा कि नीचे के दो वाटर कूलर चल रहे हैं। यदि कूलिंग नहीं है तो उन्हें ठीक करवाया जाएगा। ऊपर का वाटर कूलर आजकल में ही खराब हुआ होगा, इसे जल्द ठीक करवा दिया जाएगा। अस्पताल में पेयजल की समस्या नहीं रहेगी।