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कैथल शुगर मिल : अब तक का घाटा 3 अरब 8 करोड़ 51 लाख रुपये का घाटा
Updated Fri, 16 Mar 2018 12:12 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। को-ऑपरेटिव शुगर मिल में अब तक 3 अरब 8 करोड़ 51 लाख 686 हजार 283 रुपये का घाटा हुआ है। इसका कारण नहीं बताया जा रहा है। मिल से किसान द्वारा आरटीआई के माध्यम से मांगी गई जानकारी में यह खुलासा हुआ है। साथ ही एक ओर बड़ा खुलासा हुआ है कि इस सीजन में मिल में रिपेयर पर महज 20 दिनों में 6 करोड़ 63 लाख रुपये खर्च कर दिए गए। महज 20 दिन में इतनी बड़ी राशि कैसे और कहां खर्च की गई, किसानों ने इस बात पर भी सवाल उठाए हैं। किसानों ने डीसी को ज्ञापन देकर मुख्यमंत्री व शुगर फेडरेशन को मामले की जांच की मांग की है।
मिल में इस संबंध में रोष प्रकट करने पहुंचे किसानों की अगुवाई भारतीय किसान संघ के जिला अध्यक्ष गुलतान सिंह नैन ने की। इस मौके पर डीसी के माध्यम से प्रदेश सरकार के नाम एक ज्ञापन भी सौंपा गया। नैना सहित रणदीप फरल ने बताया कि कैथल की को-ऑपरेटिव शुगर मिल लिमिटेड में बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार हो रहा है। कुप्रबंधन की शिकायत मुख्यमंत्री को भी की थी। इसके बाद जब भारतीय किसान संघ ने शुगर मिल की व्यवस्था के बारे में आरटीआई से जानकारी मांगी तो पता चला कि मिल में अभी तक 3 अरब 8 करोड़ 51 लाख 68 हजार 283 रुपये का घाटा हुआ है। यह घाटा कैसे और किन कारणों से हुआ, इस बात का खुलासा नहीं किया जा रहा है। किसानों को घाटे की कोई जानकारी नहीं दी जा रही। यहां एक व्यक्ति द्वारा अवैध खुर्दा तक चलाया जा रहा है।
किसानों के नाम पर भरे जा रहे हैं फर्जी बांड : किसान रणदीप फरल ने कहा कि मिल में एक अधिकारी फर्जी बांड बनाता है। उदाहरण के लिए एक किसान के पास यदि 70 एकड़ जमीन है तो उसके 200 एकड़ के बांड बनाए जाते हैं। ताकि वह शेष एकड़ के लिए अपने चहेते किसानों के नाम से पर्ची काट सके। उन्होंने बताया कि मौके पर कुछ किसान ऐसे हैं जिनके पास ना जमीन है, ना कभी ठेके पर जमीन लेकर गन्ना बोया फिर भी उनके बांड बने हुए हैं।
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चालू सीजन में महज रिपेयर पर खर्च कर दिए 6 करोड़ 63 लाख : किसान गुल्तान व रणदीप फरल ने बताया कि खुराना के किसान जगदीश द्वारा मांगी गई आरटीआई सूचना से पता चला कि चालू सीजन में 6 करोड़ 63 लाख करोड़ रुपये की राशि रिपेयर मेंटेनेंस पर केवल 20 दिनों में खर्च कर दी गई। साथ ही 90 प्रतिशत लेबर और स्पेयर पार्ट बिल फर्जी तैयार किया गया है। शुगर मिल में मरम्मत के लिए पूरा स्टाफ है। उन्होंने बताया कि वेल्डिंग सेट, खराद मिल में उपलब्ध है, फिर भी रिपेयर व मेंटेनेंस पर इतना भारी खर्च? यह खर्च नहीं भ्रष्टाचार है? जितने बिल वाउचर फाइल में लगे हैं। इसके विपरीत स्टोर में पुराना सामान नहीं है? न ही पुराने सामान पर कुछ नंबर अंकित है। उन्होंने बताया कि केमिकल खरीद पर भी बहुत बड़ा भ्रष्टाचार हो रहा है। शुगर मिल के जितने भी ऑफिशियल कंप्यूटर है। इनकी भी फारेंसिक लैब से जांच होनी चाहिए। मिल में बने चीनी, खोई, सीरा, मली, इथनाइल, राख सब कुछ बिकता है तो फिर मिल घाटे में क्यों है?
किसानों दयाल सिंह खुराना, जगदीश सिंह खुराना, रामफल फतेहपुर, रामपाल नैना, बलजिंद्र खुराना, श्रीराम मोहना उपाध्यक्ष, पाला राम क्योड़क उपाध्यक्ष, सतीश कुमार ग्योंग खंड अध्यक्ष, अमरदीप सारण, महावीर धौंस, दीपक वालिया, अरूण वालिया, महिंद्र फतेपुर, बलविंद्र कुमार फरल, विजेंद्रपाल राणा फरल, सुखविंद्र फतेहपुर, कृष्ण कुमार नैना, कृष्ण कुमार क्योड़क, विक्रम क्योड़क, कुलदीप विजय राणा क्योड़क, महावीर धौंस, सैनी वालिया ने डीसी से मिलकर मामले की जांच क मांग की है।
इस संबंध में मिल प्रबंधक एवं सीटीएम वीरेंद्र चौधरी ने कहा कि उन्हें ज्वाइन किए महज 8 दिन हुए हैं। पता करवाएंगे कि क्या मामला है। अभी यह शिकायत भी संज्ञान में नहीं है।
डीसी सुनीता वर्मा ने कहा कि किसानों ने आज ज्ञापन दिया है। इसे मुख्यमंत्री कार्यालय भेज दिया गया है। साथ ही मिल प्रबंधक से रिपोर्ट मांगी गई है कि सभी उठाए गए सवालों का जवाब दें। इस रिपोर्ट को शुगर फेडरेशन को भेज दिया जाएगा।
कैथल शुगर मिल का अब तक का घाटा 3 अरब 8 करोड़ 51 लाख रुपये, चालू सीजन में महज 20 दिन में रिपेयर पर खर्च किए 6 करोड़ 663 लाख
हेडिंग- किसानों ने उठाए सवाल, कहा- घाटा है तो बीस दिन में कैसे खर्च की इतनी बड़ी राशि
मिल की कार्यप्रणाली में बड़े घोटाले की आशंका, जांच की मांग
डीसी को किसानों ने सौंपा मुख्यमंत्री व शुगर फेडरेशन के नाम ज्ञापन
फोटो संख्या-29
कैथल। को-ऑपरेटिव शुगर मिल में अब तक 3 अरब 8 करोड़ 51 लाख 686 हजार 283 रुपये का घाटा हुआ है। इसका कारण नहीं बताया जा रहा है। मिल से किसान द्वारा आरटीआई के माध्यम से मांगी गई जानकारी में यह खुलासा हुआ है। साथ ही एक ओर बड़ा खुलासा हुआ है कि इस सीजन में मिल में रिपेयर पर महज 20 दिनों में 6 करोड़ 63 लाख रुपये खर्च कर दिए गए। महज 20 दिन में इतनी बड़ी राशि कैसे और कहां खर्च की गई, किसानों ने इस बात पर भी सवाल उठाए हैं। किसानों ने डीसी को ज्ञापन देकर मुख्यमंत्री व शुगर फेडरेशन को मामले की जांच की मांग की है।
मिल में इस संबंध में रोष प्रकट करने पहुंचे किसानों की अगुवाई भारतीय किसान संघ के जिला अध्यक्ष गुलतान सिंह नैन ने की। इस मौके पर डीसी के माध्यम से प्रदेश सरकार के नाम एक ज्ञापन भी सौंपा गया। नैना सहित रणदीप फरल ने बताया कि कैथल की को-ऑपरेटिव शुगर मिल लिमिटेड में बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार हो रहा है। कुप्रबंधन की शिकायत मुख्यमंत्री को भी की थी। इसके बाद जब भारतीय किसान संघ ने शुगर मिल की व्यवस्था के बारे में आरटीआई से जानकारी मांगी तो पता चला कि मिल में अभी तक 3 अरब 8 करोड़ 51 लाख 68 हजार 283 रुपये का घाटा हुआ है। यह घाटा कैसे और किन कारणों से हुआ, इस बात का खुलासा नहीं किया जा रहा है। किसानों को घाटे की कोई जानकारी नहीं दी जा रही। यहां एक व्यक्ति द्वारा अवैध खुर्दा तक चलाया जा रहा है।
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किसानों के नाम पर भरे जा रहे हैं फर्जी बांड : किसान रणदीप फरल ने कहा कि मिल में एक अधिकारी फर्जी बांड बनाता है। उदाहरण के लिए एक किसान के पास यदि 70 एकड़ जमीन है तो उसके 200 एकड़ के बांड बनाए जाते हैं। ताकि वह शेष एकड़ के लिए अपने चहेते किसानों के नाम से पर्ची काट सके। उन्होंने बताया कि मौके पर कुछ किसान ऐसे हैं जिनके पास ना जमीन है, ना कभी ठेके पर जमीन लेकर गन्ना बोया फिर भी उनके बांड बने हुए हैं।
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चालू सीजन में महज रिपेयर पर खर्च कर दिए 6 करोड़ 63 लाख : किसान गुल्तान व रणदीप फरल ने बताया कि खुराना के किसान जगदीश द्वारा मांगी गई आरटीआई सूचना से पता चला कि चालू सीजन में 6 करोड़ 63 लाख करोड़ रुपये की राशि रिपेयर मेंटेनेंस पर केवल 20 दिनों में खर्च कर दी गई। साथ ही 90 प्रतिशत लेबर और स्पेयर पार्ट बिल फर्जी तैयार किया गया है। शुगर मिल में मरम्मत के लिए पूरा स्टाफ है। उन्होंने बताया कि वेल्डिंग सेट, खराद मिल में उपलब्ध है, फिर भी रिपेयर व मेंटेनेंस पर इतना भारी खर्च? यह खर्च नहीं भ्रष्टाचार है? जितने बिल वाउचर फाइल में लगे हैं। इसके विपरीत स्टोर में पुराना सामान नहीं है? न ही पुराने सामान पर कुछ नंबर अंकित है। उन्होंने बताया कि केमिकल खरीद पर भी बहुत बड़ा भ्रष्टाचार हो रहा है। शुगर मिल के जितने भी ऑफिशियल कंप्यूटर है। इनकी भी फारेंसिक लैब से जांच होनी चाहिए। मिल में बने चीनी, खोई, सीरा, मली, इथनाइल, राख सब कुछ बिकता है तो फिर मिल घाटे में क्यों है?
किसानों दयाल सिंह खुराना, जगदीश सिंह खुराना, रामफल फतेहपुर, रामपाल नैना, बलजिंद्र खुराना, श्रीराम मोहना उपाध्यक्ष, पाला राम क्योड़क उपाध्यक्ष, सतीश कुमार ग्योंग खंड अध्यक्ष, अमरदीप सारण, महावीर धौंस, दीपक वालिया, अरूण वालिया, महिंद्र फतेपुर, बलविंद्र कुमार फरल, विजेंद्रपाल राणा फरल, सुखविंद्र फतेहपुर, कृष्ण कुमार नैना, कृष्ण कुमार क्योड़क, विक्रम क्योड़क, कुलदीप विजय राणा क्योड़क, महावीर धौंस, सैनी वालिया ने डीसी से मिलकर मामले की जांच क मांग की है।
इस संबंध में मिल प्रबंधक एवं सीटीएम वीरेंद्र चौधरी ने कहा कि उन्हें ज्वाइन किए महज 8 दिन हुए हैं। पता करवाएंगे कि क्या मामला है। अभी यह शिकायत भी संज्ञान में नहीं है।
डीसी सुनीता वर्मा ने कहा कि किसानों ने आज ज्ञापन दिया है। इसे मुख्यमंत्री कार्यालय भेज दिया गया है। साथ ही मिल प्रबंधक से रिपोर्ट मांगी गई है कि सभी उठाए गए सवालों का जवाब दें। इस रिपोर्ट को शुगर फेडरेशन को भेज दिया जाएगा।
कैथल शुगर मिल का अब तक का घाटा 3 अरब 8 करोड़ 51 लाख रुपये, चालू सीजन में महज 20 दिन में रिपेयर पर खर्च किए 6 करोड़ 663 लाख
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मिल की कार्यप्रणाली में बड़े घोटाले की आशंका, जांच की मांग
डीसी को किसानों ने सौंपा मुख्यमंत्री व शुगर फेडरेशन के नाम ज्ञापन
फोटो संख्या-29