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सता पक्ष के 14 पार्षद शहर से बाहर..
Updated Wed, 26 Jul 2017 11:55 PM IST
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सत्ता पक्ष के 14 पार्षद शहर से बाहर
कांग्रेस समर्थित पार्षदों के साथ मिलकर आ सकता है चेयरमैन के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव
अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। शहर की राजनीति में महत्वपूर्ण घटनाक्रम के बीच बुधवार को भाजपा समर्थित करीब 14 पार्षद एकजुट होकर शहर से बाहर चले गए हैं। बताया जा रहा है कि वे पहाड़ी इलाके में घूमने निकले हैं। हालांकि अभी यह पुष्टि नहीं हो पाई कि वे कहां हैं। लेकिन बताया जा रहा है कि कांग्रेस समर्थित पार्षदों के समर्थन से नगर परिषद चेयरमैन के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव ला सकते हैं। दूसरी ओर चेयरमैन का कहना है कि उन्हें पार्षदों का समर्थन प्राप्त है।
विदित रहे कि नगर परिषद में 31 में से 8 कांग्रेस समर्थित पार्षदों के अलावा शेष पार्षद भाजपा समर्थित हैं। चुनाव के बाद यशपाल प्रजापति को चेयरमैन व कांग्रेस गुट से डा. पवन थरेजा को वाइस चेयरमैन बनाया गया था। पूर्व में कई बार सत्ता पक्ष के पार्षदों की नाराजगी सामने आ चुकी थी। लेकिन सत्ता पक्ष द्वारा हर बार नाराज पार्षदों से बातचीत कर मसले को सुलझा लिया था। लेकिन पिछले कई दिनों से सत्तापक्ष के ही कई पार्षदों की नाराजगी के चलते नया गुट तैयार हो रहा था। जिसमें बुधवार को करीब 14 पार्षद एकजुट होकर शहर से बाहर घूमने निकल गए। सूत्रों के अनुसार वे सभी अब कांग्रेस समर्थक 8 पार्षदों से भी संपर्क साध रहे हैं। अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए 31 में से दो तिहाई पार्षदों की आवश्यकता है। 14 पार्षदों को यदि कांग्रेस समर्थक पार्षदों का समर्थन मिल जाता है तो उनका पलड़ा भारी हो सकता है। एक पार्षद ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि वीरवार को ही अविश्वास प्रस्ताव लाया जा सकता है। लेकिन अभी यह पूरी तरह से तय नहीं हुआ है। असंतुष्ट पार्षदों
भाजपा के बड़े नेता रविभूषण गर्ग के यहां असंतुष्ट पार्षदों को मनाने के लिए बुधवार दोपहर को बैठक भी बुलाई गई जिसमें कोई पार्षद नहीं पहुंचा। बैठक में भाजपा के जिले के कई बड़े नेता मौजूद थे। दूसरी ओर असंतुष्ट पार्षदों में से एक ने कहा कि विकास कार्य में अनदेखी को लेकर वे मुख्यमंत्री से लेकर संगठन के बड़े से बड़े अधिकारियों तक अपनी बात पहुंचा चुके हैं। जब किसी भी स्तर पर सुनवाई नहीं हुई तो मजबूरन अब विरोध ही करना पड़ेगा।
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दूसरी ओर इस बात की जानकारी मिलते ही चेयरमैन पक्ष भी सक्रिय हो गया। बताया जा रहा है कि वे भी अपने पार्षदों के साथ बैठक करते रहे। उन्होंने कहा कि उन्हें पार्षदों का समर्थन प्राप्त है। पता चला है कि कुछ पार्षद बाहर गए हैं। विपक्षी दल विशेष रूप से कांग्रेस को शहर का विकास व पिछड़ा वर्ग से पार्षद का नेतृत्व रास नहीं आ रहा। उनके खिलाफ राजनीतिक षड्यंत्र रचा जा रहा है। लेकिन उन्हें शहर के पार्षदों का समर्थन प्राप्त है और पूरे शहर में समान रूप से विकास कार्य करवाए जा रहे हैं।
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कांग्रेस समर्थित पार्षदों के साथ मिलकर आ सकता है चेयरमैन के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव
अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। शहर की राजनीति में महत्वपूर्ण घटनाक्रम के बीच बुधवार को भाजपा समर्थित करीब 14 पार्षद एकजुट होकर शहर से बाहर चले गए हैं। बताया जा रहा है कि वे पहाड़ी इलाके में घूमने निकले हैं। हालांकि अभी यह पुष्टि नहीं हो पाई कि वे कहां हैं। लेकिन बताया जा रहा है कि कांग्रेस समर्थित पार्षदों के समर्थन से नगर परिषद चेयरमैन के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव ला सकते हैं। दूसरी ओर चेयरमैन का कहना है कि उन्हें पार्षदों का समर्थन प्राप्त है।
विदित रहे कि नगर परिषद में 31 में से 8 कांग्रेस समर्थित पार्षदों के अलावा शेष पार्षद भाजपा समर्थित हैं। चुनाव के बाद यशपाल प्रजापति को चेयरमैन व कांग्रेस गुट से डा. पवन थरेजा को वाइस चेयरमैन बनाया गया था। पूर्व में कई बार सत्ता पक्ष के पार्षदों की नाराजगी सामने आ चुकी थी। लेकिन सत्ता पक्ष द्वारा हर बार नाराज पार्षदों से बातचीत कर मसले को सुलझा लिया था। लेकिन पिछले कई दिनों से सत्तापक्ष के ही कई पार्षदों की नाराजगी के चलते नया गुट तैयार हो रहा था। जिसमें बुधवार को करीब 14 पार्षद एकजुट होकर शहर से बाहर घूमने निकल गए। सूत्रों के अनुसार वे सभी अब कांग्रेस समर्थक 8 पार्षदों से भी संपर्क साध रहे हैं। अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए 31 में से दो तिहाई पार्षदों की आवश्यकता है। 14 पार्षदों को यदि कांग्रेस समर्थक पार्षदों का समर्थन मिल जाता है तो उनका पलड़ा भारी हो सकता है। एक पार्षद ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि वीरवार को ही अविश्वास प्रस्ताव लाया जा सकता है। लेकिन अभी यह पूरी तरह से तय नहीं हुआ है। असंतुष्ट पार्षदों
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भाजपा के बड़े नेता रविभूषण गर्ग के यहां असंतुष्ट पार्षदों को मनाने के लिए बुधवार दोपहर को बैठक भी बुलाई गई जिसमें कोई पार्षद नहीं पहुंचा। बैठक में भाजपा के जिले के कई बड़े नेता मौजूद थे। दूसरी ओर असंतुष्ट पार्षदों में से एक ने कहा कि विकास कार्य में अनदेखी को लेकर वे मुख्यमंत्री से लेकर संगठन के बड़े से बड़े अधिकारियों तक अपनी बात पहुंचा चुके हैं। जब किसी भी स्तर पर सुनवाई नहीं हुई तो मजबूरन अब विरोध ही करना पड़ेगा।
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दूसरी ओर इस बात की जानकारी मिलते ही चेयरमैन पक्ष भी सक्रिय हो गया। बताया जा रहा है कि वे भी अपने पार्षदों के साथ बैठक करते रहे। उन्होंने कहा कि उन्हें पार्षदों का समर्थन प्राप्त है। पता चला है कि कुछ पार्षद बाहर गए हैं। विपक्षी दल विशेष रूप से कांग्रेस को शहर का विकास व पिछड़ा वर्ग से पार्षद का नेतृत्व रास नहीं आ रहा। उनके खिलाफ राजनीतिक षड्यंत्र रचा जा रहा है। लेकिन उन्हें शहर के पार्षदों का समर्थन प्राप्त है और पूरे शहर में समान रूप से विकास कार्य करवाए जा रहे हैं।