{"_id":"68867893c2eaba6f2f0b04c4","slug":"29000-people-were-transported-to-chandigarh-panchkula-by-buses-kaithal-news-c-18-1-knl1004-702452-2025-07-28","type":"story","status":"publish","title_hn":"Kaithal News: बसों से 29,000 को पहुंचाया चंडीगढ़-पंचकूला","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Kaithal News: बसों से 29,000 को पहुंचाया चंडीगढ़-पंचकूला
Mon, 28 Jul 2025 12:35 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Mon, 28 Jul 2025 12:35 AM IST
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। सामान्य पात्रता परीक्षा (सीईटी) के सफल आयोजन के लिए जिला प्रशासन ने परिवहन व्यवस्था को बेहद सुनियोजित ढंग से संचालित किया। परीक्षा के दोनों दिन—26 और 27 जुलाई को—कुल 780 बसों के माध्यम से लगभग 29 हजार परीक्षार्थियों को चंडीगढ़ व पंचकूला पहुंचाया गया और परीक्षा के बाद उन्हें सुरक्षित वापस भी लाया गया।
प्रथम दिन 26 जुलाई को 380 बसों के जरिए करीब 14 हजार अभ्यर्थियों को गंतव्य तक पहुंचाया गया, जबकि 27 जुलाई को 400 बसों में लगभग 15 हजार परीक्षार्थियों ने सफर किया।
उधर, कैथल में परीक्षा देने आए जींद जिले के करीब 87% परीक्षार्थियों ने प्रशासन द्वारा उपलब्ध कराई गई शटल बस सेवा का लाभ लिया, जिससे उन्हें परीक्षा केंद्रों तक पहुंचने में सुविधा मिली।
विज्ञापन
रोडवेज महाप्रबंधक कमलजीत ने बताया कि परीक्षा के मद्देनज़र 25 जुलाई की शाम से ही बस सेवाएं आरंभ कर दी गई थीं। रोडवेज और आरटीए विभाग ने संयुक्त रूप से समन्वय बनाते हुए अग्रिम बुकिंग ऐप, हेल्प डेस्क और खाने-पीने की व्यवस्था सुनिश्चित की।
कैथल जिले में 10 स्थानों—कैथल, पूंडरी, पाई, राजौंद, कसान, कलायत, सीवन, चीका, ढांड और सांघन—से बसों का संचालन किया गया। प्रत्येक बिंदु पर हेल्प डेस्क की सुविधा उपलब्ध करवाई गई, जिसमें आरटीए गिरीश कुमार की अहम भूमिका रही।
बीडीपीओ बनी परीक्षार्थी की मददगार: 5 मिनट पहले परीक्षा केंद्र पहुंचाया
जींद जिले के उझाना गांव से आए एक परीक्षार्थी की एंट्री में चूक हो गई और वह गलती से हिंदू कन्या स्कूल पहुंच गया, जबकि उसका परीक्षा केंद्र इंडस पब्लिक स्कूल था। समय बेहद कम था और परीक्षार्थी तनाव में था। इस दौरान ड्यूटी मजिस्ट्रेट व सीवन बीडीपीओ नेहा ने मानवीय संवेदनाएं दिखाते हुए उसे अपनी निजी गाड़ी से सही परीक्षा केंद्र तक पहुंचाया। छात्र परीक्षा केंद्र में प्रवेश के लिए निर्धारित समय से महज पांच मिनट पहले वहां पहुंच सका।
लोगों का कहना था कि प्रशासन ने परीक्षा को सिर्फ एक आयोजन नहीं, बल्कि जिम्मेदारी के साथ एक उत्सव के रूप में निभाया, जिसमें संस्थाओं ने भी भागीदारी की। जगह-जगह परीक्षार्थियों और परिजनों के लिए खाने-पीने और ठहरने तक की मुफ्त सुविधाएं दी गईं।
विज्ञापन
कैथल। सामान्य पात्रता परीक्षा (सीईटी) के सफल आयोजन के लिए जिला प्रशासन ने परिवहन व्यवस्था को बेहद सुनियोजित ढंग से संचालित किया। परीक्षा के दोनों दिन—26 और 27 जुलाई को—कुल 780 बसों के माध्यम से लगभग 29 हजार परीक्षार्थियों को चंडीगढ़ व पंचकूला पहुंचाया गया और परीक्षा के बाद उन्हें सुरक्षित वापस भी लाया गया।
प्रथम दिन 26 जुलाई को 380 बसों के जरिए करीब 14 हजार अभ्यर्थियों को गंतव्य तक पहुंचाया गया, जबकि 27 जुलाई को 400 बसों में लगभग 15 हजार परीक्षार्थियों ने सफर किया।
विज्ञापन
उधर, कैथल में परीक्षा देने आए जींद जिले के करीब 87% परीक्षार्थियों ने प्रशासन द्वारा उपलब्ध कराई गई शटल बस सेवा का लाभ लिया, जिससे उन्हें परीक्षा केंद्रों तक पहुंचने में सुविधा मिली।
विज्ञापन
रोडवेज महाप्रबंधक कमलजीत ने बताया कि परीक्षा के मद्देनज़र 25 जुलाई की शाम से ही बस सेवाएं आरंभ कर दी गई थीं। रोडवेज और आरटीए विभाग ने संयुक्त रूप से समन्वय बनाते हुए अग्रिम बुकिंग ऐप, हेल्प डेस्क और खाने-पीने की व्यवस्था सुनिश्चित की।
कैथल जिले में 10 स्थानों—कैथल, पूंडरी, पाई, राजौंद, कसान, कलायत, सीवन, चीका, ढांड और सांघन—से बसों का संचालन किया गया। प्रत्येक बिंदु पर हेल्प डेस्क की सुविधा उपलब्ध करवाई गई, जिसमें आरटीए गिरीश कुमार की अहम भूमिका रही।
बीडीपीओ बनी परीक्षार्थी की मददगार: 5 मिनट पहले परीक्षा केंद्र पहुंचाया
जींद जिले के उझाना गांव से आए एक परीक्षार्थी की एंट्री में चूक हो गई और वह गलती से हिंदू कन्या स्कूल पहुंच गया, जबकि उसका परीक्षा केंद्र इंडस पब्लिक स्कूल था। समय बेहद कम था और परीक्षार्थी तनाव में था। इस दौरान ड्यूटी मजिस्ट्रेट व सीवन बीडीपीओ नेहा ने मानवीय संवेदनाएं दिखाते हुए उसे अपनी निजी गाड़ी से सही परीक्षा केंद्र तक पहुंचाया। छात्र परीक्षा केंद्र में प्रवेश के लिए निर्धारित समय से महज पांच मिनट पहले वहां पहुंच सका।
लोगों का कहना था कि प्रशासन ने परीक्षा को सिर्फ एक आयोजन नहीं, बल्कि जिम्मेदारी के साथ एक उत्सव के रूप में निभाया, जिसमें संस्थाओं ने भी भागीदारी की। जगह-जगह परीक्षार्थियों और परिजनों के लिए खाने-पीने और ठहरने तक की मुफ्त सुविधाएं दी गईं।