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क्राइम पेट्रोल व सावधान इंडिया जैसे सीरियलों पर रोक लगनी चाहिए
Updated Thu, 12 Apr 2018 12:20 AM IST
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महिलाओं से नहीं, पुरुषों से पूछो तुम कैसे सुधरोगे
मुख्यमंत्री के एक ओर सुधार कार्यक्रम तहत डायरेक्टर रॉकी मित्तल ने लिए महिलाओं से लिए सुझाव
सेनिटरी पैड पर 18 प्रतिशत जीएसटी, जबकि कंडोम पर कोई टेक्स नहीं जैसे मुद्दों पर भी बेबाकी से रखी महिलाओं ने बात
फोटो संख्या-15 से 30
अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। आरकेएसडी कॉलेज के सभागार में बुधवार को सरकार के ‘एक ओर सुधार’ कार्यक्रम के तहत महिला सशक्तीकरण के लिए महिलाओं से ही सुझाव लिए गए। इसके लिए इस प्रोजेक्ट के डायरेक्टर रॉकी मित्तल ने मुख्य रुप से भाग लिया। डीसी सुनीता वर्मा, एसपी आस्था मोदी व एडीसी पार्थ गुप्ता सहित अन्य गणमान्य लोग इस अवसर पर मौजूद थे। महिलाओं ने सरकार को कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए। जिसमें महिलाओं के साथ-साथ पुरुषों के लिए ट्रेनिंग देने व सेनेटरी नेपकीन पर 18 प्रतिशत जीएसटी जैसे गंभीर मुद्दे भी उठाए गए। इन महिलाओं में से 5 का चयन कर मुख्यमंत्री के सामने बैठाकर सुझाव लिए जाएंगे। एडीसी पार्थ गुप्ता, डीएसपी रामकुमार, जिला शिक्षा अधिकारी रामकुमार, प्रिंसिपल ओपी गर्ग के अलावा अन्य अधिकारी, स्कूली छात्राएं, शिक्षक मौजूद रहे।
महिलाओं का सशक्तीकरण होना जरूरी है। आज समाज में महिलाओं पर शोषण बढ़ता जा रहा है। लेकिन यदि महिलाओं को उनके अधिकारों की जानकारी होगी तो वे इस शोषण का मुकाबला कर सकती हैं।
-रूपाली, आरकेएसडी पब्लिक स्कूल
सरकारी स्कूल की छात्राओं के लिए वैन की सुविधा होनी चाहिए। छात्राओं को सेल्फ डिफेंस की ट्रेनिंग के लिए कोर्स शुरू किया जाए। इससे वे मनचलों से आसानी से मुकाबला कर सकती हैं।
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- अंकिता, राजकीय विद्यालय सीवन
छात्राएं किसी से कम नहीं हैं। लड़का उनकी ओर देखे तो उसी तेज नजर से उसे देखकर जवाब दें। डरने की बजाय ऐसे लड़कों का मुकाबला करें, जो उल्टा-सीधा बोलते हैं। लड़कियों को घर में कैद ना किया जाए।
- स्मृति, ओएसडीएवी पब्लिक स्कूल, कैथल।
ग्रामीण महिलाओं तक सरकार की योजनाएं नहीं पहुंच पा रही हैं। सरपंच, पंच ब्लॉक समिति सदस्य महिलाएं बन जाती हैं, उन्हें कोई काम करने नहीं दिया जाता। पुरुषों की भी ट्रेनिंग होनी चाहिए कि महिलाओं को काम करने दें।
- अमर राविश, जिला अध्यक्षा, पतंजलि महिला विंग
प्राथमिक शिक्षा से ही बच्चों को अच्छे व बुरे स्पर्श की जानकारी देने वाली शिक्षा व्यवस्था हो। स्कूल में मदर वूमन की नियुक्ति की व्यवस्था हो। जो बच्चों की समस्याएं जान कर उनका समाधान करवा सकें।
- प्रो. ऋचा, आरकेएसडी कॉलेज
महिलाओं से पूछने की बजाय पुरुषों से पूछो कि तुम कैसे सुधरोगे, ऐसे सेमीनार हों। सेनेटरी नैपकीन पर 18 प्रतिशत जीएसटी है, जबकि कंडोम पर कोई जीएसटी नहीं। यह गलत है। सेनेटरी नैपकीन जीएसटी फ्री हो।
- प्रो. परमिंद्र कौर, डीएववी कॉलेज पूंडरी
महिलाओं को आत्म मजबूती की जरूरत है। प्राथमिक तक की प्राइवेट स्कूलों की शिक्षा को सस्ता किया जाए या फिर सरकारी स्कूलों में व्यवस्था में सुधार हो। सावधान इंडिया, क्राइम पेट्रोल जैसे सीरियल बंद होने चाहिएं।
- पूर्णिमा, छात्रा बी.कॉम आरकेएसडी
महिलाओं के लिए रोजगार, टीचर्स को भी सेल्फ डिफेंस की ट्रेनिंग, रोडवेज बसें, बसों में सीसीटीवी कैमरों की व्यवस्था की जाए। इससे उनके आत्म सुरक्षा की भावना जागृत होगी। इससे उनका आत्मबल बढ़ेगा।
- प्रो. ज्योति, आईजी, कॉलेज कैथल।
बेघर महिलाएं पुलिस थाने में आ जाएं तो उन्हें कहां भेजें। सरकार इसके लिए प्रावधान करें। बतौर महिला थाना एसएचओ उन्हें यह दिक्कतें आ रही हैं। इसके अलावा महिलाओं को अपराध होने पर आगे आना चाहिए।
- निर्मला देवी, एसएचओ, महिला थाना, कैथल
गांवों में पंचायत या अन्य चुनाव में यदि चुनाव हो तो उम्मीदवार बनने से पहले इंटरव्यू लेकर यह देखा जाए कि महिला बोल सकती है या नहीं, क्योंकि बाद में सारे काम उनके पति या परिवार के अन्य सदस्य करते हैं।
- सुमन कश्यप, नरड़, ग्रहिणी
पुलिस का समय पर सहयोग नहीं मिलता। महिला पुलिस थाने चली भी जाए तो पुलिस कर्मचारी सीधे मुंह बात नहीं करते। इसीलिए सेवा सुरक्षा सहयोग का जो पुलिस का लोगो है, उसके अनुसार महिलाओं को मदद मिले।
- कृष्णा, गुहला।
खेल को सभी बढ़ावा देने की बात कहते हैं। बेटियों को परेशानियों से बचाना है तो खेलने दें। उन्हें अच्छे खेल के मैदान व उपकरण सहित डाइट उपलब्ध करवाई जाए। इससे उनमें मजबूती आएगी।
- मनजीत, छात्रा बीए, प्रथम वर्ष, आरकेएसडी
महिलाओं को मानसिक, शारीरिक व आर्थिक तौर पर आजादी चाहिए। इसके लिए उन्हें रोजगार मुहैया करवाया जाए। ताकि वे अपने फैसले ले सकें। इससे उनमें आत्मविश्वास बढ़ेगा।
- अंजू गंभीर, प्रिंसिपल डीएवी पुलिस स्कूल, कैथल।
गांवों में बेटियों को यातायात की सुविधा दी जाए। इसके अलावा उन्हें आत्मरक्षा की ट्रेनिंग भी दें। समाज की सकारात्मक सोच बनाने के लिए नीतियां बनाई जाएं।
- डॉ. सुनीता आहुजा, प्रिंसिपल आरोही स्कूल।
स्कूलों में शौचालयों की हालत खस्ता है। जहां हैं, वहां स्टाफ ताले लगाकर रखता है। सरकारी स्कूलों में इस ओर ध्यान दिया जाए। महिलाओं को रोजगार की ट्रेनिंग दी जाए। काम-काजी महिलाओं को सरकार इंसेंटिव दे।
- नगा रसूलपुर।
नगमा, गुहला
जिन महिलाओं, बेटियों व पुलिस कर्मचारियों ने विचार रखे हैं, उनमें से 5 का चयन किया जाएगा। इसी तरह प्रत्येक जिले से ऐसी महिलाओं का चयन किया जाएगा, जो सबसे अच्छे सुझाव देंगी कि प्रदेश सरकार महिलाओं के लिए क्या कर सकती है। सरकार व्यापक सुधार की दिशा में कार्य करेगी।
- रॉकी मित्तल, डायरेक्टर, एक ओर सुधार।
महिलाएं हीन भावना से ऊपर उठकर आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ें। महिलाओं का आत्मविश्वास बढ़ने से वे समाज में मजबूत होकर उभरेगी और उनकी भावनाओं की कदर होगी। अपनी प्रजाति को प्रताड़ित करने की बजाय ऐसी परिस्थितियां पैदा करें कि छेड़खानी की घटनाओं पर पूर्ण रूप से अंकुश लगे।
-सुनीता वर्मा, जिला उपायुक्त
मनोस्थिति बदलने से परिस्थितियां बदलेंगी इसलिए महिलाएं अपनी मनोस्थिति को मजबूत करें। पुरुषों के साथ-साथ महिलाएं भी भेदभाव करती हैं। महिला पुलिस स्टेशन स्थापित करने का अर्थ है कि महिलाओं को आरामदायक स्थिति में अपनी शिकायतें पुलिस तक पहुंचाना है।
- आस्था मोदी, पुलिस अधीक्षक
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मुख्यमंत्री के एक ओर सुधार कार्यक्रम तहत डायरेक्टर रॉकी मित्तल ने लिए महिलाओं से लिए सुझाव
सेनिटरी पैड पर 18 प्रतिशत जीएसटी, जबकि कंडोम पर कोई टेक्स नहीं जैसे मुद्दों पर भी बेबाकी से रखी महिलाओं ने बात
फोटो संख्या-15 से 30
अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। आरकेएसडी कॉलेज के सभागार में बुधवार को सरकार के ‘एक ओर सुधार’ कार्यक्रम के तहत महिला सशक्तीकरण के लिए महिलाओं से ही सुझाव लिए गए। इसके लिए इस प्रोजेक्ट के डायरेक्टर रॉकी मित्तल ने मुख्य रुप से भाग लिया। डीसी सुनीता वर्मा, एसपी आस्था मोदी व एडीसी पार्थ गुप्ता सहित अन्य गणमान्य लोग इस अवसर पर मौजूद थे। महिलाओं ने सरकार को कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए। जिसमें महिलाओं के साथ-साथ पुरुषों के लिए ट्रेनिंग देने व सेनेटरी नेपकीन पर 18 प्रतिशत जीएसटी जैसे गंभीर मुद्दे भी उठाए गए। इन महिलाओं में से 5 का चयन कर मुख्यमंत्री के सामने बैठाकर सुझाव लिए जाएंगे। एडीसी पार्थ गुप्ता, डीएसपी रामकुमार, जिला शिक्षा अधिकारी रामकुमार, प्रिंसिपल ओपी गर्ग के अलावा अन्य अधिकारी, स्कूली छात्राएं, शिक्षक मौजूद रहे।
महिलाओं का सशक्तीकरण होना जरूरी है। आज समाज में महिलाओं पर शोषण बढ़ता जा रहा है। लेकिन यदि महिलाओं को उनके अधिकारों की जानकारी होगी तो वे इस शोषण का मुकाबला कर सकती हैं।
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सरकारी स्कूल की छात्राओं के लिए वैन की सुविधा होनी चाहिए। छात्राओं को सेल्फ डिफेंस की ट्रेनिंग के लिए कोर्स शुरू किया जाए। इससे वे मनचलों से आसानी से मुकाबला कर सकती हैं।
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छात्राएं किसी से कम नहीं हैं। लड़का उनकी ओर देखे तो उसी तेज नजर से उसे देखकर जवाब दें। डरने की बजाय ऐसे लड़कों का मुकाबला करें, जो उल्टा-सीधा बोलते हैं। लड़कियों को घर में कैद ना किया जाए।
- स्मृति, ओएसडीएवी पब्लिक स्कूल, कैथल।
ग्रामीण महिलाओं तक सरकार की योजनाएं नहीं पहुंच पा रही हैं। सरपंच, पंच ब्लॉक समिति सदस्य महिलाएं बन जाती हैं, उन्हें कोई काम करने नहीं दिया जाता। पुरुषों की भी ट्रेनिंग होनी चाहिए कि महिलाओं को काम करने दें।
- अमर राविश, जिला अध्यक्षा, पतंजलि महिला विंग
प्राथमिक शिक्षा से ही बच्चों को अच्छे व बुरे स्पर्श की जानकारी देने वाली शिक्षा व्यवस्था हो। स्कूल में मदर वूमन की नियुक्ति की व्यवस्था हो। जो बच्चों की समस्याएं जान कर उनका समाधान करवा सकें।
- प्रो. ऋचा, आरकेएसडी कॉलेज
महिलाओं से पूछने की बजाय पुरुषों से पूछो कि तुम कैसे सुधरोगे, ऐसे सेमीनार हों। सेनेटरी नैपकीन पर 18 प्रतिशत जीएसटी है, जबकि कंडोम पर कोई जीएसटी नहीं। यह गलत है। सेनेटरी नैपकीन जीएसटी फ्री हो।
- प्रो. परमिंद्र कौर, डीएववी कॉलेज पूंडरी
महिलाओं को आत्म मजबूती की जरूरत है। प्राथमिक तक की प्राइवेट स्कूलों की शिक्षा को सस्ता किया जाए या फिर सरकारी स्कूलों में व्यवस्था में सुधार हो। सावधान इंडिया, क्राइम पेट्रोल जैसे सीरियल बंद होने चाहिएं।
- पूर्णिमा, छात्रा बी.कॉम आरकेएसडी
महिलाओं के लिए रोजगार, टीचर्स को भी सेल्फ डिफेंस की ट्रेनिंग, रोडवेज बसें, बसों में सीसीटीवी कैमरों की व्यवस्था की जाए। इससे उनके आत्म सुरक्षा की भावना जागृत होगी। इससे उनका आत्मबल बढ़ेगा।
- प्रो. ज्योति, आईजी, कॉलेज कैथल।
बेघर महिलाएं पुलिस थाने में आ जाएं तो उन्हें कहां भेजें। सरकार इसके लिए प्रावधान करें। बतौर महिला थाना एसएचओ उन्हें यह दिक्कतें आ रही हैं। इसके अलावा महिलाओं को अपराध होने पर आगे आना चाहिए।
- निर्मला देवी, एसएचओ, महिला थाना, कैथल
गांवों में पंचायत या अन्य चुनाव में यदि चुनाव हो तो उम्मीदवार बनने से पहले इंटरव्यू लेकर यह देखा जाए कि महिला बोल सकती है या नहीं, क्योंकि बाद में सारे काम उनके पति या परिवार के अन्य सदस्य करते हैं।
- सुमन कश्यप, नरड़, ग्रहिणी
पुलिस का समय पर सहयोग नहीं मिलता। महिला पुलिस थाने चली भी जाए तो पुलिस कर्मचारी सीधे मुंह बात नहीं करते। इसीलिए सेवा सुरक्षा सहयोग का जो पुलिस का लोगो है, उसके अनुसार महिलाओं को मदद मिले।
- कृष्णा, गुहला।
खेल को सभी बढ़ावा देने की बात कहते हैं। बेटियों को परेशानियों से बचाना है तो खेलने दें। उन्हें अच्छे खेल के मैदान व उपकरण सहित डाइट उपलब्ध करवाई जाए। इससे उनमें मजबूती आएगी।
- मनजीत, छात्रा बीए, प्रथम वर्ष, आरकेएसडी
महिलाओं को मानसिक, शारीरिक व आर्थिक तौर पर आजादी चाहिए। इसके लिए उन्हें रोजगार मुहैया करवाया जाए। ताकि वे अपने फैसले ले सकें। इससे उनमें आत्मविश्वास बढ़ेगा।
- अंजू गंभीर, प्रिंसिपल डीएवी पुलिस स्कूल, कैथल।
गांवों में बेटियों को यातायात की सुविधा दी जाए। इसके अलावा उन्हें आत्मरक्षा की ट्रेनिंग भी दें। समाज की सकारात्मक सोच बनाने के लिए नीतियां बनाई जाएं।
- डॉ. सुनीता आहुजा, प्रिंसिपल आरोही स्कूल।
स्कूलों में शौचालयों की हालत खस्ता है। जहां हैं, वहां स्टाफ ताले लगाकर रखता है। सरकारी स्कूलों में इस ओर ध्यान दिया जाए। महिलाओं को रोजगार की ट्रेनिंग दी जाए। काम-काजी महिलाओं को सरकार इंसेंटिव दे।
- नगा रसूलपुर।
नगमा, गुहला
जिन महिलाओं, बेटियों व पुलिस कर्मचारियों ने विचार रखे हैं, उनमें से 5 का चयन किया जाएगा। इसी तरह प्रत्येक जिले से ऐसी महिलाओं का चयन किया जाएगा, जो सबसे अच्छे सुझाव देंगी कि प्रदेश सरकार महिलाओं के लिए क्या कर सकती है। सरकार व्यापक सुधार की दिशा में कार्य करेगी।
- रॉकी मित्तल, डायरेक्टर, एक ओर सुधार।
महिलाएं हीन भावना से ऊपर उठकर आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ें। महिलाओं का आत्मविश्वास बढ़ने से वे समाज में मजबूत होकर उभरेगी और उनकी भावनाओं की कदर होगी। अपनी प्रजाति को प्रताड़ित करने की बजाय ऐसी परिस्थितियां पैदा करें कि छेड़खानी की घटनाओं पर पूर्ण रूप से अंकुश लगे।
-सुनीता वर्मा, जिला उपायुक्त
मनोस्थिति बदलने से परिस्थितियां बदलेंगी इसलिए महिलाएं अपनी मनोस्थिति को मजबूत करें। पुरुषों के साथ-साथ महिलाएं भी भेदभाव करती हैं। महिला पुलिस स्टेशन स्थापित करने का अर्थ है कि महिलाओं को आरामदायक स्थिति में अपनी शिकायतें पुलिस तक पहुंचाना है।
- आस्था मोदी, पुलिस अधीक्षक