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अयोध्या छोड़ वनों में पहुंचे श्री राम, भरत ने वपिस जाने के लिए किया आग्रह, नहीं माने राम
Updated Mon, 15 Oct 2018 11:54 PM IST
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अयोध्या छोड़ वनों में पहुंचे श्री राम, भरत ने वपिस जाने के लिए किया आग्रह, नहीं माने राम
श्री गणेश ड्रामट्रिक क्लब की ओर से रामलीला मंचन का पांचवा दिन
फोटो नंबर-15
अमर उजाला ब्यूरो
कैथल चंदाना गेट स्थित श्री ग्यारह रुद्री मंदिर में श्री गणेश ड्रामाट्रिक क्लब द्वारा किए जा रहे रामलीला मंचन में चौथे दिन श्री राम के अयोध्या छोडने और भरत मिलाप का दृश्य दिखाया गया। सबसे पहले मंच के कलाकारों ने प्रार्थना की। जिसके बाद रामलीला का मंचन शुरु हुआ। यह मंचन क्लब के निर्देशक रमेश चंद जांगड़ा व धर्मवीर असीजा के निर्देशन में किया जा रहा है। रविवार की रात पहले दृश्य में श्री राम चंद्र का अयोध्या पार कर वनों में पहुचंना दिखाया जाता है। जिसमें श्री राम को खेवट मिलते है जो उन्हें अयोध्या पार करवा दते है। श्री राम के अयोध्या से जाते ही भरत व शत्रुघन वापिस घर पहुंचते है। तब उन्हें कैकयी द्वारा राजा दशरथ से लिए गए दो वचनो की जानकारी मिलती है। जिस पर वह श्री राम, लक्षमण और सीता को अयोध्या वापिस लाने के लिए जंगलों में जाते है। वे श्री राम से मिलतें है तो लक्षमण इस बात पर क्रोधित हो उठते है कि भरत ने ही उनका राजतिलक मांगा है। लेकिन ऐसा नहीं होता। इसके बाद भरत श्री राम को अयोध्या वापिस चलने के लिए कहते है। लेकिन श्री राम भरत से कहते है कि वे अपने पिता के वचनों को टाल नहीं सकते। इसलिए वे उनके साथ वापिस नहीं जा सकते। मंचन में राम के पात्र में चन्नी, लक्षमण के पात्र में विनोद, दशरथ के पात्र में जगजीत, सीता के पात्र में सुनील, भरत के पात्र में सतीश गुप्ता, शत्रुघन के पात्र में अजय व खेवट के पात्र में रमेश जांगड़ा ने मंच पर प्रस्तुति दी। इस मौके पर क्लब प्रधान मांगे राम खुरानियां, मंदिर समिति से रमेश एडवोकेट, धनश्याम दास, अश्वनी शर्मा मौजूद रहे।
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श्री गणेश ड्रामट्रिक क्लब की ओर से रामलीला मंचन का पांचवा दिन
फोटो नंबर-15
अमर उजाला ब्यूरो
कैथल चंदाना गेट स्थित श्री ग्यारह रुद्री मंदिर में श्री गणेश ड्रामाट्रिक क्लब द्वारा किए जा रहे रामलीला मंचन में चौथे दिन श्री राम के अयोध्या छोडने और भरत मिलाप का दृश्य दिखाया गया। सबसे पहले मंच के कलाकारों ने प्रार्थना की। जिसके बाद रामलीला का मंचन शुरु हुआ। यह मंचन क्लब के निर्देशक रमेश चंद जांगड़ा व धर्मवीर असीजा के निर्देशन में किया जा रहा है। रविवार की रात पहले दृश्य में श्री राम चंद्र का अयोध्या पार कर वनों में पहुचंना दिखाया जाता है। जिसमें श्री राम को खेवट मिलते है जो उन्हें अयोध्या पार करवा दते है। श्री राम के अयोध्या से जाते ही भरत व शत्रुघन वापिस घर पहुंचते है। तब उन्हें कैकयी द्वारा राजा दशरथ से लिए गए दो वचनो की जानकारी मिलती है। जिस पर वह श्री राम, लक्षमण और सीता को अयोध्या वापिस लाने के लिए जंगलों में जाते है। वे श्री राम से मिलतें है तो लक्षमण इस बात पर क्रोधित हो उठते है कि भरत ने ही उनका राजतिलक मांगा है। लेकिन ऐसा नहीं होता। इसके बाद भरत श्री राम को अयोध्या वापिस चलने के लिए कहते है। लेकिन श्री राम भरत से कहते है कि वे अपने पिता के वचनों को टाल नहीं सकते। इसलिए वे उनके साथ वापिस नहीं जा सकते। मंचन में राम के पात्र में चन्नी, लक्षमण के पात्र में विनोद, दशरथ के पात्र में जगजीत, सीता के पात्र में सुनील, भरत के पात्र में सतीश गुप्ता, शत्रुघन के पात्र में अजय व खेवट के पात्र में रमेश जांगड़ा ने मंच पर प्रस्तुति दी। इस मौके पर क्लब प्रधान मांगे राम खुरानियां, मंदिर समिति से रमेश एडवोकेट, धनश्याम दास, अश्वनी शर्मा मौजूद रहे।