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100 निर्यातकों की ओर हरियाणा की मंडियों के आढ़तियों का 600 करोड़ बकाया
Updated Sun, 10 Sep 2017 12:40 AM IST
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100 निर्यातकों की ओर हरियाणा की मंडियों के आढ़तियों का 600 करोड़ बकाया
अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। प्रदेश भर की अनाज मंडियों का चावल निर्यातकों की ओर करीब 600 करोड़ रुपये की भारी भरकम राशि बकाया है। यदि इस राशि का भुगतान सीजन से पहले नहीं किया गया तो न केवल इन निर्यातकों को धान की खरीद में परेशानी आ सकती है। बल्कि किसानों को भी उनकी फसल बेचने में दिक्कतें आएंगी। आढ़तियों ने सरकार से मांग की है कि निर्यातकों से उनका बकाया भुगतान दिलवाया जाए।
पिछले सीजन का है बकाया, अभी तक नहीं दी जा रही राशि : शनिवार को कैथल में एकजुट हुए सभी जिलों में आढ़ती एसोसिएशन के प्रधान की बैठक में इस विषय पर चर्चा हुई। आढ़तियों का कहना है कि पिछले सीजन में उन्होंने निर्यातकों के लिए किसानों का धान खरीदा था। किसान अपनी फसल की कीमत ले गए। निर्यातक धान ले गए। लेकिन आढ़तियों को इस धान के लिए निर्यातक भुगतान नहीं कर रहे हैं। कई मंडियों में इस संबंध में केस भी दर्ज करवाए गए हैं। लेकिन कोई समाधान होता नजर नहीं आ रहा।
90 से ज्यादा निर्यातकों की ओर 600 करोड़ रुपये बकाया : आढ़तियों ने बताया कि प्रदेश भर में कैथल, कुरुक्षेत्र, करनाल, जींद, हिसार, फतेहाबाद सहित कई जिलों के करीब 90 निर्यातकों की ओर 600 करोड़ रुपये से ज्यादा का बकाया है। जिसके भुगतान न होने के कारण आढ़तियों की कमर ही टूट गई है। कई मंडियों में तो पूरी की पूरी मंडी की अर्थव्यवस्था चरमरा गई है। आढ़तियों को अपने खर्च चलाने भी मुश्किल हो रहे हैं।
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सरकार नहीं कर रही सहयोग : सरकार द्वारा इस मामले मेें आढ़तियों का सहयोग नहीं किया जा रहा। आढ़तियों ने कहा कि जब बड़े से बड़े लोग जेल जा सकते हैं तो क्या कारण है कि कई मंडियों में केस दर्ज होने के बावजूद निर्यातकों की गिरफ्तारी तक नहीं हो पा रही।
सीजन में नहीं होने देंगे इन निर्यातकों के लिए खरीद : कैथल में जुटे प्रदेश भर के आढ़ती एसोसिएशनों के प्रतिनिधियों ने कहा कि आने वाले गेहूं के सीजन में जिस भी निर्यातक की ओर आढ़तियों का भुगतान बकाया है। उसके लिए खरीद नहीं होने दी जाएगी। इसके लिए चाहे खरीद बंद ही क्यों ना करनी पड़े। खरीद ना होने पर सीजन में किसान को भी परेशानी हो सकती है।
अखिल भारतीय चावल निर्यातक एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष विजय सेतिया का कहना है कि ......
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अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। प्रदेश भर की अनाज मंडियों का चावल निर्यातकों की ओर करीब 600 करोड़ रुपये की भारी भरकम राशि बकाया है। यदि इस राशि का भुगतान सीजन से पहले नहीं किया गया तो न केवल इन निर्यातकों को धान की खरीद में परेशानी आ सकती है। बल्कि किसानों को भी उनकी फसल बेचने में दिक्कतें आएंगी। आढ़तियों ने सरकार से मांग की है कि निर्यातकों से उनका बकाया भुगतान दिलवाया जाए।
पिछले सीजन का है बकाया, अभी तक नहीं दी जा रही राशि : शनिवार को कैथल में एकजुट हुए सभी जिलों में आढ़ती एसोसिएशन के प्रधान की बैठक में इस विषय पर चर्चा हुई। आढ़तियों का कहना है कि पिछले सीजन में उन्होंने निर्यातकों के लिए किसानों का धान खरीदा था। किसान अपनी फसल की कीमत ले गए। निर्यातक धान ले गए। लेकिन आढ़तियों को इस धान के लिए निर्यातक भुगतान नहीं कर रहे हैं। कई मंडियों में इस संबंध में केस भी दर्ज करवाए गए हैं। लेकिन कोई समाधान होता नजर नहीं आ रहा।
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90 से ज्यादा निर्यातकों की ओर 600 करोड़ रुपये बकाया : आढ़तियों ने बताया कि प्रदेश भर में कैथल, कुरुक्षेत्र, करनाल, जींद, हिसार, फतेहाबाद सहित कई जिलों के करीब 90 निर्यातकों की ओर 600 करोड़ रुपये से ज्यादा का बकाया है। जिसके भुगतान न होने के कारण आढ़तियों की कमर ही टूट गई है। कई मंडियों में तो पूरी की पूरी मंडी की अर्थव्यवस्था चरमरा गई है। आढ़तियों को अपने खर्च चलाने भी मुश्किल हो रहे हैं।
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सरकार नहीं कर रही सहयोग : सरकार द्वारा इस मामले मेें आढ़तियों का सहयोग नहीं किया जा रहा। आढ़तियों ने कहा कि जब बड़े से बड़े लोग जेल जा सकते हैं तो क्या कारण है कि कई मंडियों में केस दर्ज होने के बावजूद निर्यातकों की गिरफ्तारी तक नहीं हो पा रही।
सीजन में नहीं होने देंगे इन निर्यातकों के लिए खरीद : कैथल में जुटे प्रदेश भर के आढ़ती एसोसिएशनों के प्रतिनिधियों ने कहा कि आने वाले गेहूं के सीजन में जिस भी निर्यातक की ओर आढ़तियों का भुगतान बकाया है। उसके लिए खरीद नहीं होने दी जाएगी। इसके लिए चाहे खरीद बंद ही क्यों ना करनी पड़े। खरीद ना होने पर सीजन में किसान को भी परेशानी हो सकती है।
अखिल भारतीय चावल निर्यातक एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष विजय सेतिया का कहना है कि ......