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Kaithal News: जिले के 20 गांव हुए टीबी मुक्त, एक हजार मरीज सक्रिय
Fri, 12 Apr 2024 01:29 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Fri, 12 Apr 2024 01:29 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। स्वास्थ्य विभाग की ओर से जिले को टीबी मुक्त बनाने के लिए शुरू अब रंग लाने लगी है। विभाग की ओर से करवाए गए सर्वे के बाद अब जिले के 20 गांव टीबी मुक्त हो गए हैं। टीबी की जांच को लेकर करीब छह महीने पहले ही विभाग ने सर्वे करवाया था। इस रिपोर्ट के आधार पर ही इन गांवों को टीबी मुक्त घोषित किया गया है। केंद्र सरकार ने भी 2025 तक देश को टीबी मुक्त बनाने का लक्ष्य रखा है।
पिछले साल 1800 मरीज पॉजिटिव मिले थे और 360 की मौत हुई थी। वर्तमान समय में करीब एक हजार मरीज एक्टिव हैं जबकि 350 मरीजों को विभिन्न सामाजिक संस्थाओं की तरफ से गोद लिया गया है। स्वास्थ्य विभाग टीबी के मरीजों को छह महीने में तीन हजार रुपये दे रही है। इसके तहत प्रतिमाह 500 रुपये दिए जाते हैं। इस योजना के तहत स्वास्थ्य विभाग ने एक साल में टीबी मरीजों को 70 लाख रुपये का अनुदान दिया है।
प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान ः टीबी से बचाव को लेकर केंद्र सरकार की ओर से भी प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान चलाया है। इस योजना के तहत अब जन प्रतिनिधि व समाजसेवी संस्थाओं के लोग मरीजों को गोद लिया है। मरीजों को गोद लेने के बाद उन्हें जरूरत का सामान पहुंचने सहित अन्य सहायता दी जा रही है।
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ऐसी है बीमारी ः टीबी बैक्टीरिया से होने वाली बीमारी है, जो हवा में संक्रमण से फैलती है। यह आमतौर पर फेफड़ों से शुरू होती है। सबसे कॉमन फेफड़ों की टीबी ही है लेकिन यह ब्रेन, यूटरस, मुंह, लिवर, किडनी, गला, हड्डी आदि शरीर के किसी भी हिस्से में हो सकती है। टीबी का बैक्टीरिया हवा के जरिए फैलता है। मरीज को इस बात का खास ख्याल रखना चाहिए कि किसी भी सूरत में डॉक्टर की बताई गई दवा न छूटे।
ये गांव हो चुके हैं टीबी मुक्त
n मंझेडी
n
बुडनपुर
n
छन्ना जाटान
n हरनौला
n जुनेदपुर
n सुल्तानियां
n कसौली
n खेड़ी दाबन
n
मेगा माजरा
n फर्शमाजरा
n ढंडवाना
n धेरूड़ू
n दुमाड़ा
n भालंग
n
कलासर
n नरवलगढ़
n सिल्लाखेड़ा
n बदनारा
n जटहेड़ी
n मुन्नाहेड़ी
सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर टीबी का इलाज निशुल्क उपलब्ध है। सरकार की तरफ से टीबी में मरीज को प्रतिमाह 500 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाती है। वहीं, टीबी की जांच के लिए जांच अभियान लगातार जारी है। सरकार समय-समय पर विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों में टीबी के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए प्रतियोगिताएं करवाती हैं। टीबी क्लीनिक में टीबी चैंपियन की कहानियां मरीजों से साझा की जाती है, ताकि कोई टीबी पीडि़त इस बीमारी के सामने घुटने न टेके। -डॉ. संदीप बातिश, नोडल अधिकारी, टीबी मुक्त अभियान, कैथल।
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कैथल। स्वास्थ्य विभाग की ओर से जिले को टीबी मुक्त बनाने के लिए शुरू अब रंग लाने लगी है। विभाग की ओर से करवाए गए सर्वे के बाद अब जिले के 20 गांव टीबी मुक्त हो गए हैं। टीबी की जांच को लेकर करीब छह महीने पहले ही विभाग ने सर्वे करवाया था। इस रिपोर्ट के आधार पर ही इन गांवों को टीबी मुक्त घोषित किया गया है। केंद्र सरकार ने भी 2025 तक देश को टीबी मुक्त बनाने का लक्ष्य रखा है।
पिछले साल 1800 मरीज पॉजिटिव मिले थे और 360 की मौत हुई थी। वर्तमान समय में करीब एक हजार मरीज एक्टिव हैं जबकि 350 मरीजों को विभिन्न सामाजिक संस्थाओं की तरफ से गोद लिया गया है। स्वास्थ्य विभाग टीबी के मरीजों को छह महीने में तीन हजार रुपये दे रही है। इसके तहत प्रतिमाह 500 रुपये दिए जाते हैं। इस योजना के तहत स्वास्थ्य विभाग ने एक साल में टीबी मरीजों को 70 लाख रुपये का अनुदान दिया है।
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प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान ः टीबी से बचाव को लेकर केंद्र सरकार की ओर से भी प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान चलाया है। इस योजना के तहत अब जन प्रतिनिधि व समाजसेवी संस्थाओं के लोग मरीजों को गोद लिया है। मरीजों को गोद लेने के बाद उन्हें जरूरत का सामान पहुंचने सहित अन्य सहायता दी जा रही है।
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ऐसी है बीमारी ः टीबी बैक्टीरिया से होने वाली बीमारी है, जो हवा में संक्रमण से फैलती है। यह आमतौर पर फेफड़ों से शुरू होती है। सबसे कॉमन फेफड़ों की टीबी ही है लेकिन यह ब्रेन, यूटरस, मुंह, लिवर, किडनी, गला, हड्डी आदि शरीर के किसी भी हिस्से में हो सकती है। टीबी का बैक्टीरिया हवा के जरिए फैलता है। मरीज को इस बात का खास ख्याल रखना चाहिए कि किसी भी सूरत में डॉक्टर की बताई गई दवा न छूटे।
ये गांव हो चुके हैं टीबी मुक्त
n मंझेडी
n
बुडनपुर
n
छन्ना जाटान
n हरनौला
n जुनेदपुर
n सुल्तानियां
n कसौली
n खेड़ी दाबन
n
मेगा माजरा
n फर्शमाजरा
n ढंडवाना
n धेरूड़ू
n दुमाड़ा
n भालंग
n
कलासर
n नरवलगढ़
n सिल्लाखेड़ा
n बदनारा
n जटहेड़ी
n मुन्नाहेड़ी
सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर टीबी का इलाज निशुल्क उपलब्ध है। सरकार की तरफ से टीबी में मरीज को प्रतिमाह 500 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाती है। वहीं, टीबी की जांच के लिए जांच अभियान लगातार जारी है। सरकार समय-समय पर विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों में टीबी के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए प्रतियोगिताएं करवाती हैं। टीबी क्लीनिक में टीबी चैंपियन की कहानियां मरीजों से साझा की जाती है, ताकि कोई टीबी पीडि़त इस बीमारी के सामने घुटने न टेके। -डॉ. संदीप बातिश, नोडल अधिकारी, टीबी मुक्त अभियान, कैथल।