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राइस मिलर्स एसोसिएशन में एग्रो को लेकर रोष
Updated Sat, 30 Jun 2018 11:40 PM IST
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राइस मिलर्स एसोसिएशन में एग्रो को लेकर रोष
बैठक करके जताया रोष, जो चावल दे दिए गए, उनके लिए नहीं दिया जा रहा भुगतान
मिलर्स ने कहा-मिलर्स चावल ना दें तो करवाई जा रही है एफआईआर, अब जब चावल दे दिया है तो भुगतान ना करने पर एजेंसी को भी करना चाहिए ब्याज सहित भुगतान
फोटो संख्या-16
अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। राइस मिलर्स एसोसिएशन की एक बैठक यहां नई अनाज मंडी में हुई। जिसमें हरियाणा एग्रो द्वारा मिलर्स के भुगतान को लेकर रोष प्रकट किया गया। मिलर्स में इस बात को लेकर रोष है कि एजेंसी द्वारा समय पर चावल ना देने पर केस दर्ज करवाया जा रहा है। जबकि जिन मिलर्स ने एजेंसी को चावल दे दिए हैं, उन्हें भुगतान नहीं किया जा रहा है। जब मिलर्स के खिलाफ केस दर्ज तक की कार्रवाई हो सकती है तो फिर भुगतान ना होने पर एजेंसी क्यों नहीं ब्याज सहित भुगतान कर सकती?
मिलर्स की बैठक में कहा कि एक तरफ तो हरियाणा सरकार 30 जून तक सीएमआर का कार्य समाप्त ना करने वालों की एफआईआर दर्ज कराने की बात कह रही है। तो दूसरी ओर जिन राइस मिलरों ने हरियाणा एग्रो. की जीरी सीएमआर का कार्य पूर्ण रूप से समाप्त करने पर भी मिलिंग राशि नहीं मिली है। हरियाणा एग्रो के कैथल कार्यालय में इस बारे में संपर्क करने पर कहा जाता है कि चंडीगढ़ कार्यालय में जाकर बात करो। कुछ मिलरों मै. विमला राइस इंटरनेशनल, एस इंटरप्राइज, सत्यम राइस मिल, सन फूड और कृष्णा राइस मिल ने बताया कि उन्होंने अपना मिलिंग का कार्य समय से समाप्त कर लिया। उनके मिलिंग के बिल 20 अप्रैल को चंडीगढ़ कार्यालय में चले गए थे। बार-बार चंडीगढ़ कार्यालय में बात करने पर वह बिल 23 मई को पास हुए। 70 प्रतिशत पेमेंट आरटीजीएस के रूप में दी गई व 30 प्रतिशत बकाया राशि रोक ली गई। जो कि आज तक वह राशि उन्हें मिली नहीं। दूसरी और मिलर मां बनभौरी राइस मिल, एसडी राइस मिल व जगदंबा राइस मिलों के मालिकों ने बताया कि उन्हें भी मिलिंग की राशि अभी तक नहीं मिली है। अगर सरकार देरी से गाड़ी लगने पर होल्डिंग चार्ज ले सकती है तो देरी से पेमेंट देने पर उन्हें भी ब्याज सहित बकाया राशि दिलवाई जाए।
डीएम हरियाणा एग्रो जगजीत सिंह ने कहा कि मिलर्स की समस्या जायज है। 30 प्रतिशत राशि रुकी हुई है। कुछ मिलर्स की यह 30 प्रतिशत भी हो चुकी है। जितनी भी बकाया राशि होगी, उसे विभाग मुख्यालय से कोओर्डिनेट करके शीघ्र भुगतान करवाया जाएगा।
बैठक करके जताया रोष, जो चावल दे दिए गए, उनके लिए नहीं दिया जा रहा भुगतान
मिलर्स ने कहा-मिलर्स चावल ना दें तो करवाई जा रही है एफआईआर, अब जब चावल दे दिया है तो भुगतान ना करने पर एजेंसी को भी करना चाहिए ब्याज सहित भुगतान
फोटो संख्या-16
अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। राइस मिलर्स एसोसिएशन की एक बैठक यहां नई अनाज मंडी में हुई। जिसमें हरियाणा एग्रो द्वारा मिलर्स के भुगतान को लेकर रोष प्रकट किया गया। मिलर्स में इस बात को लेकर रोष है कि एजेंसी द्वारा समय पर चावल ना देने पर केस दर्ज करवाया जा रहा है। जबकि जिन मिलर्स ने एजेंसी को चावल दे दिए हैं, उन्हें भुगतान नहीं किया जा रहा है। जब मिलर्स के खिलाफ केस दर्ज तक की कार्रवाई हो सकती है तो फिर भुगतान ना होने पर एजेंसी क्यों नहीं ब्याज सहित भुगतान कर सकती?
मिलर्स की बैठक में कहा कि एक तरफ तो हरियाणा सरकार 30 जून तक सीएमआर का कार्य समाप्त ना करने वालों की एफआईआर दर्ज कराने की बात कह रही है। तो दूसरी ओर जिन राइस मिलरों ने हरियाणा एग्रो. की जीरी सीएमआर का कार्य पूर्ण रूप से समाप्त करने पर भी मिलिंग राशि नहीं मिली है। हरियाणा एग्रो के कैथल कार्यालय में इस बारे में संपर्क करने पर कहा जाता है कि चंडीगढ़ कार्यालय में जाकर बात करो। कुछ मिलरों मै. विमला राइस इंटरनेशनल, एस इंटरप्राइज, सत्यम राइस मिल, सन फूड और कृष्णा राइस मिल ने बताया कि उन्होंने अपना मिलिंग का कार्य समय से समाप्त कर लिया। उनके मिलिंग के बिल 20 अप्रैल को चंडीगढ़ कार्यालय में चले गए थे। बार-बार चंडीगढ़ कार्यालय में बात करने पर वह बिल 23 मई को पास हुए। 70 प्रतिशत पेमेंट आरटीजीएस के रूप में दी गई व 30 प्रतिशत बकाया राशि रोक ली गई। जो कि आज तक वह राशि उन्हें मिली नहीं। दूसरी और मिलर मां बनभौरी राइस मिल, एसडी राइस मिल व जगदंबा राइस मिलों के मालिकों ने बताया कि उन्हें भी मिलिंग की राशि अभी तक नहीं मिली है। अगर सरकार देरी से गाड़ी लगने पर होल्डिंग चार्ज ले सकती है तो देरी से पेमेंट देने पर उन्हें भी ब्याज सहित बकाया राशि दिलवाई जाए।
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डीएम हरियाणा एग्रो जगजीत सिंह ने कहा कि मिलर्स की समस्या जायज है। 30 प्रतिशत राशि रुकी हुई है। कुछ मिलर्स की यह 30 प्रतिशत भी हो चुकी है। जितनी भी बकाया राशि होगी, उसे विभाग मुख्यालय से कोओर्डिनेट करके शीघ्र भुगतान करवाया जाएगा।
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