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पांचवें नवरात्र पर हुई स्कंदमाता की पूजा
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कैथल। बुधवार को पांचवें नवरात्र के उपलक्ष्य में मंदिरों में श्रद्धालुओं ने स्कंदमाता की पूजा की। नवरात्र के पावन अवसर पर मंदिरों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। शहर के छोटी देवी व बड़ी देवी मंदिर में श्रद्धालुओं ने सुबह व शाम के समय मां पूजा अर्चना करा रहे की। वहीं ढांड रोड पर स्थित शिव शक्ति धाम मंदिर में एडीसी आरके सिंह ने मां की विशेष पूजा की।
मंदिर के पुजारी पंडित प्रेमशंकर शास्त्री ने बताया कि मां दुर्गा के पांचवें स्वरूप को स्कंदमाता के नाम से जाना जाता है। इनकी उपासना नवरात्र के पांचवें दिन की जाती है। भगवान स्कंद कुमार कार्तिकेय नाम से भी जाने जाते हैं। ये प्रसिद्ध देवासुर-संग्राम में देवताओं के सेनापति बने थे। इन्हीं भगवान स्कंद की माता होने के कारण मां के इस पांचवें स्वरूप को स्कंदमाता के नाम से जाना जाता है।
राजौंद के आचार्य पंडित राम भगत हरितस ने बताया कि ज्योतिष पंचांग के अनुसार नवरात्र शब्द का अर्थ है नव रात्रि प्रतिपदा से नवमी पर्यंत नवरात्रा कहलाता है। श्रीमद् देवी भागवत अनुसार वर्ष में चार बार नवरात्र होते हैं। जिनमें चैत्र, अषाढ़, माघ, अश्विन मास लिए गए हैं। चैत्र, अषाढ़, ग्रीष्म कालीन नवरात्र तथा माघ, अश्विन शरद् कालीन नवरात्र के नाम से विख्यात है। आदि-शक्ति भवानी का स्मरण मुख्य काल नवरात्र है। जिसमें भक्तजन व्रत, कन्या पूजन, दुर्गा सप्तशती पाठ, सहस्त्र चंडी, शतचंडी, आयूष चंडी आदि यज्ञ करके अपने मनोरथ पूर्ण करते हैं। उन्होंने बताया कि दुर्गा अष्टमी की पूजा 13 अप्रैल को की जाएगी।
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मंदिर के पुजारी पंडित प्रेमशंकर शास्त्री ने बताया कि मां दुर्गा के पांचवें स्वरूप को स्कंदमाता के नाम से जाना जाता है। इनकी उपासना नवरात्र के पांचवें दिन की जाती है। भगवान स्कंद कुमार कार्तिकेय नाम से भी जाने जाते हैं। ये प्रसिद्ध देवासुर-संग्राम में देवताओं के सेनापति बने थे। इन्हीं भगवान स्कंद की माता होने के कारण मां के इस पांचवें स्वरूप को स्कंदमाता के नाम से जाना जाता है।
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राजौंद के आचार्य पंडित राम भगत हरितस ने बताया कि ज्योतिष पंचांग के अनुसार नवरात्र शब्द का अर्थ है नव रात्रि प्रतिपदा से नवमी पर्यंत नवरात्रा कहलाता है। श्रीमद् देवी भागवत अनुसार वर्ष में चार बार नवरात्र होते हैं। जिनमें चैत्र, अषाढ़, माघ, अश्विन मास लिए गए हैं। चैत्र, अषाढ़, ग्रीष्म कालीन नवरात्र तथा माघ, अश्विन शरद् कालीन नवरात्र के नाम से विख्यात है। आदि-शक्ति भवानी का स्मरण मुख्य काल नवरात्र है। जिसमें भक्तजन व्रत, कन्या पूजन, दुर्गा सप्तशती पाठ, सहस्त्र चंडी, शतचंडी, आयूष चंडी आदि यज्ञ करके अपने मनोरथ पूर्ण करते हैं। उन्होंने बताया कि दुर्गा अष्टमी की पूजा 13 अप्रैल को की जाएगी।
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