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रोहिला समाज की धर्मशाला को लेकर विवाद
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रोहिला समाज की धर्मशाला को लेकर विवाद
मौजूदा प्रधान ने धर्मशाला में चल रही फैक्टरी मालिक पर कब्जा करने का आरोप लगाकर चस्पा किया धर्मशाला को खाली करने का नोटिस
धर्मशाला में फैक्टरी चला रहे फैक्टरी मालिक ने कहा- पूर्व प्रधान ने उनके साथ किया था 5 साल का एग्रीमेंट, साढ़े तीन लाख रुपये भी खर्च चुके हैं धर्मशाला में
फोटो नंबर-01
अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। शहर में सैन समाज की धर्मशाला के विवाद के बाद अब फ्रांसवाला रोड पर स्थित रोहिल्ला टांक क्षत्रिय धर्मशाला को लेकर भी विवाद सामने आया है। धर्मशाला के प्रधान वीरेंद्र रोहिला ने धर्मशाला के बाहर मंगलवार को अधिवक्ता का नोटिस चस्पा करते हुए कहा है कि तीन दिन के अंदर-अंदर धर्मशाला में चलाई जा रही फैक्टरी को बंद करके इसे खाली किया जाए। दूसरी ओर फैक्टरी मालिक का कहना है कि उनके साथ पूर्व प्रधान ने 5 साल का एग्रीमेंट किया था। साथ ही उसने धर्मशाला में 3 लाख 50 हजार रुपये भी खर्च किए हैं। यदि उससे अभी यह फैक्टरी हटवा ली गई तो वह पूरी तरह से बर्बाद हो जाएगा।
धर्मशाला के प्रधान वीरेंद्र रोहिला ने कहा कि कुछ वर्षाें पहले जब इस धर्मशाला का निर्माण सरकार की सहायता से हुआ था तो उस समय समाज की कार्यकारिणी इतनी सक्रिय नहीं थी। जिसका फायदा उठाकर समाज के पूर्व प्रधान ने जितेंद्र नाम के व्यक्ति को इसे तीन महीने के लीज के लिए दे दिया था। लेकिन लीज पर लेने के बाद इस व्यक्ति ने धर्मशाला पर अपना कब्जा जमा लिया। जिससे समाज के लोगों में काफी रोष है। यदि तीन दिन के अंदर धर्मशाला को खाली नहीं करवाया गया तो समाम की ओर से इस पर ताला लटका दिया जाएगा। धर्मशाला के बाहर नोटिस चस्पाने के लिए समाज की ओर से सचिव सुरेंद्र, महेंद्र, सुनील, विनोद, टेकचंद, अशोक सहित अन्य मौजूद रहे।
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5 साल का एग्रीमेंट है और 3 लाख 50 हजार रुपये किए जा चुके हैं खर्च
वहीं यहां फैक्टरीचला रहे जितेंद्र ने कहा कि उन्होंने कोई कब्जा नहीं किया है। बल्कि समाज के प्रधान के साथ पिछले साल 5 साल का एग्रीमेंट हुआ था। साथ ही उसने धर्मशाला में विकास कार्यों में 3.50 लाख रुपये खर्चे हैं। इसमें कई चेकों के माध्यम से भी राशि गई हुई है। अब प्रधान बदल दिया गया है। तो इसमें उनका क्या कुसूर है। उनकी खर्च मुझे लौटा दिया जाए, मैं जगह खाली कर दूंगा। जितेंद्र ने कहा कि वे पूरे समाज का सम्मान करते हैं और समाज के प्रधान के साथ ही एग्रीमेंट के बाद यहां काम शुरू किया था। कब्जा करने जैसी कोई बात नहीं हैं।
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मौजूदा प्रधान ने धर्मशाला में चल रही फैक्टरी मालिक पर कब्जा करने का आरोप लगाकर चस्पा किया धर्मशाला को खाली करने का नोटिस
धर्मशाला में फैक्टरी चला रहे फैक्टरी मालिक ने कहा- पूर्व प्रधान ने उनके साथ किया था 5 साल का एग्रीमेंट, साढ़े तीन लाख रुपये भी खर्च चुके हैं धर्मशाला में
फोटो नंबर-01
अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। शहर में सैन समाज की धर्मशाला के विवाद के बाद अब फ्रांसवाला रोड पर स्थित रोहिल्ला टांक क्षत्रिय धर्मशाला को लेकर भी विवाद सामने आया है। धर्मशाला के प्रधान वीरेंद्र रोहिला ने धर्मशाला के बाहर मंगलवार को अधिवक्ता का नोटिस चस्पा करते हुए कहा है कि तीन दिन के अंदर-अंदर धर्मशाला में चलाई जा रही फैक्टरी को बंद करके इसे खाली किया जाए। दूसरी ओर फैक्टरी मालिक का कहना है कि उनके साथ पूर्व प्रधान ने 5 साल का एग्रीमेंट किया था। साथ ही उसने धर्मशाला में 3 लाख 50 हजार रुपये भी खर्च किए हैं। यदि उससे अभी यह फैक्टरी हटवा ली गई तो वह पूरी तरह से बर्बाद हो जाएगा।
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धर्मशाला के प्रधान वीरेंद्र रोहिला ने कहा कि कुछ वर्षाें पहले जब इस धर्मशाला का निर्माण सरकार की सहायता से हुआ था तो उस समय समाज की कार्यकारिणी इतनी सक्रिय नहीं थी। जिसका फायदा उठाकर समाज के पूर्व प्रधान ने जितेंद्र नाम के व्यक्ति को इसे तीन महीने के लीज के लिए दे दिया था। लेकिन लीज पर लेने के बाद इस व्यक्ति ने धर्मशाला पर अपना कब्जा जमा लिया। जिससे समाज के लोगों में काफी रोष है। यदि तीन दिन के अंदर धर्मशाला को खाली नहीं करवाया गया तो समाम की ओर से इस पर ताला लटका दिया जाएगा। धर्मशाला के बाहर नोटिस चस्पाने के लिए समाज की ओर से सचिव सुरेंद्र, महेंद्र, सुनील, विनोद, टेकचंद, अशोक सहित अन्य मौजूद रहे।
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5 साल का एग्रीमेंट है और 3 लाख 50 हजार रुपये किए जा चुके हैं खर्च
वहीं यहां फैक्टरीचला रहे जितेंद्र ने कहा कि उन्होंने कोई कब्जा नहीं किया है। बल्कि समाज के प्रधान के साथ पिछले साल 5 साल का एग्रीमेंट हुआ था। साथ ही उसने धर्मशाला में विकास कार्यों में 3.50 लाख रुपये खर्चे हैं। इसमें कई चेकों के माध्यम से भी राशि गई हुई है। अब प्रधान बदल दिया गया है। तो इसमें उनका क्या कुसूर है। उनकी खर्च मुझे लौटा दिया जाए, मैं जगह खाली कर दूंगा। जितेंद्र ने कहा कि वे पूरे समाज का सम्मान करते हैं और समाज के प्रधान के साथ ही एग्रीमेंट के बाद यहां काम शुरू किया था। कब्जा करने जैसी कोई बात नहीं हैं।