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आंगनबाड़ी वर्कर्स संगठनों में विवाद
Updated Sun, 25 Feb 2018 12:20 AM IST
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आंगनबाड़ी वर्कर्स संगठनों में पहले हुई बहस, बाद में अलग-अलग दिए धरने
अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। चंडीगढ़ में शुक्रवार को आंगनबाड़ी वर्कर्स यूनियन व सीटू से संबंधित यूनियन के पदाधिकारियों की विभाग के अधिकारियों के साथ हुई अलग-अलग बैठकों के विरोध में शनिवार को कैथल में धरनास्थल पर दोनों आंगनबाड़ी वर्कर्स एवं हेल्पर्स संगठनों में विवाद हो गया। मंच पर एक बार तो धक्का-मुक्की की नौबत आ गई। बाद में दोनों गुटों ने अलग-अलग धरना देने का ऐलान कर दिया।
कैथल में दोनों संगठनों द्वारा संयुक्त रूप से धरना दिया जा रहा है। शुक्रवार को चंडीगढ़ में जगमति मलिक गुट की अगुवाई कर रही जगमति मलिक ने सीटू नेताओं के साथ संयुक्त रूप से विभागीय अधिकारियों से बातचीत करने से इंकार कर दिया। इसके बाद दोनों संगठन पदाधिकारियों से अलग-अलग बातचीत की। शनिवार को इसी विवाद के चलते मंच पर दोनों गुटों के पदाधिकारियों की जमकर बहस हुई। एक बार तो नौबत धक्का-मुक्की तक आ गई। किसी तरह समझा-बुझाकर मामला शांत करवाया गया।
सीटू से संबंधित आंगनबाड़ी वर्कर्स यूनियन की राज्य महासचिव शकुंतला ने कहा कि विभाग के निदेशक के सामने जगमति गुट ने वर्कर्स की एकता को ठेस पहुंचाई और उनके संगठन के पदाधिकारियों के साथ संयुक्त रूप से बातचीत से इंकार कर दिया और कहा कि इन्हें बाहर भेजें। उनके संगठन ने संयुक्त लड़ाई, मांग-मुद्दे एक होने के चलते सामूहिक बातचीत की बात कही थी। उनका यही कहना था कि सरकार और अधिकारियों के सामने एकता दिखानी चाहिए थी। लेकिन यह घटनाक्रम संगठन के लिए अच्छा नहीं था। प्रदेश भर में अलग-अलग धरने दिए जा रहे हैं। केवल कैथल में ही सामूहिक आंदोलन पर जगमति गुट ने सहमति जताई तो फिर चंडीगढ़ में ऐसा क्यों किया गया। इसी के चलते अब फैसला लिया गया है कि धरना अलग दिया जाएगा। उनकी किसी से व्यक्तिगत लड़ाई नहीं है। वे केवल और केवल आंगनबाड़ी वर्कर्स व हेल्पर्स के हितों की लड़ाई लड़ रही हैं।
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वहीं जगमति गुट वाली आंगनबाड़ी वर्कर्स एवं हेल्पर्स यूनियन की राज्य कोषाध्यक्ष संतरो ने बताया कि उनके संगठन ने 12 फरवरी से धरना शुरू किया था। इसके बाद सीटू वाले गुट ने उन्हें 18 फरवरी को बुलाकर साथ में धरना देने की बात की। इस दौरान सीटू नेताओं सतबीर गोयत व अशोक शर्मा ने मध्यस्थता की थी। मंच से एक दूसरे के खिलाफ नहीं बोलेंगे। लेकिन शुक्रवार को जगमति मलिक ने सीटू नेताओं से अलग होकर बातचीत करने की बात की। इसी बात से गुस्साईं सीटू ग्रुप नेताओं ने मंच से ऐलान कर दिया कि जो सीटू से जुड़ी वर्कर्स हैं, वही धरने पर बैठे। जिसका उनके संगठन ने विरोध कर दिया। संतरो ने कहा कि उनका शुरू से ही धरना अलग था। अब वे यहां अलग से धरना देंगे।
दूसरी ओर सीटू की ओर से जारी विज्ञप्ति में बताया गया कि आंगनबाड़ी वर्कर्स एवं हैल्पर्स यूनियन कैथल संबंधित सीटू एवं सहयोग एसकेएस की हड़ताल व ताला बंदी का छठे दिन भी जारी रही। जिसकी अध्यक्षता जिला प्रधान राजबाला जाखौली ने की। मंच का संचालन नीतू राजौंद ने किया। राज्य महासचिव शकुंतला ने बताया कि जब तक उपरोक्त मांगों को नहीं माना जाता तब तक संघर्ष जारी रहेगा। उन्होंने अपने संबोधन में केंद्रों में खाना मदर ग्रुप द्वारा ही बनाए जाने व मेहनताने में वृद्धि की मांग की ।
आंदोलन को किसान सभा अध्यक्ष महेंद्र सिंह व किसान नेता पाल सिंह रोहेड़ा सत्यवान, महिला जनवादी समिति की प्रधान शर्मिला पिल्खन, अध्यापक संघ के स्टेट के नेता अध्यापक जयप्रकाश, नदर महासभा से भाई राजेश टैला, जिला महासचिव दिलबाग सिंह पटवारी ने संबोधित किया।
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अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। चंडीगढ़ में शुक्रवार को आंगनबाड़ी वर्कर्स यूनियन व सीटू से संबंधित यूनियन के पदाधिकारियों की विभाग के अधिकारियों के साथ हुई अलग-अलग बैठकों के विरोध में शनिवार को कैथल में धरनास्थल पर दोनों आंगनबाड़ी वर्कर्स एवं हेल्पर्स संगठनों में विवाद हो गया। मंच पर एक बार तो धक्का-मुक्की की नौबत आ गई। बाद में दोनों गुटों ने अलग-अलग धरना देने का ऐलान कर दिया।
कैथल में दोनों संगठनों द्वारा संयुक्त रूप से धरना दिया जा रहा है। शुक्रवार को चंडीगढ़ में जगमति मलिक गुट की अगुवाई कर रही जगमति मलिक ने सीटू नेताओं के साथ संयुक्त रूप से विभागीय अधिकारियों से बातचीत करने से इंकार कर दिया। इसके बाद दोनों संगठन पदाधिकारियों से अलग-अलग बातचीत की। शनिवार को इसी विवाद के चलते मंच पर दोनों गुटों के पदाधिकारियों की जमकर बहस हुई। एक बार तो नौबत धक्का-मुक्की तक आ गई। किसी तरह समझा-बुझाकर मामला शांत करवाया गया।
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सीटू से संबंधित आंगनबाड़ी वर्कर्स यूनियन की राज्य महासचिव शकुंतला ने कहा कि विभाग के निदेशक के सामने जगमति गुट ने वर्कर्स की एकता को ठेस पहुंचाई और उनके संगठन के पदाधिकारियों के साथ संयुक्त रूप से बातचीत से इंकार कर दिया और कहा कि इन्हें बाहर भेजें। उनके संगठन ने संयुक्त लड़ाई, मांग-मुद्दे एक होने के चलते सामूहिक बातचीत की बात कही थी। उनका यही कहना था कि सरकार और अधिकारियों के सामने एकता दिखानी चाहिए थी। लेकिन यह घटनाक्रम संगठन के लिए अच्छा नहीं था। प्रदेश भर में अलग-अलग धरने दिए जा रहे हैं। केवल कैथल में ही सामूहिक आंदोलन पर जगमति गुट ने सहमति जताई तो फिर चंडीगढ़ में ऐसा क्यों किया गया। इसी के चलते अब फैसला लिया गया है कि धरना अलग दिया जाएगा। उनकी किसी से व्यक्तिगत लड़ाई नहीं है। वे केवल और केवल आंगनबाड़ी वर्कर्स व हेल्पर्स के हितों की लड़ाई लड़ रही हैं।
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वहीं जगमति गुट वाली आंगनबाड़ी वर्कर्स एवं हेल्पर्स यूनियन की राज्य कोषाध्यक्ष संतरो ने बताया कि उनके संगठन ने 12 फरवरी से धरना शुरू किया था। इसके बाद सीटू वाले गुट ने उन्हें 18 फरवरी को बुलाकर साथ में धरना देने की बात की। इस दौरान सीटू नेताओं सतबीर गोयत व अशोक शर्मा ने मध्यस्थता की थी। मंच से एक दूसरे के खिलाफ नहीं बोलेंगे। लेकिन शुक्रवार को जगमति मलिक ने सीटू नेताओं से अलग होकर बातचीत करने की बात की। इसी बात से गुस्साईं सीटू ग्रुप नेताओं ने मंच से ऐलान कर दिया कि जो सीटू से जुड़ी वर्कर्स हैं, वही धरने पर बैठे। जिसका उनके संगठन ने विरोध कर दिया। संतरो ने कहा कि उनका शुरू से ही धरना अलग था। अब वे यहां अलग से धरना देंगे।
दूसरी ओर सीटू की ओर से जारी विज्ञप्ति में बताया गया कि आंगनबाड़ी वर्कर्स एवं हैल्पर्स यूनियन कैथल संबंधित सीटू एवं सहयोग एसकेएस की हड़ताल व ताला बंदी का छठे दिन भी जारी रही। जिसकी अध्यक्षता जिला प्रधान राजबाला जाखौली ने की। मंच का संचालन नीतू राजौंद ने किया। राज्य महासचिव शकुंतला ने बताया कि जब तक उपरोक्त मांगों को नहीं माना जाता तब तक संघर्ष जारी रहेगा। उन्होंने अपने संबोधन में केंद्रों में खाना मदर ग्रुप द्वारा ही बनाए जाने व मेहनताने में वृद्धि की मांग की ।
आंदोलन को किसान सभा अध्यक्ष महेंद्र सिंह व किसान नेता पाल सिंह रोहेड़ा सत्यवान, महिला जनवादी समिति की प्रधान शर्मिला पिल्खन, अध्यापक संघ के स्टेट के नेता अध्यापक जयप्रकाश, नदर महासभा से भाई राजेश टैला, जिला महासचिव दिलबाग सिंह पटवारी ने संबोधित किया।