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जिला अस्पताल में लगातर बढ़ रही मरीजों की संख्या, लेकिन डॉक्टर केवल 25, कैसे मिलेगी सुविधा

Sun, 26 May 2019 10:43 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sun, 26 May 2019 10:43 PM IST
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जिला अस्पताल में लगातर बढ़ रही मरीजों की संख्या, लेकिन डॉक्टर केवल 25, कैसे मिलेगी सुविधा
कैथल। जिला नागरिक अस्पताल में मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। लेकिन डॉक्टरों व नर्सिंग स्टाफ घटते जा रहे हैं। आलम यह है कि 200 बेड के जिला नागरिक अस्पताल में 60 में से केवल 25 डॉक्टर जैसे-तैसे हर रोज 2000 से अधिक मरीजों की ओपीडी, दाखिल मरीजों की देखभाल, गर्भवती महिलाओं का इलाज से लेकर ऑपरेशन तक के काम संभाले हुए हैं। इसके साथ ही नर्सों की कमी के कारण मरीजों को परेशानी हो रही है। अधिकारी अब यहां एक ओर अलग से वार्ड बनाने पर विचार कर रहे हैं, लेकिन कर्मचारियों में इस बात की चिंता है कि स्टॉफ से कैसे काम लिया जाएगा।
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200 बेड का है जिला अस्पताल : सरकार ने करीब तीन साल पहले जिला अस्पताल में 200 बेड की मंजूरी दी थी। इसके साथ ही स्टाफ सदस्यों की संख्या भी बढ़ गई थी। स्वीकृत स्टॉफ की संख्या तो बढ़ी, लेकिन नियुक्ति नहीं हो पा रही है। इस दौरान कई डॉक्टरों का यहां से तबादला भी हुआ है। साथ ही कई डॉक्टर काम छोड़कर भी चले गए हैं।
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एक-एक डॉक्टर पर तीन-तीन कार्यों की जिम्मेदारी : अस्पताल के एक डॉक्टर पर कम से कम तीन कार्यों की जिम्मेदारी है। मरीजों को देखने के अलावा डॉक्टरों को इमरजेंसी, पोस्टमार्टम ड्यूटी के अलावा शिविर व अन्य ड्यूटी भी करनी पड़ती हैं। एक बार इमरजेंसी से बुलावा आ गया तो ओपीडी में सैकड़ों की संख्या में मरीजों में हाहाकार मच जाता है।
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अस्पताल में रोजाना पहुंच रहे 2000 से 2200 के बीच मरीज : जिला अस्पताल में रोजाना 2000 से 2200 के बीच विभिन्न बीमारियों के मरीज पहुंच रहे हैं। स्टॉफ पूरा न होने के कारण मरीजों का इलाज दो से तीन दिन में चक्कर लगाने के बाद पूरा होता है।
नहीं हो रहा समय पर देखभाल : जिला अस्पताल में अमरगढ़ गामड़ी से आए छाती रोग मरीज कृष्ण ने बताया कि अस्पताल में दाखिल होने के लिए मरीजों को कई चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। पहले उसे रजिस्ट्रेशन के लिए लंबी लाइन में लगना पड़ा। फिर डॉक्टर से मिलने के लिए लाइन में लगा। फिर डॉक्टर ने टेस्ट लिख दिए तो सैंपल देने के लिए लाइन में लगा। उसने दोपहर को टेस्ट रिपोर्ट लेने को कहा। जब तक रिपोर्ट मिलती, तब तक डॉक्टर जा चुके थे। अगले दिन फिर से रजिस्ट्रेशन के लिए नई पर्ची बनवानी पड़ी। फिर डॉक्टर को रिपोर्ट दिखाने के लिए लाइन में लगा। फिर डॉक्टर ने दवा लिखी तो दवा की लाइन में लगा। इसमें भी पूरी दवा नहीं मिली। अब दाखिले होने के बाद भी समय पर देखभाल नहीं हो रहा है।

अस्पताल में स्टाफ के स्वीकृत व खाली पद:-
पद का नाम स्वीकृत पद खाली पद
सीनियर मेडिकल ऑफिसर 05 01
मेडिकल ऑफिसर 55 34
क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट 01 01
नर्सिंग सिस्टर 10 02
स्टाफ नर्स 90 45
फार्मासिस्ट 10 02
लैब टेकिभनशियन 14 08
रेडियोग्राफर 06 06
ओपरेशन थियेटर असिस्टेंट 10 05
विभाग को हर माह में भेज रहे रिपोर्ट: सिविल सर्जन डॉ. सुरेंद्र नैन ने कहा कि अस्पताल में डॉक्टरों व स्टाफ की कमी के बारे में हर माह विभाग को रिपोर्ट भेजी जा रही है। अस्पताल प्रशासन जल्द से जल्द डॉक्टरों व स्टाफ को पूरा करवाने की दिशा में प्रयास कर रहा है।
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