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Kaithal News: सुरक्षा मानकों पर खरी नहीं उतरीं 154 बसें

Sun, 22 Dec 2024 12:45 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल Updated Sun, 22 Dec 2024 12:45 AM IST
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154 buses did not meet safety standards
संवाद न्यूज एजेंसी
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कैथल। जिलेभर में हाल ही में निजी स्कूल बसों की जांच को लेकर चलाए गए विशेष अभियान के तहत हुई जांच 657 में 154 बसें सुरक्षा मानकों पर खरी नहीं उतर पाई हैं। जिम्मेदारों का कहना है कि एक सप्ताह में बसों क खामियां दूर नहीं करवाई तो होंगे चालान किए जाएंगे।

जिले में आरटीए व शिक्षा विभाग की संयुक्त टीमों ने पिछले सप्ताह ही खंड अनुसार 657 बसों की जांच की थी। इनमें से अधिकतर बसों में सीसीटीवी कैमरों का बैकअप नहीं मिला। 70 से अधिक बसों में कार्यरत महिला कंडक्टर के पास लाइसेंस नहीं मिले।
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गौरतलब है कि जांच के लिए चलाए गए अभियान के तहत जिलेभर के स्कूल की बसों को संबंधित अधिकारियों व कर्मचारियों की कमेटी ने निर्धारित जगह बुलाकर चेक किया। अभियान में पूरे जिले की लगभग 657 बसों की जांच की। इनमें से लगभग 154 के आसपास बसों में खामियां मिली। अधिकतर बसों में महिला परिचालक के पास लाइसेंस नहीं था।
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वहीं, बसों में स्पीड गवर्नर लगे हुए मिले, लेकिन अधिकतर बसों में यह चालू नहीं पाए गए। अधिकतर बसों में सीसीटीवी कैमरों का बैकअप तक नहीं मिल पाया था। फर्स्ट बॉक्स से लेकर, स्टीकर, शीशों सहित व बसों में लगे जीपीएस सिस्टम ठीक ढंग से काम नहीं कर रहे थे। टीम को जांच के दौरान काफी खामियां मिली है।

शिक्षा विभाग और आरटीए की संयुक्त टीम ने गत नौ दिसंबर को यह अभियान डीसी के आदेश पर शुरू किया था, ताकि धुंध के समय से पहले बसों की फिटनेस को जांचा जाए। अगर बसों में फिटनेस होगी तो हादसे कम होने का खतरा रहेगा। बच्चों को भी सफर में किसी प्रकार की दिक्कत नहीं आएगी। यह आदेश डीसी ने जिला सड़क सुरक्षा की बैठक में अधिकारियों को दिए थे। जांच टीम में मोटर व्हीकल इंस्पेक्टर अनिल सैनी, मैकेनिक रोडवेज गुरजंट सिंह, एएसआई पुलिस विभाग, एजुकेशन डिपार्टमेंट से संबंधित, एसडीएम कार्यालय के कर्मियों को शामिल किया गया था।
ये किए गए हैं सुरक्षा मानक निर्धारित
सुरक्षित स्कूल वाहन पालिसी के तहत मानक निर्धारित किए गए हैं। इसके तहत स्कूल बस में लेडी अटेंडेंट का होना अनिवार्य है। वह और चालक दोनों वर्दी में होने चाहिए। गले में आई कार्ड होना चाहिए। चालक के पास पांच वर्ष पुराना ड्राइविंग लाइसेंस होना चाहिए। इसके साथ ही स्कूल बस के अंदर जीपीएस अनिवार्य है। स्पीड गवर्नर, सीसीटीवी कैमरा, फायर एग्जीक्यूशन, चालक की पुलिस वेरिफिकेशन, फस्र्ट एड बाक्स होना अनिवार्य है। आरटीए से अनुमति प्राप्त रूट मैप होना चाहिए। स्कूल बस का इंश्योरेंस, प्रदूषण, फिटनेस पूरी होनी चाहिए। कैमरा की रिकॉर्डिंग 15 दिन की बस के अंदर व तीन माह की स्कूल प्रशासन के पास होनी चाहिए। बस पर पीला रंग होना चाहिए। स्कूल का पीछे नंबर होना भी जरूरी है।



चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर जरूरी

प्रत्येक स्कूल बसों में चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर 1098 प्रदर्शित किया गया हो, सभी स्कूल बसों में सीसीटीवी कैमरे इंस्टॉल होने चाहिए।

डीसी के आदेश पर 657 बसों की जांच की गई है। लगभग 154 खामियां मिलने वाली बसों को नोटिस दिया गया है। एक सप्ताह में इन बसों की खामियों को दूर करने के स्कूल संचालकों को निर्देश दिए है। अगर फिर भी खामियां दूर नहीं हुई तो बसों के चालान किए जाएंगे। जिसके जिम्मेदार स्कूल संचालक रहेंगे।

-अनिल सैनी, मोटर व्हीकल इंस्पेक्टर, आरटीए, कैथल
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