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बढ़ोतरी के बावजूद किसानों को नहीं मिल रहा धान का बढ़ा हुआ मूल्य
Updated Sat, 20 Oct 2018 11:51 PM IST
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किसानों को नहीं मिल रहा धान का बढ़ा हुआ मूल्य
सरकार किसानों के साथ हमेशा सौतेला व्यवहार
अमर उजाला ब्यूरो
राजौंद। अखिल भारतीय किसान सभा के ब्लॉक प्रधान सरदार बलविंद्र सिंह मंडवाल ने कहा कि सरकार किसानों के साथ हमेशा सौतेला व्यवहार करती आई है। उन्होंने बताया कि सरकार कहने को तो 200 रुपये प्रति क्विंटल धान की कीमत में बढ़ोतरी की है। लेकिन मंडियों में धान 1600 से 1650 तक ही खरीदा जा रहा है। किसान हर तरफ से पिस रहा है।
ब्लॉक प्रधान ने कहा कि उनके खेत में पिछले वर्ष धान की फसल खराब हुई थी जिसका मुआवजा उसे आज तक भी नहीं मिला। इसी तरह जो फसलें इस बारिश में खराब हुई हैं, उनकी फसल की गिरदावरी तक नहीं की गई। सरकार वैसे तो फसल बीमा योजना के लिए किसानों के खातों से हर फसल पर बीमा राशि की किस्त कट रही है। लेकिन बीमा राशि देने में किसानों को नजरअंदाज किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि वोट मांगते समय किसी भी पार्टी का नेता हाथ जोड़ जोड़कर वोट के लिए किसानों के साथ कई तरह के वादे करते हैं। लेकिन सरकार बनने के बाद वही राजनेता किसानों की सुध लेना उचित नहीं समझते। उन्होंने कहा कि किसान बीज, खाद, दवाई व बिजली के बिल व अन्य खर्चों के साथ लागत का मूल्य भी उसे नहीं मिल पाता। उन्होंने कहा कि सरकार को स्वामीनाथन रिपोर्ट लागू करनी चाहिए और जिन किसानों की फसल खराब हुई है उनको मुआवजा की राशि देनी चाहिए। जिन किसानों के बीमा है उन किसानों को भी बीमा राशि देनी चाहिए।
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सरकार किसानों के साथ हमेशा सौतेला व्यवहार
अमर उजाला ब्यूरो
राजौंद। अखिल भारतीय किसान सभा के ब्लॉक प्रधान सरदार बलविंद्र सिंह मंडवाल ने कहा कि सरकार किसानों के साथ हमेशा सौतेला व्यवहार करती आई है। उन्होंने बताया कि सरकार कहने को तो 200 रुपये प्रति क्विंटल धान की कीमत में बढ़ोतरी की है। लेकिन मंडियों में धान 1600 से 1650 तक ही खरीदा जा रहा है। किसान हर तरफ से पिस रहा है।
ब्लॉक प्रधान ने कहा कि उनके खेत में पिछले वर्ष धान की फसल खराब हुई थी जिसका मुआवजा उसे आज तक भी नहीं मिला। इसी तरह जो फसलें इस बारिश में खराब हुई हैं, उनकी फसल की गिरदावरी तक नहीं की गई। सरकार वैसे तो फसल बीमा योजना के लिए किसानों के खातों से हर फसल पर बीमा राशि की किस्त कट रही है। लेकिन बीमा राशि देने में किसानों को नजरअंदाज किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि वोट मांगते समय किसी भी पार्टी का नेता हाथ जोड़ जोड़कर वोट के लिए किसानों के साथ कई तरह के वादे करते हैं। लेकिन सरकार बनने के बाद वही राजनेता किसानों की सुध लेना उचित नहीं समझते। उन्होंने कहा कि किसान बीज, खाद, दवाई व बिजली के बिल व अन्य खर्चों के साथ लागत का मूल्य भी उसे नहीं मिल पाता। उन्होंने कहा कि सरकार को स्वामीनाथन रिपोर्ट लागू करनी चाहिए और जिन किसानों की फसल खराब हुई है उनको मुआवजा की राशि देनी चाहिए। जिन किसानों के बीमा है उन किसानों को भी बीमा राशि देनी चाहिए।
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