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कर्फ्यू तो दूर धारा 144 लागू करवाने में असफल रहा जिला प्रशासन
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 03 Jun 2016 12:00 AM IST
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जाट
- फोटो : ब्यूरो
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अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। हरियाणा में दंगों के दौरान अधिकारियों की भूमिका को लेकर गठित प्रकाश सिंह आयोग में दर्ज करवाए ब्यानों में लोगों का दर्द साफ झलकता दिख रहा है। लोगों ने प्रशासन की करतूतों की जमकर पोल खोली।
जिला प्रशासन उपद्रव के समय कर्फ्यू तो बहुत दूर की बात धारा 144 भी लागू नहीं करवा पाया था। सेना की मौजूदगी में कर्फ्यू का उल्लंघन करने सहित उपद्रव, लूटपाट, आगजनी होने को शर्मनाक बताया गया है।
प्रकाश सिंह जांच आयोग की रिपोर्ट में कहा गया है कि जिला प्रधान उपद्रव के दौरान धारा 144 भी लागू नहीं करवा पाया। लोगों ने कहा कि 20 व 21 फरवरी के दिन पुलिस व सेना की सुरक्षा घेरेबंदी के बावजूद उपद्रव व हिंसा हुई। लेकिन कार्रवाई नहीं हुई।
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गांवों से आ रहे उपद्रवियों को नहीं रोका:-
आयोग के समक्ष दिए ब्यान में लोगों ने कहा कि पुलिस ने गांवों से शहर में एकत्रित हो रहे उपद्रवियों को नहीं रोका। इसी का नतीजा है कि तमाम सुरक्षा व्यवस्था के बीच आगजनी होती रही। उपद्रवी शहर में एकत्रित होते रहे। भीड़ बढ़ती गई। प्रशासन शुरू से ही उपद्रवियों के खिलाफ कार्रवाई करने में असफल रहा।
जातीय वर्ग में बंट गए थे पुलिस एवं अधिकारी:-
आयोग को दिए ब्यानों में लोगों ने कहा कि आरक्षण आंदोलन के दौरान पुलिस व सिविल प्रशासन के अधिकारी जातीय आधारित वर्गों में बंट गए थे। जिस कारण प्रभावशाली कदम नहीं उठाया गया।
भारी सुरक्षा बल के बावजूद उपद्रव:-
आयोग की रिपोर्ट में कहा गया है कि जिले में 19 से 21 फरवरी तक भारी सुरक्षा बल मौजूद था। 19 फरवरी को 1546, 20 फरवरी को 1434 और 21 फरवरी को 1349 पुलिस एवं सेना के जवान मौजूद थे। इसके बावजूद कैथल जैसे छोटे जिले में उपद्रव नहीं रोका जा सका।
21 फरवरी को आई डीसी को शांति कमेटी की याद:-
रिपोर्ट में बताया गया है कि डीसी ने अपने ब्यान में 21 फरवरी को शांति कमेटी की मीटिंग ली। जबकि उपद्रव 19, 20 व 21 फरवरी को हो चुका था। ऐसे में यह मीटिंग पहले भी हो सकती थी।
जांच रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि डीसी ने उपद्रव से निपटने के लिए जिला परिषद सहित जनप्रतिनिधियों के साथ कोई मीटिंग नहीं ली।
अफवाहों पर रोक नहीं लगा पाया प्रशासन:-
आयोग से मिलने वाले लोगों ने यह भी कहा कि जिला प्रशासन उपद्रव के समय अफवाहों पर रोक लगाने में असफल रहा। जिस कारण उपद्रव बढ़ता गया।
पार्टी करते रहे अधिकारी, शहर में होता रहा उपद्रव:-
आयोग में दर्ज करवाए अपने ब्यान में एक ग्रुप ने तो यहां तक कहा कि जिला प्रशासन के अधिकारी जिमखाना क्लब में पार्टी करते रहे और शहर में लूटपाट, आगजनी व तोड़फोड़ होती रही।
21 फरवरी तक हुई घटनाएं, केस दर्ज होते रहे 12 मार्च तक:-
जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि पूरे प्रदेश में 7 से 21 मार्च तक वारदातें हुईं। लेकिन कैथल में 12 मार्च तक केस दर्ज किए गए। जबकि ये समय पर दर्ज होने चाहिए थे।
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कैथल। हरियाणा में दंगों के दौरान अधिकारियों की भूमिका को लेकर गठित प्रकाश सिंह आयोग में दर्ज करवाए ब्यानों में लोगों का दर्द साफ झलकता दिख रहा है। लोगों ने प्रशासन की करतूतों की जमकर पोल खोली।
जिला प्रशासन उपद्रव के समय कर्फ्यू तो बहुत दूर की बात धारा 144 भी लागू नहीं करवा पाया था। सेना की मौजूदगी में कर्फ्यू का उल्लंघन करने सहित उपद्रव, लूटपाट, आगजनी होने को शर्मनाक बताया गया है।
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प्रकाश सिंह जांच आयोग की रिपोर्ट में कहा गया है कि जिला प्रधान उपद्रव के दौरान धारा 144 भी लागू नहीं करवा पाया। लोगों ने कहा कि 20 व 21 फरवरी के दिन पुलिस व सेना की सुरक्षा घेरेबंदी के बावजूद उपद्रव व हिंसा हुई। लेकिन कार्रवाई नहीं हुई।
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गांवों से आ रहे उपद्रवियों को नहीं रोका:-
आयोग के समक्ष दिए ब्यान में लोगों ने कहा कि पुलिस ने गांवों से शहर में एकत्रित हो रहे उपद्रवियों को नहीं रोका। इसी का नतीजा है कि तमाम सुरक्षा व्यवस्था के बीच आगजनी होती रही। उपद्रवी शहर में एकत्रित होते रहे। भीड़ बढ़ती गई। प्रशासन शुरू से ही उपद्रवियों के खिलाफ कार्रवाई करने में असफल रहा।
जातीय वर्ग में बंट गए थे पुलिस एवं अधिकारी:-
आयोग को दिए ब्यानों में लोगों ने कहा कि आरक्षण आंदोलन के दौरान पुलिस व सिविल प्रशासन के अधिकारी जातीय आधारित वर्गों में बंट गए थे। जिस कारण प्रभावशाली कदम नहीं उठाया गया।
भारी सुरक्षा बल के बावजूद उपद्रव:-
आयोग की रिपोर्ट में कहा गया है कि जिले में 19 से 21 फरवरी तक भारी सुरक्षा बल मौजूद था। 19 फरवरी को 1546, 20 फरवरी को 1434 और 21 फरवरी को 1349 पुलिस एवं सेना के जवान मौजूद थे। इसके बावजूद कैथल जैसे छोटे जिले में उपद्रव नहीं रोका जा सका।
21 फरवरी को आई डीसी को शांति कमेटी की याद:-
रिपोर्ट में बताया गया है कि डीसी ने अपने ब्यान में 21 फरवरी को शांति कमेटी की मीटिंग ली। जबकि उपद्रव 19, 20 व 21 फरवरी को हो चुका था। ऐसे में यह मीटिंग पहले भी हो सकती थी।
जांच रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि डीसी ने उपद्रव से निपटने के लिए जिला परिषद सहित जनप्रतिनिधियों के साथ कोई मीटिंग नहीं ली।
अफवाहों पर रोक नहीं लगा पाया प्रशासन:-
आयोग से मिलने वाले लोगों ने यह भी कहा कि जिला प्रशासन उपद्रव के समय अफवाहों पर रोक लगाने में असफल रहा। जिस कारण उपद्रव बढ़ता गया।
पार्टी करते रहे अधिकारी, शहर में होता रहा उपद्रव:-
आयोग में दर्ज करवाए अपने ब्यान में एक ग्रुप ने तो यहां तक कहा कि जिला प्रशासन के अधिकारी जिमखाना क्लब में पार्टी करते रहे और शहर में लूटपाट, आगजनी व तोड़फोड़ होती रही।
21 फरवरी तक हुई घटनाएं, केस दर्ज होते रहे 12 मार्च तक:-
जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि पूरे प्रदेश में 7 से 21 मार्च तक वारदातें हुईं। लेकिन कैथल में 12 मार्च तक केस दर्ज किए गए। जबकि ये समय पर दर्ज होने चाहिए थे।