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नियमों की धज्जियां उड़ाकर सिटी स्कवॉयर सेंटर निर्माण एजेंसी को कर दी गई 7 करोड़ से अधिक की राशि जारी
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पार्षदों ने 18 सवाल का जवाब नहीं दे पाए अधिकारी, महज इतना कहा- एजेंसी के बिल से काट ली गई है अवैध रूप से जारी 1.88 करोड़ की राशि
परिषद की आपात बैठक में साबित हुआ सिटी स्क्वायर सेंटर निर्माण में करोड़ों रुपये का घोटाला, पार्षदों के सवाल पर ईओ, एमई, अकाउंटेट, ऑडिटर ने स्वीकार की गलतियां
- सिटी स्क्वायर का तुरंत प्रभाव से काम बंद करने, दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए डायरेक्टर को प्रस्ताव भेजने व जिन लोगों ने नियमों के खिलाफ भुगतान किया, उनके खिलाफ पुलिस में केस दर्ज करने का प्रस्ताव पारित
अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। मुख्यमंत्री की घोषणा के तहत हो रहे सिटी स्क्वायर के निर्माण कार्य में नियमों की जमकर धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। प्रोजेक्ट रिपोर्ट को पढ़े बिना ही अधिकारी भ्रष्टाचार (जैसा कि पार्षदों ने आरोप लगाया) के तहत करोड़ों रुपये की राशि जारी कर रहे हैं। जिसका उनके पास कोई जवाब नहीं हैं। शुक्रवार को परिषद कार्यालय में आयोजित नगर परिषद की आपातकालीन बैठक में पार्षदों द्वारा सिटी स्क्वायर सेंटर पर उठाए गए सवाल सही साबित हुए और लगभग 7 करोड़ रुपये की राशि का अवैध तरीके से भुगतान किया गया।
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अधिकारी ठेकेदार फर्म पर इतना मेहरबान दिखे कि उन्होंने अपनी नौकरी तक की परवाह नहीं की और प्रोजेक्ट की डीएनआईटी में ही हरियाणा सरकार की अनुमति के बिना परिवर्तन तक कर डाला। चार घंटे तक चली बैठक में पार्षद राकेश सरदाना ने एक-एक सवाल उठाया। अधिकारियों के पास जिनमें से किसी एक का भी उत्तर नहीं था। बैठक में अंतत: तुरंत प्रभाव से सिटी स्क्वायर प्रोजेक्ट का काम बंद करने, मामले में आपराधिक मामला दर्ज करने, ठेकेदार पर मेहरबान अधिकारियों, कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई करने, बार-बार बुलाए जाने पर भी जेई के बैठक में न आने पर निंदा प्रस्ताव पारित करने जैसे प्रस्ताव पारित हुए। 4 घंटे तक चली बैठक में नियमों की उड़ाई गई धज्जियों पर अधिकारी हामी भरते रहे और बैठक आगे बढ़ती गई।
कुछ यूं रहा सवालों व जवाब का सिलसिला-सारे सवाल राकेश सरदाना ने पूछे। उत्तर ईओ अशोक कुमार, एमई राजकुमार, अकाउंट ऑफिसर नरेंद्र कुमार, ऑडिटर द्वारा दिए गए।
1. कैथल में एमई के रहते हुए इस प्रोजेक्ट के लिए एडिशनल एमई क्यों लाया गया? क्या अधिकारी किसी प्रोजेक्ट की डीएनआईटी बदल सकते हैं?
उत्तर : एमई को लाए जाने पर कोई उत्तर नहीं, डीएनआईटी सरकार की अनुमति के बिना नहीं बदल सकते। लेकिन यहां डीएनआईटी बदली गई। जो गलती हुई।
2. प्रोजैक्ट रिपोर्ट के अनुसार पाइल्स (सीमेंट के आधार स्तंभ, जो 6 फुट तक जमीन के अंदर जाने थे) में से 6 की टेस्टिंग जो कुल पाइल्स का 1.5 प्रतिशत होना था, उसे बढ़ाकर 12 प्रतिशत यानी 52 की टेस्टिंग के लिए किए गया 1.30 करोड़ का भुगतान सही था?
उत्तर : ईओ सहित अन्य अधिकारियों ने सरेआम स्वीकार किया कि यह 6 पाइल्स की ही टेस्टिंग होनी थी। जिसके लिए खर्च भी एजेंसी द्वारा उठाया जाना था। लेकिन कर दी गई 52 की और 1.30 करोड़ परिषद की ओर से जारी कर दिया गया। जो गलत किया गया। इस पर पार्षदों ने प्रस्ताव दिया कि ऐसे जेई को हटा दिया जाए, जो करोड़ों रुपये की राशि गलत जारी कर रहा है।
3. पार्षद राकेश सरदाना द्वारा इस भुगतान के लिए आरटीआई, सीएम विंडो, परिषद ईओ व प्रधान को भेजी गई शिकायत का जवाब क्यों नहीं दिया गया? जबकि उन्होंने आरटीआई के तहत 3480 रुपये की राशि भी जमा करवा दी थी।
उत्तर : ईओ टालमटोल करने लगे तो उनके खिलाफ कार्रवाई मिनट्स में बात लिखने को कहा गया और पार्षदों ने कहा कि लिखा जाए कि ईओ आरटीआई, सीएम विंडो जैसी बातों को गंभीरता से नहीं लेते। पार्षदों की बातों को मजाक बनाकर रखा हुआ है।
4. क्या वर्क ऑर्डर 8 अक्तूबर को जारी हुआ, इसके महज 12 दिन में यानी कि 22 अक्टूबर को केवल 96 वर्किंग घंटों में अधिकारी पाइल्स बन भी गई, टेस्ट भी हो गई और इसके लिए भुगतान कर सकते हैं। जबकि यह कम से कम 28 दिन बाद भुगतान होना चाहिए था?
उत्तर : यह भुगतान गलत किया गया। इसके लिए एजेंसी के बिल से 1.88 करोड़ रुपये की राशि रिकवर कर ली गई है। ऑब्जेकेशन के बावजूद अगला भुगतान क्यों किया गया और पेमेंट जारी ही क्यों की गई? इस बात पर कोई जवाब नहीं आया।
5. ईओ ने क्यों ऑब्जेकशन के बाद भी भुगतान किया? आज करीब 12 करोड़ से अधिक का भुगतान हो चुका है?
उत्तर-उत्तर में जब ईओ ने कहा कि उन्हें पता नहीं था तो पार्षद राकेश सरदाना ने उन्हें घेर लिया और कहा कि 26-11 को आपने ज्वाइन किया था। उसी दिन रिमाइंडर दिया गया। जिस पर आपके हस्ताक्षर हैं। आप सदन को गुमराह कर रहे हैं। झूठ बोल रहे हैं। इसके बाद ईओ का कोई जवाब नहीं था।
6. क्या जब ठेकेदार को बिल का भुगतान किया गया? उस समय रंगीन फोटो देखी गई थी?
उत्तर- अकाउंट ऑफिसर कोई जवाब नहीं दे पाए।
7. क्या 5.79 करोड़ रुपये का सिक्योर एडवांस जब भुगतान किया गया? उसकी एवज में बैंक गारंटी ली गई थी और यह भुगतान किस प्रकार के मटेरियल के लिए दिया गया?
उत्तर : अधिकारियों ने जवाब दिया कि यह भुगतान स्टील के लिए किया गया था। जो कुल स्टील का 75 प्रतिशत था। इस पर पार्षद ने कहा कि पूरे प्रोजेक्ट में 4.99 करोड़ का स्टील प्रयोग होना है तो आपने 5.79 करोड़ गलत भुगतान किया। इस पर अधिकारियों ने गलती मानीं और स्पष्ट हो गया कि प्रोजेक्ट रिपोर्ट के अनुसार यह भुगतान नहीं किया गया। इसके लिए कोई बैंक गारंटी भी नहीं ली गई।
8. वर्कर्स की रजिस्ट्रेशन है, जिसे साइट पर डिस्प्ले किया जाना था?
उत्तर- नहीं
9. क्या टाइम शेड्यूल है? कब कब काम किया जा सकता है?
उतर-नहीं
10. क्या कोई प्रोग्रेस रिपोर्ट बनाई गई?
उत्तर-नहीं
11. क्या मंथली मीटिंग में रिव्यू होता है?
उतर-मंथली मीटिंग ही नहीं होती।
12. कितने प्रकार की सिक्योरिटी ली गई है
उत्तर-3 प्रकार की।
13. आरए बिल हैं या नहीं?
उत्तर-नहीं
14. मिट्टी खोदने व ढोने का भुगतान किया गया। यह मिट्टी कहां गई और कितने का भुगतान हुआ। क्या ऐसा कर सकते थे?
उत्तर- कोई जवाब नहीं।
ये पारित हुए प्रस्ताव :
- पूरे मामले की जांच के लिए आपराधिक मामला दर्ज करवाया जाए।
- ठेकेदार पर मेहरबान अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए डायरेक्टर को लिखा जाए।
- सिटी स्क्वायर का काम तुरंत प्रभाव से बंद किया जाए। जो सामान मौके पर है। उसे जब्त किया जाए। 20 दिन में कार्रवाई नहीं हुई तो पार्षद धरने पर बैठेंगे।
- जो जेई बैठक में नहीं आया? तत्कालीन अधिकारी जो एमई थे, ईओ थे? उनके खिलाफ निंदा प्रस्ताव पारित किया गया। जेई को कारण बताओ नोटिस जारी किया जाएगा।
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परिषद की आपात बैठक में साबित हुआ सिटी स्क्वायर सेंटर निर्माण में करोड़ों रुपये का घोटाला, पार्षदों के सवाल पर ईओ, एमई, अकाउंटेट, ऑडिटर ने स्वीकार की गलतियां
- सिटी स्क्वायर का तुरंत प्रभाव से काम बंद करने, दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए डायरेक्टर को प्रस्ताव भेजने व जिन लोगों ने नियमों के खिलाफ भुगतान किया, उनके खिलाफ पुलिस में केस दर्ज करने का प्रस्ताव पारित
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अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। मुख्यमंत्री की घोषणा के तहत हो रहे सिटी स्क्वायर के निर्माण कार्य में नियमों की जमकर धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। प्रोजेक्ट रिपोर्ट को पढ़े बिना ही अधिकारी भ्रष्टाचार (जैसा कि पार्षदों ने आरोप लगाया) के तहत करोड़ों रुपये की राशि जारी कर रहे हैं। जिसका उनके पास कोई जवाब नहीं हैं। शुक्रवार को परिषद कार्यालय में आयोजित नगर परिषद की आपातकालीन बैठक में पार्षदों द्वारा सिटी स्क्वायर सेंटर पर उठाए गए सवाल सही साबित हुए और लगभग 7 करोड़ रुपये की राशि का अवैध तरीके से भुगतान किया गया।
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अधिकारी ठेकेदार फर्म पर इतना मेहरबान दिखे कि उन्होंने अपनी नौकरी तक की परवाह नहीं की और प्रोजेक्ट की डीएनआईटी में ही हरियाणा सरकार की अनुमति के बिना परिवर्तन तक कर डाला। चार घंटे तक चली बैठक में पार्षद राकेश सरदाना ने एक-एक सवाल उठाया। अधिकारियों के पास जिनमें से किसी एक का भी उत्तर नहीं था। बैठक में अंतत: तुरंत प्रभाव से सिटी स्क्वायर प्रोजेक्ट का काम बंद करने, मामले में आपराधिक मामला दर्ज करने, ठेकेदार पर मेहरबान अधिकारियों, कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई करने, बार-बार बुलाए जाने पर भी जेई के बैठक में न आने पर निंदा प्रस्ताव पारित करने जैसे प्रस्ताव पारित हुए। 4 घंटे तक चली बैठक में नियमों की उड़ाई गई धज्जियों पर अधिकारी हामी भरते रहे और बैठक आगे बढ़ती गई।
कुछ यूं रहा सवालों व जवाब का सिलसिला-सारे सवाल राकेश सरदाना ने पूछे। उत्तर ईओ अशोक कुमार, एमई राजकुमार, अकाउंट ऑफिसर नरेंद्र कुमार, ऑडिटर द्वारा दिए गए।
1. कैथल में एमई के रहते हुए इस प्रोजेक्ट के लिए एडिशनल एमई क्यों लाया गया? क्या अधिकारी किसी प्रोजेक्ट की डीएनआईटी बदल सकते हैं?
उत्तर : एमई को लाए जाने पर कोई उत्तर नहीं, डीएनआईटी सरकार की अनुमति के बिना नहीं बदल सकते। लेकिन यहां डीएनआईटी बदली गई। जो गलती हुई।
2. प्रोजैक्ट रिपोर्ट के अनुसार पाइल्स (सीमेंट के आधार स्तंभ, जो 6 फुट तक जमीन के अंदर जाने थे) में से 6 की टेस्टिंग जो कुल पाइल्स का 1.5 प्रतिशत होना था, उसे बढ़ाकर 12 प्रतिशत यानी 52 की टेस्टिंग के लिए किए गया 1.30 करोड़ का भुगतान सही था?
उत्तर : ईओ सहित अन्य अधिकारियों ने सरेआम स्वीकार किया कि यह 6 पाइल्स की ही टेस्टिंग होनी थी। जिसके लिए खर्च भी एजेंसी द्वारा उठाया जाना था। लेकिन कर दी गई 52 की और 1.30 करोड़ परिषद की ओर से जारी कर दिया गया। जो गलत किया गया। इस पर पार्षदों ने प्रस्ताव दिया कि ऐसे जेई को हटा दिया जाए, जो करोड़ों रुपये की राशि गलत जारी कर रहा है।
3. पार्षद राकेश सरदाना द्वारा इस भुगतान के लिए आरटीआई, सीएम विंडो, परिषद ईओ व प्रधान को भेजी गई शिकायत का जवाब क्यों नहीं दिया गया? जबकि उन्होंने आरटीआई के तहत 3480 रुपये की राशि भी जमा करवा दी थी।
उत्तर : ईओ टालमटोल करने लगे तो उनके खिलाफ कार्रवाई मिनट्स में बात लिखने को कहा गया और पार्षदों ने कहा कि लिखा जाए कि ईओ आरटीआई, सीएम विंडो जैसी बातों को गंभीरता से नहीं लेते। पार्षदों की बातों को मजाक बनाकर रखा हुआ है।
4. क्या वर्क ऑर्डर 8 अक्तूबर को जारी हुआ, इसके महज 12 दिन में यानी कि 22 अक्टूबर को केवल 96 वर्किंग घंटों में अधिकारी पाइल्स बन भी गई, टेस्ट भी हो गई और इसके लिए भुगतान कर सकते हैं। जबकि यह कम से कम 28 दिन बाद भुगतान होना चाहिए था?
उत्तर : यह भुगतान गलत किया गया। इसके लिए एजेंसी के बिल से 1.88 करोड़ रुपये की राशि रिकवर कर ली गई है। ऑब्जेकेशन के बावजूद अगला भुगतान क्यों किया गया और पेमेंट जारी ही क्यों की गई? इस बात पर कोई जवाब नहीं आया।
5. ईओ ने क्यों ऑब्जेकशन के बाद भी भुगतान किया? आज करीब 12 करोड़ से अधिक का भुगतान हो चुका है?
उत्तर-उत्तर में जब ईओ ने कहा कि उन्हें पता नहीं था तो पार्षद राकेश सरदाना ने उन्हें घेर लिया और कहा कि 26-11 को आपने ज्वाइन किया था। उसी दिन रिमाइंडर दिया गया। जिस पर आपके हस्ताक्षर हैं। आप सदन को गुमराह कर रहे हैं। झूठ बोल रहे हैं। इसके बाद ईओ का कोई जवाब नहीं था।
6. क्या जब ठेकेदार को बिल का भुगतान किया गया? उस समय रंगीन फोटो देखी गई थी?
उत्तर- अकाउंट ऑफिसर कोई जवाब नहीं दे पाए।
7. क्या 5.79 करोड़ रुपये का सिक्योर एडवांस जब भुगतान किया गया? उसकी एवज में बैंक गारंटी ली गई थी और यह भुगतान किस प्रकार के मटेरियल के लिए दिया गया?
उत्तर : अधिकारियों ने जवाब दिया कि यह भुगतान स्टील के लिए किया गया था। जो कुल स्टील का 75 प्रतिशत था। इस पर पार्षद ने कहा कि पूरे प्रोजेक्ट में 4.99 करोड़ का स्टील प्रयोग होना है तो आपने 5.79 करोड़ गलत भुगतान किया। इस पर अधिकारियों ने गलती मानीं और स्पष्ट हो गया कि प्रोजेक्ट रिपोर्ट के अनुसार यह भुगतान नहीं किया गया। इसके लिए कोई बैंक गारंटी भी नहीं ली गई।
8. वर्कर्स की रजिस्ट्रेशन है, जिसे साइट पर डिस्प्ले किया जाना था?
उत्तर- नहीं
9. क्या टाइम शेड्यूल है? कब कब काम किया जा सकता है?
उतर-नहीं
10. क्या कोई प्रोग्रेस रिपोर्ट बनाई गई?
उत्तर-नहीं
11. क्या मंथली मीटिंग में रिव्यू होता है?
उतर-मंथली मीटिंग ही नहीं होती।
12. कितने प्रकार की सिक्योरिटी ली गई है
उत्तर-3 प्रकार की।
13. आरए बिल हैं या नहीं?
उत्तर-नहीं
14. मिट्टी खोदने व ढोने का भुगतान किया गया। यह मिट्टी कहां गई और कितने का भुगतान हुआ। क्या ऐसा कर सकते थे?
उत्तर- कोई जवाब नहीं।
ये पारित हुए प्रस्ताव :
- पूरे मामले की जांच के लिए आपराधिक मामला दर्ज करवाया जाए।
- ठेकेदार पर मेहरबान अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए डायरेक्टर को लिखा जाए।
- सिटी स्क्वायर का काम तुरंत प्रभाव से बंद किया जाए। जो सामान मौके पर है। उसे जब्त किया जाए। 20 दिन में कार्रवाई नहीं हुई तो पार्षद धरने पर बैठेंगे।
- जो जेई बैठक में नहीं आया? तत्कालीन अधिकारी जो एमई थे, ईओ थे? उनके खिलाफ निंदा प्रस्ताव पारित किया गया। जेई को कारण बताओ नोटिस जारी किया जाएगा।