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व्हॉटस-एप्प ग्रुप में आया आईडिया तो बन गई बात
Updated Mon, 26 Jun 2017 11:59 PM IST
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व्हॉट्स-एप ग्रुप में आया आइडिया तो बन गई बात
बाइसाइकिल क्लब नेकी की दीवार स्थापित कर गरीब और जरूरतमंदों की कर रहे सेवा
कमल कुमार
कैथल। कैथल का साइकिल क्लब गरीबों के लिए एक संजीवनी बनकर उभरा है। करीब एक वर्ष पहले शहीद स्मारक के समीप बनाई गई नेकी की दीवार आज हर जरूरतमंद के लिए एक सौगात बनी है। यहां न कोई रोक है और न कोई टोक। यहां जो आए वो अपनी जरूरत के कपड़े ले जाए। अब तो यहां जरूरत की अन्य चीजें भी लोग दान में देने लगे हैं।
करीब एक वर्ष पहले कैथल साइकिल क्लब के सदस्य सुबह के समय सैर के दौरान पार्क में क्लब के एक सदस्य को वाट्सएप पर नेकी की दीवार पर टंगे हुए कपड़ों का संदेश आया। उस समय सदस्य ने क्लब के दूसरे साथियों को यह संदेश दिखाया तो सभी ने विचार किया की क्यों न हम भी अपने शहर में गरीबों की सेवा के लिए एक ऐसी ही दीवार को स्थापित करें। इसके बाद 14 अक्टूबर 2016 को सभी ने मिलकर नेकी की दीवार की स्थापना की।
कर्मचारी रखकर की गई है व्यवस्था
नेकी की दीवार के कारण यहां कपड़ो, जूतों, चप्पल व बर्तन सहित अन्य समान इतना आने लगा कि यहां पर व्यवस्था बनाने के लिए एक कर्मचारी को भी तैनात किया गया। जो सुबह 9 बजे से लेकर रात के 8 बजे तक ड्यूटी देता है। इसका काम केवल कपड़ों सहित अन्य समान को व्यवस्थित रूप में रखना है।
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कामयाब रही नेकी की दीवार
क्लब के सदस्य सचिन धमीजा ने बताया कि ईरान में सबसे ज्यादा नेकी की दीवार देखने को मिलती है। राजस्थान भीलवाड़ा में भी नेकी की दीवार है। हरियाणा में पहली बार सिरसा में नेकी की दीवार शुरू हुई। लेकिन कैथल में नेकी की दीवार के शुरू होने के बाद एक और नेकी की दीवार की स्थापना हुई। जहां हमेशा यहां से वस्तुएं लेने व देने वालों की भीड़ रहती है।
झुग्गी-झोपड़ियों व कुष्ठ आश्रम में भी देते हैं कपड़े
क्लब के सदस्य पवन पहलवान ने बताया कि अधिक कपड़े एकत्रित होने पर क्लब के सदस्य झुग्गी झोपड़ियों, कुष्ठ आश्रम सहित अन्य जगहों पर भी इन्हें वितरित करते हैं। 100 से भी कम जोड़ों से शुरू हुई नेकी की दीवार पर अब सैकड़ों कपड़े हैं।
इनका रहा है योगदान
नेकी की दीवार को शुरू करने में क्लब के सदस्य रमेश कुमार, रूप लाल शर्मा, सुरजीत सिंह, टेकचंद, पवन पहलवान, प्रयागाज, संजीव गुप्ता, नवीन मल्होत्रा, ओमप्रकाश सैन, शमशेर, तजिंद्र भाटिया, शमशेर कानूनगो, सचिन धमीजा, शीतल, राजेंद्र, विक्की, संजीव सेन आदि का योगदान रहा है।
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बाइसाइकिल क्लब नेकी की दीवार स्थापित कर गरीब और जरूरतमंदों की कर रहे सेवा
कमल कुमार
कैथल। कैथल का साइकिल क्लब गरीबों के लिए एक संजीवनी बनकर उभरा है। करीब एक वर्ष पहले शहीद स्मारक के समीप बनाई गई नेकी की दीवार आज हर जरूरतमंद के लिए एक सौगात बनी है। यहां न कोई रोक है और न कोई टोक। यहां जो आए वो अपनी जरूरत के कपड़े ले जाए। अब तो यहां जरूरत की अन्य चीजें भी लोग दान में देने लगे हैं।
करीब एक वर्ष पहले कैथल साइकिल क्लब के सदस्य सुबह के समय सैर के दौरान पार्क में क्लब के एक सदस्य को वाट्सएप पर नेकी की दीवार पर टंगे हुए कपड़ों का संदेश आया। उस समय सदस्य ने क्लब के दूसरे साथियों को यह संदेश दिखाया तो सभी ने विचार किया की क्यों न हम भी अपने शहर में गरीबों की सेवा के लिए एक ऐसी ही दीवार को स्थापित करें। इसके बाद 14 अक्टूबर 2016 को सभी ने मिलकर नेकी की दीवार की स्थापना की।
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कर्मचारी रखकर की गई है व्यवस्था
नेकी की दीवार के कारण यहां कपड़ो, जूतों, चप्पल व बर्तन सहित अन्य समान इतना आने लगा कि यहां पर व्यवस्था बनाने के लिए एक कर्मचारी को भी तैनात किया गया। जो सुबह 9 बजे से लेकर रात के 8 बजे तक ड्यूटी देता है। इसका काम केवल कपड़ों सहित अन्य समान को व्यवस्थित रूप में रखना है।
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कामयाब रही नेकी की दीवार
क्लब के सदस्य सचिन धमीजा ने बताया कि ईरान में सबसे ज्यादा नेकी की दीवार देखने को मिलती है। राजस्थान भीलवाड़ा में भी नेकी की दीवार है। हरियाणा में पहली बार सिरसा में नेकी की दीवार शुरू हुई। लेकिन कैथल में नेकी की दीवार के शुरू होने के बाद एक और नेकी की दीवार की स्थापना हुई। जहां हमेशा यहां से वस्तुएं लेने व देने वालों की भीड़ रहती है।
झुग्गी-झोपड़ियों व कुष्ठ आश्रम में भी देते हैं कपड़े
क्लब के सदस्य पवन पहलवान ने बताया कि अधिक कपड़े एकत्रित होने पर क्लब के सदस्य झुग्गी झोपड़ियों, कुष्ठ आश्रम सहित अन्य जगहों पर भी इन्हें वितरित करते हैं। 100 से भी कम जोड़ों से शुरू हुई नेकी की दीवार पर अब सैकड़ों कपड़े हैं।
इनका रहा है योगदान
नेकी की दीवार को शुरू करने में क्लब के सदस्य रमेश कुमार, रूप लाल शर्मा, सुरजीत सिंह, टेकचंद, पवन पहलवान, प्रयागाज, संजीव गुप्ता, नवीन मल्होत्रा, ओमप्रकाश सैन, शमशेर, तजिंद्र भाटिया, शमशेर कानूनगो, सचिन धमीजा, शीतल, राजेंद्र, विक्की, संजीव सेन आदि का योगदान रहा है।