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Kaithal News: पैर रखने तक की जगह नहीं फिर भी बसों में धक्का-मुक्की कर चढ़े यात्री
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बस में चढ़ते समय धक्का मुक्की करते हुए यात्री। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। रक्षाबंधन पर्व पर शुक्रवार को बस अड्डे पर लोगों की भारी भीड़ दिखाई दी। सुबह से ही यात्रियों की संख्या बढ़ती गई और दोपहर बाद बसों में पैर रखने तक की जगह नहीं बची लेकिन फिर बस आते ही उसमें सवार होने के लिए यात्रियों में होड़ मचती रही। यात्री मनोज, रणदीप व सुशील कुमार के अनुसार, सीटें भरने के बाद यात्रियों को खड़े होकर सफर करना पड़ा। सबसे ज्यादा दबाव जींद, कुरुक्षेत्र और करनाल रूट पर रहा, जहां दोपहर बाद यात्रियों को बसों के लिए इंतजार करना पड़ा।
रक्षाबंधन पर महिलाओं और 15 वर्ष तक के बच्चों के लिए नि:शुल्क बस यात्रा की सुविधा का भी यात्रियों ने लाभ उठाया। बड़ी संख्या में महिलाएं बच्चों के साथ मायके जाने के लिए निकलीं। नि:शुल्क यात्रा होने के कारण दूसरी ओर आधी से अधिक निजी बसें रूटों पर नहीं चलीं। इससे यात्रियों का दबाव मुख्य रूप से रोडवेज बसों पर आ गया। व्यवस्था बनाए रखने के लिए रोडवेज ने करीब 150 बसें संचालित कीं और भीड़ बढ़ने पर 20 अतिरिक्त बसें भी रूटों पर उतारीं। खचाखच भरी बसों में कई यात्रियों को बसों के दरवाजों पर लटक कर जाना पड़ा। कईं यात्रियों को कई घंटे तक बसों का इंतजार करना पड़ा।
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बस आते ही चढ़ने के लिए मची होड़
दोपहर बाद बस अड्डे पर हालात यह रहे कि किसी रूट की बस पहुंचते ही उसके आसपास यात्रियों की भीड़ जमा हो जाती। बस रुकने के साथ ही सीट पाने के लिए यात्री तेजी से आगे बढ़ते नजर आए। उतरने वाले यात्रियों और चढ़ने वालों की भीड़ के कारण कई बार बस के गेट पर अव्यवस्था जैसी स्थिति बन गई। महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों को भीड़ के बीच बस में चढ़ने में परेशानी हुई। सामान लेकर यात्रा कर रहे यात्रियों को भी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। कुछ बसों में गेट के आसपास तक यात्री खड़े दिखाई दिए। लंबी दूरी के यात्रियों के लिए यह सफर और मुश्किल रहा।
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चालक-परिचालकों की छुट्टियां रद्द
रोडवेज विभाग के अनुसार, त्योहार पर यात्रियों की भीड़ को देखते हुए विभाग ने चालक और परिचालकों की छुट्टियां पहले ही रद्द कर दी थीं। बस अड्डे पर बस अड्डा इंचार्ज के अलावा सीआई, डीआई, इंस्पेक्टर और सब इंस्पेक्टर की ड्यूटी लगाई गई। अधिकारियों ने बसों की आवाजाही और यात्रियों की स्थिति पर नजर रखी। जिस रूट पर अधिक भीड़ दिखाई दी, वहां उपलब्ध बसों को भेजकर यात्रियों को निकालने का प्रयास किया गया।
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भाई को राखी बांधने जाना था, बस नहीं मिल रही
भगत सिंह कॉलोनी निवासी सुनीता ने बताया कि उसने अपने भाई के घर संडील राखी बांधने जाना था। उसे जींद रूट पर बस में सवार होकर किठाना गांव जाना था। निजी बस का समय है। एक घंटे से बस का इंतजार करना पड़ रहा है। अब सरकारी बस आने वाली है, उसी में सवार होकर जाना पड़ेगा।
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सरकार को अन्य बसों का प्रबंध करना चाहिए
कुरुक्षेत्र रूट पर 10 मिनट से बस नहीं आई है। वह अपने भाई के राखी बांधने के लिए बारना गांव जा रही थी। बस का इंतजार कर रही है। डिपो में भी बसें कम है। वह यात्रियों को छोड़ने के लिए गई हुई है। रक्षाबंधन पर सरकार को रोडवेज के साथ अन्य बसों का प्रबंध करना चाहिए।
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रक्षाबंधन पर विभाग ने पहले से तैयारी की थी। वर्कशॉप में सभी बसों की मरम्मत करवा दी थी। 150 बसें रूटों पर संचालित की गईं। यात्रियों की संख्या बढ़ने पर 20 अतिरिक्त बसें भी चलाई गईं। प्रमुख मार्गों पर मांग के अनुसार बसें भेजी गईं। - विपुल कुमार, टीएम कैथल
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कैथल। रक्षाबंधन पर्व पर शुक्रवार को बस अड्डे पर लोगों की भारी भीड़ दिखाई दी। सुबह से ही यात्रियों की संख्या बढ़ती गई और दोपहर बाद बसों में पैर रखने तक की जगह नहीं बची लेकिन फिर बस आते ही उसमें सवार होने के लिए यात्रियों में होड़ मचती रही। यात्री मनोज, रणदीप व सुशील कुमार के अनुसार, सीटें भरने के बाद यात्रियों को खड़े होकर सफर करना पड़ा। सबसे ज्यादा दबाव जींद, कुरुक्षेत्र और करनाल रूट पर रहा, जहां दोपहर बाद यात्रियों को बसों के लिए इंतजार करना पड़ा।
रक्षाबंधन पर महिलाओं और 15 वर्ष तक के बच्चों के लिए नि:शुल्क बस यात्रा की सुविधा का भी यात्रियों ने लाभ उठाया। बड़ी संख्या में महिलाएं बच्चों के साथ मायके जाने के लिए निकलीं। नि:शुल्क यात्रा होने के कारण दूसरी ओर आधी से अधिक निजी बसें रूटों पर नहीं चलीं। इससे यात्रियों का दबाव मुख्य रूप से रोडवेज बसों पर आ गया। व्यवस्था बनाए रखने के लिए रोडवेज ने करीब 150 बसें संचालित कीं और भीड़ बढ़ने पर 20 अतिरिक्त बसें भी रूटों पर उतारीं। खचाखच भरी बसों में कई यात्रियों को बसों के दरवाजों पर लटक कर जाना पड़ा। कईं यात्रियों को कई घंटे तक बसों का इंतजार करना पड़ा।
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बस आते ही चढ़ने के लिए मची होड़
दोपहर बाद बस अड्डे पर हालात यह रहे कि किसी रूट की बस पहुंचते ही उसके आसपास यात्रियों की भीड़ जमा हो जाती। बस रुकने के साथ ही सीट पाने के लिए यात्री तेजी से आगे बढ़ते नजर आए। उतरने वाले यात्रियों और चढ़ने वालों की भीड़ के कारण कई बार बस के गेट पर अव्यवस्था जैसी स्थिति बन गई। महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों को भीड़ के बीच बस में चढ़ने में परेशानी हुई। सामान लेकर यात्रा कर रहे यात्रियों को भी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। कुछ बसों में गेट के आसपास तक यात्री खड़े दिखाई दिए। लंबी दूरी के यात्रियों के लिए यह सफर और मुश्किल रहा।
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चालक-परिचालकों की छुट्टियां रद्द
रोडवेज विभाग के अनुसार, त्योहार पर यात्रियों की भीड़ को देखते हुए विभाग ने चालक और परिचालकों की छुट्टियां पहले ही रद्द कर दी थीं। बस अड्डे पर बस अड्डा इंचार्ज के अलावा सीआई, डीआई, इंस्पेक्टर और सब इंस्पेक्टर की ड्यूटी लगाई गई। अधिकारियों ने बसों की आवाजाही और यात्रियों की स्थिति पर नजर रखी। जिस रूट पर अधिक भीड़ दिखाई दी, वहां उपलब्ध बसों को भेजकर यात्रियों को निकालने का प्रयास किया गया।
भाई को राखी बांधने जाना था, बस नहीं मिल रही
भगत सिंह कॉलोनी निवासी सुनीता ने बताया कि उसने अपने भाई के घर संडील राखी बांधने जाना था। उसे जींद रूट पर बस में सवार होकर किठाना गांव जाना था। निजी बस का समय है। एक घंटे से बस का इंतजार करना पड़ रहा है। अब सरकारी बस आने वाली है, उसी में सवार होकर जाना पड़ेगा।
सरकार को अन्य बसों का प्रबंध करना चाहिए
कुरुक्षेत्र रूट पर 10 मिनट से बस नहीं आई है। वह अपने भाई के राखी बांधने के लिए बारना गांव जा रही थी। बस का इंतजार कर रही है। डिपो में भी बसें कम है। वह यात्रियों को छोड़ने के लिए गई हुई है। रक्षाबंधन पर सरकार को रोडवेज के साथ अन्य बसों का प्रबंध करना चाहिए।
रक्षाबंधन पर विभाग ने पहले से तैयारी की थी। वर्कशॉप में सभी बसों की मरम्मत करवा दी थी। 150 बसें रूटों पर संचालित की गईं। यात्रियों की संख्या बढ़ने पर 20 अतिरिक्त बसें भी चलाई गईं। प्रमुख मार्गों पर मांग के अनुसार बसें भेजी गईं। - विपुल कुमार, टीएम कैथल

बस में चढ़ते समय धक्का मुक्की करते हुए यात्री। संवाद