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औसतन 5 शिकायत हर रोज ...जांच अधिकारी महज 8

Sat, 17 Jun 2017 11:55 PM IST
Updated Sat, 17 Jun 2017 11:55 PM IST
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औसतन 5 शिकायत हर रोज ...जांच अधिकारी महज 8
सूरते-हाल-कर्मचारियों की कमी से जूझ रहा है महिला थाना
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अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। महिला पुलिस थाने में सीमित संख्या में कर्मचारियों के कारण महिलाओं की सुरक्षा में परेशानियां आ रही हैं। यहां औसतन 5 शिकायतें हर रोज आ रही हैं। जबकि कुल जांच अधिकारी केवल 8 हैं। इसमें भी इस थाने के अलावा 12 पुलिस थानों में महिला संबंधी विवाद में जांच के लिए जाना पड़ता है। वह अलग है। इस वर्ष 2017 में 810 शिकायतें आई है। जिनमें से कइयों में अभी जांच चल रही है।

ये है पुलिस थाने में स्टॉफ की स्थिति
महिला सुरक्षा के लिए महिला पुलिस थाने में जांच अधिकारियों की संख्या 8 है। जिसमें एक सब इंस्पेक्टर व इंस्पेक्टर अलग हैं। संगीन मामलों में खुद इंस्पेक्टर व सब इंस्पेक्टर जांच करती हैं। ऐसे में एक जांच अधिकारी के पास दर्जनों मामले लंबित हैं। ज्यादा संख्या में केस होने के कारण मामलों की जांच में भी विलंब हो रहा है। जिससे लोगों को काफी परेशानियां आती हैं। हालांकि महिला कांस्टेबल की संख्या अच्छी-खासी है। लेकिन मामलों की जांच के लिए जांच अधिकारियों की संख्या सीमित है।
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जिले के 12 अन्य पुलिस थानों के मामलों की भी होती है जांच
महिला थाना एएसएचओ निर्मला देवी ने बताया कि महिला पुलिस थाने में 8 में से 5 पुलिस जांच अधिकारियों को 12 अन्य पुलिस थानों में महिलाओं की शिकायत पर होने वाले मामलों की जांच के लिए भेजना पड़ता है। महिलाओं पर होने वाले अत्याचार पर महिला पुलिस ही जांच करती है। ऐसे में दो-चार पुलिस जांच अधिकारी कलायत, पूंडरी, सीवन, ढांड, राजौंद, गुहला-चीका पुलिस थाने में जांच के लिए जाती हैं। जिससे पुलिस थाने का काम भी प्रभावित होता है। फिर भी प्रयास किया जाता है कि किसी महिला के साथ ज्यादती ना हो।
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810 शिकायतों में से 700 शिकायतों का किया निपटारा, 35 मामले किए दर्ज
एसएचओ ने बताया कि वर्ष 2017 में अभी तक कुल 810 शिकायतें उनके पास आई जिनमें से 700 शिकायतों को थाने में निपटारा कर दिया गया है ओर 35 मामले छेड़छाड़ व दुष्कर्म के दर्ज किए है। शेष मामलों में अभी तक जांच चल रही है।

महिला थाना एसएसओ निर्मला कि वर्ष के पांच महीनों में करीब 800 से अधिक शिकायतें आ चुकी है। लेकिन उनका प्रयास रहता है थाने में सबको न्याय मिले। घरों में होने वाले कहासुनी के मामलों में अधिकतर उनका प्रयास रहता है कि दोनों पक्षों में समझाकर उनके मन मुटाव को कम किया जाए। गंभीर मामलों में पुलिस अपराधी के प्रति सख्ती से पेश आती है।
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