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Jind News: 12 को चक्का जाम के लिए मजदूरों-किसानों ने निकाली पैदल यात्रा
Sun, 08 Feb 2026 01:28 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Sun, 08 Feb 2026 01:28 AM IST
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07जेएनडी10: चक्का जाम काे लेकर पैदल यात्रा करते मजदूर। स्रोत संगठन
जींद। 12 फरवरी को प्रस्तावित राष्ट्रव्यापी हड़ताल और चक्का जाम की तैयारियां तेज हो गई है। मजदूरों और किसानों का पैदल जत्था जुलाना क्षेत्र के देवरड़, कमाच खेड़ा, मालवी और करेला गांव में पहुंचा।
दो फरवरी से चले इस जत्थे का नेतृत्व सीटू के राज्य उपाध्यक्ष विनोद कुमार और जिला कोषाध्यक्ष पवन कुमार ने किया। नेताओं ने केंद्र व प्रदेश सरकार की नीतियों को मजदूर-विरोधी करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने श्रम कानूनों को कमजोर कर पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाने का काम किया है।
वक्ताओं ने चेतावनी दी कि यदि चार लेबर कोड रद्द नहीं किए गए और न्यूनतम वेतन 30,000 रुपये लागू नहीं हुआ तो 12 फरवरी को पूरे देश का चक्का जाम कर दिया जाएगा। जनसभा में मनरेगा के बजट में कटौती, स्मार्ट मीटर योजना और बिजली की बढ़ती दरों पर भी कड़ा विरोध जताया गया।
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नेताओं ने कहा कि बिजली बिल-2025 की नीतियां और शांति बिल जैसे कानून जनता की आवाज दबाने की तानाशाही कोशिश है। इस अवसर पर सुल्तान जांगड़ा, सूरजभान और मुकेश आदि नेताओं ने आह्वान किया कि पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के 31 दिसंबर 2025 के फैसले को लागू करवाने और अधिकारों की रक्षा के लिए सभी वर्ग 12 फरवरी को एकजुट होकर सड़कों पर उतरें।
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दो फरवरी से चले इस जत्थे का नेतृत्व सीटू के राज्य उपाध्यक्ष विनोद कुमार और जिला कोषाध्यक्ष पवन कुमार ने किया। नेताओं ने केंद्र व प्रदेश सरकार की नीतियों को मजदूर-विरोधी करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने श्रम कानूनों को कमजोर कर पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाने का काम किया है।
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वक्ताओं ने चेतावनी दी कि यदि चार लेबर कोड रद्द नहीं किए गए और न्यूनतम वेतन 30,000 रुपये लागू नहीं हुआ तो 12 फरवरी को पूरे देश का चक्का जाम कर दिया जाएगा। जनसभा में मनरेगा के बजट में कटौती, स्मार्ट मीटर योजना और बिजली की बढ़ती दरों पर भी कड़ा विरोध जताया गया।
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नेताओं ने कहा कि बिजली बिल-2025 की नीतियां और शांति बिल जैसे कानून जनता की आवाज दबाने की तानाशाही कोशिश है। इस अवसर पर सुल्तान जांगड़ा, सूरजभान और मुकेश आदि नेताओं ने आह्वान किया कि पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के 31 दिसंबर 2025 के फैसले को लागू करवाने और अधिकारों की रक्षा के लिए सभी वर्ग 12 फरवरी को एकजुट होकर सड़कों पर उतरें।