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आंदोलन की सफलता के लिए दिमाग से लड़ना होगा : डल्लेवाल

Mon, 26 Feb 2024 12:19 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद Updated Mon, 26 Feb 2024 12:19 AM IST
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We will have to fight with the mind for the success of the movement: Dallewal
25जेएनडी39 : दातासिंह वाला बॉर्डर पर पहुंची मृतक किसान शुभकरण की बहन व अन्य परिवार के लोग। संवा
जींद/नरवाना। दातासिंह वाला बार्डर पर रविवार को डब्ल्यूटीओ (वर्ल्ड ट्रेड ऑर्गेनाइजेशन) को लेकर सेमिनार का आयोजन किया गया। इसकी अगुवाई किसान आंदोलन का नेतृत्व कर रहे जगजीत सिंह डल्लेवाल ने की। उन्होंने किसानों को डब्ल्यूटीओ के बारे में जानकारी दी।
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डल्लेवाल ने बताया कि जब इस संगठन को लेकर समझौते किए जा रहे थे तो लोगों से आह्वान किया गया था कि बाहर निकलो, क्योंकि बहुत खराब समझौते किए जा रहे हैं। यह समझौते किसानों के हक में नहीं हैं। डब्ल्यूटीओ का असली नाम गैट है। जब विश्व में दूसरा विश्वयुद्ध हुआ था तो उसके बाद व्यापार को आगे बढ़ाने के लिए यह संस्था बनाई गई थी। उन्होंने किसानों से साफ तौर पर कहा कि अगर हमें जंग जितनी है, आंदोलन को सफल बनाना है तो दिमाग से लड़ाई लड़नी होगी। दिमाग से लड़ाई नहीं लड़ी तो वह दिन दूरी नहीं जब किसान किसान नहीं रहेगा।
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वर्ल्ड बैंक की सामने आई एक खबर का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि वर्ल्ड बैंक ने कहा था कि हमें भारत में किसान नहीं चाहिए। हमें यहां मजदूर चाहिए, क्योंकि भारत का छोटा किसान कभी खाद, कभी बीज, कभी पानी तो कभी बिजली के लिए विरोध करता है। इनसे जमीन लेकर समूहों या फिर बड़े कॉरपोरेट घरानों को दी जाए।
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डल्लेवाल ने कहा कि किसानों की जो आज मांगें हैं उनका दर्द केंद्र सरकार को नहीं, बल्कि अमेरिका व बड़े कॉरपोरेट घरानों को भी हो रहा है, इसलिए बार-बार यही अपील है कि दिमाग से लड़ाई नहीं लड़ी तो कुछ नहीं बनेगा। दिमाग से लड़ाई लड़ेंगे तो हमारी जीत पक्की होगी। सरकार की जो नीतियां हैं, वह किसानों के बिल्कुल खिलाफ हैं। उनके खिलाफ जागरूक होना पड़ेगा। सेमिनार की शुरुआत में सभी किसानों ने आंदोलन में अपनी जान गंवाने वाले युवा शुभकरण को दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि दी।
आज सरकार के 20 फुट ऊंचे पुतले का दहन
दातासिंह वाला बॉर्डर पर सोमवार को 20 फुट ऊंचे पुतले का दहन किया जाएगा। दिन में सरकार के पुतले जलाएंगे तथा शाम को 20 फुट ऊंचा पुतला फूंका जाएगा। किसान नेता काका सिंह कोहाड़ ने कहा कि 27 व 28 को बड़ी बैठकें होंगी। इसमें सभी राज्यों की जत्थेबंदी चंडीगढ़ जाएंगी। 29 फरवरी को अगली कॉल किसानों को की जाएगी। उन्होंने कहा कि कुछ असामाजिक तत्व आंदोलन में घुसे हुए हैं, जिन्हें वालंटियर टैग कर रहे हैं।

काली पट्टी तथा काली पगड़ी बांधकर पहुंचे किसान
दातासिंह वाला बॉर्डर पर किसान डेरास्थल पर काली पट्टी तथा काली पगड़ी पहन कर पहुंचे। किसानों का कहना था कि वह शांतिपूर्ण रूप से मांगों को लेकर दिल्ली जा रहे थे। सरकार ने बलपूर्वक उन्हें रास्ते में ही रोककर उन पर लाठियां बरसाईं। आंसू गैस के गोले दागे और गोलियां चलाईं। इसमें किसानों को जान गंवानी पड़ी, जोकि देश के लिए दुर्भाग्य की बात है। सरकार के तानाशाही रवैये के विरोध में किसान रविवार को काली पट्टी तथा काली पगड़ी पहन कर डेरा डाले स्थल पर पहुंचे।

25जेएनडी39 : दातासिंह वाला बॉर्डर पर पहुंची मृतक किसान शुभकरण की बहन व अन्य परिवार के लोग। संवा

25जेएनडी39 : दातासिंह वाला बॉर्डर पर पहुंची मृतक किसान शुभकरण की बहन व अन्य परिवार के लोग। संवा

25जेएनडी39 : दातासिंह वाला बॉर्डर पर पहुंची मृतक किसान शुभकरण की बहन व अन्य परिवार के लोग। संवा

25जेएनडी39 : दातासिंह वाला बॉर्डर पर पहुंची मृतक किसान शुभकरण की बहन व अन्य परिवार के लोग। संवा

25जेएनडी39 : दातासिंह वाला बॉर्डर पर पहुंची मृतक किसान शुभकरण की बहन व अन्य परिवार के लोग। संवा

25जेएनडी39 : दातासिंह वाला बॉर्डर पर पहुंची मृतक किसान शुभकरण की बहन व अन्य परिवार के लोग। संवा

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