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Jind News: मकान गिराने पर ग्रामीणों ने दिया धरना, कहा-सरकार ने किए थे आंवटित
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28जेएनडी32-लघु सचिवालय के सामने धरने पर बैठे पीड़ित परिवार। संवाद
जींद। हाईकोर्ट के आदेश पर भाणा ब्राह्मण में तालाब पर बनाए गए सात मकानों को गिराने पर ग्रामीणों ने शनिवार को लघु सचिवालय के सामने धरना दिया। उन्होंने सरकार से प्रत्येक पीड़ित परिवार को 50-50 लाख रुपये मुआवजा देने की मांग की। कहा कि अब वह खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं।
ग्रामीण वीरेंद्र शर्मा, साधुराम, सतीश, धर्मपाल, रमेश, कर्ण सिंह, फकीरचंद ने कहा कि प्रशासन ने शुक्रवार को उनके मकान गिरा दिए जबकि मकान उनकी खुद की जगह पर बने हुए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि बाहर से आकर एक समाजसेवी ने उनके मकानों को गिरवाया है।
उन्होंने बताया कि इंदिरा आवास योजना के तहत वर्ष 1984 में गरीब पात्र परिवारों को गांव की पंचायती जमीन में 100-100 वर्ग गज के प्लॉट सरकार ने आंवटित किए थे। इसके बाद उनके पूर्वजों ने अपने-अपने हिस्सा में मकान बना लिए।
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उन्होंने बताया कि पिछले काफी समय से ग्राम पंचायत और पीड़ित परिवारों के बीच विवाद चल रहा है जिसके चलते पाचं-छह बार प्रशासन ने उनके प्लॉटों बारे फीस अदा करके निशानदेही करवाई जा चुकी है लेकिन 25 मार्च को बीडीपीओ नरवाना ने मकानों को अचानक खाली करवाने बारे नोटिस दिए।
इसके बाद 27 मार्च को प्रशासनिक अमला गांव पहुंचा और उनके मकानों को गिरा दिया। उन्होंने सरकार से मांग की है कि प्रत्येक पीड़ित परिवार को 50-50 लाख रुपये मुआवजा दिया जाए।
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ग्रामीण वीरेंद्र शर्मा, साधुराम, सतीश, धर्मपाल, रमेश, कर्ण सिंह, फकीरचंद ने कहा कि प्रशासन ने शुक्रवार को उनके मकान गिरा दिए जबकि मकान उनकी खुद की जगह पर बने हुए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि बाहर से आकर एक समाजसेवी ने उनके मकानों को गिरवाया है।
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उन्होंने बताया कि इंदिरा आवास योजना के तहत वर्ष 1984 में गरीब पात्र परिवारों को गांव की पंचायती जमीन में 100-100 वर्ग गज के प्लॉट सरकार ने आंवटित किए थे। इसके बाद उनके पूर्वजों ने अपने-अपने हिस्सा में मकान बना लिए।
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उन्होंने बताया कि पिछले काफी समय से ग्राम पंचायत और पीड़ित परिवारों के बीच विवाद चल रहा है जिसके चलते पाचं-छह बार प्रशासन ने उनके प्लॉटों बारे फीस अदा करके निशानदेही करवाई जा चुकी है लेकिन 25 मार्च को बीडीपीओ नरवाना ने मकानों को अचानक खाली करवाने बारे नोटिस दिए।
इसके बाद 27 मार्च को प्रशासनिक अमला गांव पहुंचा और उनके मकानों को गिरा दिया। उन्होंने सरकार से मांग की है कि प्रत्येक पीड़ित परिवार को 50-50 लाख रुपये मुआवजा दिया जाए।