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दो साल बाद भी नहीं बना पॉलीटेक्निक कॉलेज
ब्यूरो/ अमर उजाला, जींद
Updated Mon, 27 Feb 2017 12:01 AM IST
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जींद का कच्चा पड़ा बाईपास, जिस पर काम शुरू होने का इंतजार है।
- फोटो : jind
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विधानसभा सत्र सोमवार से शुरू हो रहा है। इस दौरान दो साल पहले मुख्यमंत्री द्वारा घोषणा के बावजूद पॉलीटेक्निक कॉलेज नहीं बनने और जींद के औद्योगिक क्षेत्र की बदहाली की आवाज विधानसभा में उठाई जाएगी। इसके अलावा शहर की अन्य समस्याओं को भी प्रमुखता से उठाया जाएगा। इसके लिए विधायक डॉ. हरिचंद मिढ़ा ने खासी तैयारी की है। विधायक का कहना है कि उन्होंने लोगों के हक दिलवाने के लिए 56 नोटिस सरकार को भेजे हैं। अब इनका हिसाब विधानसभा में लिया जाएगा।
गौरतलब है कि करीब दो साल पहले जींद दौरे के दौरान मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने जींद में सरकारी पॉलीटेक्निक कॉलेज की घोषणा की थी। आज तक इस पर कोई प्रगति नहीं है। इसका जवाब सरकार से मांगा जाएगा। इसके अलावा जींद का औद्योगिक क्षेत्र वर्षों से बदहाली की मार झेल रहा है। सरकार बार-बार पत्र लिखने बाद भी इस दिशा में कोई प्रगति नहीं हो रही है। वहीं, जींद के बाईपास केंद्रीय मंत्री द्वारा उद्घाटन किए जाने के बावजूद काम शुरू नहीं हो पाया है।
यह परियोजनाएं हैं ठंडे बस्ते में
पॉलीटेक्निक कॉलेज: पॉलीटेक्नि कॉलेज की घोषणा मुख्यमंत्री ने दो साल पहले जींद के अपने पहले दौरे के दौरान पॉलीटेक्नि कॉलेज की घोषणा की थी। इस पर अभी तक कोई काम शुरू नहीं हो पाया। यहां तक की अभी साइट भी तय नहीं हुई है।
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मेडिकल कॉलेज: मेडिकल कॉलेज की घोषणा भी मुख्यमंत्री पॉलीक्लीनिक के साथ ही की थी। इसके लिए हैबतपुर गांव के पास साइट तय की गई है, लेकिन फिलहाल कोई प्रगति नहीं है।
नागरिक अस्पताल: जींद में फिलहाल 100 बैड का नागरिक अस्पताल चल रहा है। पिछली सरकार के समय मेडिकल कॉलेज का अधिकतर काम पूरा कर लिया गया था, लेकिन अभी तक यह शुरू नहीं हो पाया है। दो माह पहले मुख्यमंत्री ने इसके लिए बजट जारी करने की घोषणा की थी, लेकिन फिर भी परियोजना शुरू नहीं हो सकी है।
बस स्टैंड: जींद के नए बस स्टैंड की परियोजन 2031 के मास्टर प्लान में है। करीब एक साल से बस स्टैंड के लिए अधिकृत जमीन का मुआवजा दिया जा चुका है, लेकिन काम शुरू नहीं पाया है।
नहरी पानी पर आधारित पेयजल व्यवस्था: हरियाणा के साथ ही अस्तित्व में आए जींद जिला को अभी तक नहरी पानी नहीं मिल रहा है। जींद शहर की पूरी पेयजल व्यवस्था भूमिगत पानी पर ही आधारित है। हुडा सेक्टरों में नहरी पानी की सप्लाई हो रही है। यह परियोजना करीब दस साल से फाइलों में दबी पड़ी है।
पशु पॉलीक्लीनिक: सफीदों रोड पर झोटा फार्म में सरकार द्वारा पशु पॉलीक्लीनिक तैयार किया गया है। पॉलीक्लीनिक करीब एक साल से तैयार है, लेकिन यहां उपकरण और स्टॉफ नहीं पहुंचा है। इसके चलते करोड़ों रुपये की यह परियोजना धूल फांक रही है।
विधानसभा सत्र में जींद की जनता के हकों की मांग उठाई जाएगी। इसमें विश्वविद्यालय में नए कोर्स शुरू करने, हांसी ब्रांच नहर की सफाई नहीं होने, ग्रामीण क्षेत्र में पीने के पानी की समस्या, नए बस अड्डे के निर्माण की मांग प्रमुखता से उठाई जाएगी। प्रदेश में जब से भाजपा की सरकार की बनी तब से लेकर आज तक जींद के विकास को लेकर घोषणाएं तो हुई हैं, लेकिन उन पर अमलीजामा नहीं पहनाया गया है। मुख्यमंत्री द्वारा पानीपत में केंद्रीय विश्वविद्यालय बनाए जाने की घोषणा की गई है, इसे जींद में बनाए जाने का भी प्रयास किया जाएगा।
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गौरतलब है कि करीब दो साल पहले जींद दौरे के दौरान मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने जींद में सरकारी पॉलीटेक्निक कॉलेज की घोषणा की थी। आज तक इस पर कोई प्रगति नहीं है। इसका जवाब सरकार से मांगा जाएगा। इसके अलावा जींद का औद्योगिक क्षेत्र वर्षों से बदहाली की मार झेल रहा है। सरकार बार-बार पत्र लिखने बाद भी इस दिशा में कोई प्रगति नहीं हो रही है। वहीं, जींद के बाईपास केंद्रीय मंत्री द्वारा उद्घाटन किए जाने के बावजूद काम शुरू नहीं हो पाया है।
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यह परियोजनाएं हैं ठंडे बस्ते में
पॉलीटेक्निक कॉलेज: पॉलीटेक्नि कॉलेज की घोषणा मुख्यमंत्री ने दो साल पहले जींद के अपने पहले दौरे के दौरान पॉलीटेक्नि कॉलेज की घोषणा की थी। इस पर अभी तक कोई काम शुरू नहीं हो पाया। यहां तक की अभी साइट भी तय नहीं हुई है।
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मेडिकल कॉलेज: मेडिकल कॉलेज की घोषणा भी मुख्यमंत्री पॉलीक्लीनिक के साथ ही की थी। इसके लिए हैबतपुर गांव के पास साइट तय की गई है, लेकिन फिलहाल कोई प्रगति नहीं है।
नागरिक अस्पताल: जींद में फिलहाल 100 बैड का नागरिक अस्पताल चल रहा है। पिछली सरकार के समय मेडिकल कॉलेज का अधिकतर काम पूरा कर लिया गया था, लेकिन अभी तक यह शुरू नहीं हो पाया है। दो माह पहले मुख्यमंत्री ने इसके लिए बजट जारी करने की घोषणा की थी, लेकिन फिर भी परियोजना शुरू नहीं हो सकी है।
बस स्टैंड: जींद के नए बस स्टैंड की परियोजन 2031 के मास्टर प्लान में है। करीब एक साल से बस स्टैंड के लिए अधिकृत जमीन का मुआवजा दिया जा चुका है, लेकिन काम शुरू नहीं पाया है।
नहरी पानी पर आधारित पेयजल व्यवस्था: हरियाणा के साथ ही अस्तित्व में आए जींद जिला को अभी तक नहरी पानी नहीं मिल रहा है। जींद शहर की पूरी पेयजल व्यवस्था भूमिगत पानी पर ही आधारित है। हुडा सेक्टरों में नहरी पानी की सप्लाई हो रही है। यह परियोजना करीब दस साल से फाइलों में दबी पड़ी है।
पशु पॉलीक्लीनिक: सफीदों रोड पर झोटा फार्म में सरकार द्वारा पशु पॉलीक्लीनिक तैयार किया गया है। पॉलीक्लीनिक करीब एक साल से तैयार है, लेकिन यहां उपकरण और स्टॉफ नहीं पहुंचा है। इसके चलते करोड़ों रुपये की यह परियोजना धूल फांक रही है।
विधानसभा सत्र में जींद की जनता के हकों की मांग उठाई जाएगी। इसमें विश्वविद्यालय में नए कोर्स शुरू करने, हांसी ब्रांच नहर की सफाई नहीं होने, ग्रामीण क्षेत्र में पीने के पानी की समस्या, नए बस अड्डे के निर्माण की मांग प्रमुखता से उठाई जाएगी। प्रदेश में जब से भाजपा की सरकार की बनी तब से लेकर आज तक जींद के विकास को लेकर घोषणाएं तो हुई हैं, लेकिन उन पर अमलीजामा नहीं पहनाया गया है। मुख्यमंत्री द्वारा पानीपत में केंद्रीय विश्वविद्यालय बनाए जाने की घोषणा की गई है, इसे जींद में बनाए जाने का भी प्रयास किया जाएगा।