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Jind News: नरवाना में पराली जलाने पर दो किसानों पर 15 हजार रुपये का जुर्माना

Mon, 26 Oct 2026 11:54 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Mon, 26 Oct 2026 11:54 PM IST
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Two farmers fined Rs 15,000 for stubble burning in Narwana
नरवाना। धान की पराली जलाने की घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए कृषि विभाग ने निगरानी और कार्रवाई तेज कर दी है। नरवाना क्षेत्र में खेतों में पराली जलाने के दो मामले सामने आने पर विभाग की टीम ने सोमवार को दनौदा खुर्द निवासी प्रदीप कुमार पर 10 हजार रुपये व कलौदा खुर्द निवासी सतीश पर 5 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया।
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कृषि विभाग को खेतों में आग लगने की सूचना हरियाणा स्पेस एप्लीकेशन सेंटर (हरसेक) के माध्यम से मिली थी। हरसेक एप पर आग लगने की लोकेशन मिलने के बाद एसडीओ डॉ. सुनील दलाल के नेतृत्व में टीम मौके पर पहुंची। टीम में टीए नरवाना डॉ. वीरेंद्र बूरा और सुपरवाइजर मनोज भी शामिल रहे। अधिकारियों ने खेतों का निरीक्षण किया और पराली जलाने की पुष्टि होने पर संबंधित किसानों के खिलाफ कार्रवाई की।
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पराली जलाने के मामलों में जुर्माने के साथ किसानों को अन्य प्रतिबंधों का भी सामना करना पड़ सकता है। नियमानुसार दो एकड़ तक फसल अवशेष जलाने पर पांच हजार रुपये, दो से पांच एकड़ तक 10 हजार रुपये और पांच से 10 एकड़ तक अवशेष जलाने पर 30 हजार रुपये जुर्माने का प्रावधान बताया गया है। इसके अलावा संबंधित किसान के खिलाफ मामला भी दर्ज होता है।
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पराली जलाई तो तीन साल तक मंडी में फसल बेचने पर लग सकता है प्रतिबंध
पराली जलाने की पुष्टि होने पर संबंधित खेत की राजस्व रिकॉर्ड में रेड एंट्री की जाती है। इससे किसान की आगामी फसल बिक्री और सरकारी कृषि सुविधाओं का लाभ लेने की पात्रता प्रभावित हो सकती है। विभागीय जानकारी के अनुसार, रेड एंट्री के चलते किसान को तीन साल तक मंडी में फसल बेचने में प्रतिबंध का सामना करना पड़ सकता है।

फसल अवशेष नहीं जलाने की सलाह दे रहा कृषि विभाग
कृषि विभाग किसानों को फसल अवशेष नहीं जलाने और उनके उचित प्रबंधन के लिए जागरूक कर रहा है। मेरी फसल-मेरा ब्योरा पोर्टल पर पंजीकृत किसानों को फसल अवशेष नहीं जलाने पर प्रोत्साहन के रूप में 1,200 रुपये भी दिए जा रहे हैं।
पराली जलाने से वातावरण में धुआं और प्रदूषक तत्व बढ़ते हैं : एसडीओ
एसडीओ डॉ. सुनील दलाल के अनुसार, पराली जलाने से वातावरण में धुआं और प्रदूषक तत्व बढ़ते हैं जिससे वायु गुणवत्ता प्रभावित होती है। इसके अलावा मिट्टी में मौजूद उपयोगी सूक्ष्म जीवों और पोषक तत्वों को भी नुकसान पहुंचता है। किसानों को सलाह दी जा रही है कि वे पराली प्रबंधन के लिए उपलब्ध कृषि यंत्रों और अन्य वैकल्पिक उपायों का इस्तेमाल करें।

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हरसेक एप से मिलने वाली लोकेशन के आधार पर खेतों की निगरानी की जा रही है। जहां पराली जलाने की पुष्टि होती है, वहां नियमानुसार कार्रवाई की जाती है। कार्रवाई के साथ किसानों को जागरूक भी किया जा रहा है ताकि पराली जलाने की घटनाओं पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सके। -सुखदेव कंबोज, डीडीए जींद
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