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दिव्यांगता जांच मेडिकल बोर्ड में नहीं पहुंचे दो चिकित्सक --अब अगले सप्ताह फिर से दिव्यांगों को जांच के लिए आना पड़ेगा नागरिक अस्पताल
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दिव्यांगता प्रमाणपत्र बनवाने के लिए नागरिक अस्पताल में पहुंचे दिव्यांग व उनके परिजन।
- फोटो : Jind
नागरिक अस्पताल में हर बुधवार को दिव्यांगों की जांच के लिए लगने वाले मेडिकल बोर्ड में दो चिकित्सा विशेषज्ञ नहीं पहुंचने से दिव्यांगों तथा उनके परिजनों को इंतजार करना पड़ा। बाद में उन्हें बताया गया कि दोनों ही चिकित्सक नहीं आएंगे। इसलिए अगले सप्ताह अब यह जांच होगी। दिव्यांगों ने आरोप लगाया कि जब स्वास्थ्य विभाग को पता था कि दोनों चिकित्सक नहीं आएंगे तो उन्हें पूरा दिन बेवजह स्वास्थ्य अधिकारियों ने परेशान किया।
बताते चलें कि हर बुधवार को नागरिक अस्पताल में दिव्यांगता जांचने के लिए मेडिकल बोर्ड लगता है। इसमें चिकित्सकों का बोर्ड बैठता है जो दिव्यांगों की अलग-अलग बीमारियों के बारे में जांच करता है। इसके बाद ही दिव्यांगता प्रमाणपत्र बनाया जाता है। बुधवार को मेडिसन तथा मनोवैज्ञानिक चिकित्सक बोर्ड में शामिल नहीं हुए। जिन दिव्यांगों अपनी जांच करवानी थी उनको यह दोनों चिकित्सक उपलब्ध नहीं पर काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। यह लोग इन चिकित्सकों के इंतजार में नागरिक अस्पताल में बैठे रहे। लगभग दो बजे इन लोगों को बताया गया कि दोनों चिकित्सक नहीं आएंगे इसलिए सभी को अगले सप्ताह आना पड़ेगा। इस पर दिव्यांगों का गुस्सा फूट गया और स्वास्थ्य विभाग के प्रति रोष प्रकट किया। विद्यापीठ नगर निवासी सतबीर ने बताया कि उसकी बेटी दिव्यांग है। तीन माह पहले उसे 29 दिसंबर को आने का टोकन मिला था। आज जब वह अपनी बेटी को लेकर पहुंचा तो उसे बताया गया कि चिकित्सक नहीं आएंगे। उन्होंने कहा कि बार-बार अपने दिव्यांग बच्चों को लेकर आने में उन्हें परेशानी उठानी पड़ती है।
मेडिसन डॉ. नरेश वर्मा को जुलाना में डीसी की मीटिंग में शामिल होना पड़ा जबकि मनो चिकित्सक डॉ. संकल्प के पिता बीमारी होने के कारण वह छुट्टी पर थे। डॉ. नरेश वर्मा के बारे में सुबह ही सबको बता दिया था जबकि डॉ. संकल्प के बारे में दोपहर को पता चला इसलिए दिव्यांगों को अगले सप्ताह आने के लिए कहा गया।
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-डॉ. जेके मान, प्रभारी मेडिकल बोर्ड।
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बताते चलें कि हर बुधवार को नागरिक अस्पताल में दिव्यांगता जांचने के लिए मेडिकल बोर्ड लगता है। इसमें चिकित्सकों का बोर्ड बैठता है जो दिव्यांगों की अलग-अलग बीमारियों के बारे में जांच करता है। इसके बाद ही दिव्यांगता प्रमाणपत्र बनाया जाता है। बुधवार को मेडिसन तथा मनोवैज्ञानिक चिकित्सक बोर्ड में शामिल नहीं हुए। जिन दिव्यांगों अपनी जांच करवानी थी उनको यह दोनों चिकित्सक उपलब्ध नहीं पर काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। यह लोग इन चिकित्सकों के इंतजार में नागरिक अस्पताल में बैठे रहे। लगभग दो बजे इन लोगों को बताया गया कि दोनों चिकित्सक नहीं आएंगे इसलिए सभी को अगले सप्ताह आना पड़ेगा। इस पर दिव्यांगों का गुस्सा फूट गया और स्वास्थ्य विभाग के प्रति रोष प्रकट किया। विद्यापीठ नगर निवासी सतबीर ने बताया कि उसकी बेटी दिव्यांग है। तीन माह पहले उसे 29 दिसंबर को आने का टोकन मिला था। आज जब वह अपनी बेटी को लेकर पहुंचा तो उसे बताया गया कि चिकित्सक नहीं आएंगे। उन्होंने कहा कि बार-बार अपने दिव्यांग बच्चों को लेकर आने में उन्हें परेशानी उठानी पड़ती है।
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मेडिसन डॉ. नरेश वर्मा को जुलाना में डीसी की मीटिंग में शामिल होना पड़ा जबकि मनो चिकित्सक डॉ. संकल्प के पिता बीमारी होने के कारण वह छुट्टी पर थे। डॉ. नरेश वर्मा के बारे में सुबह ही सबको बता दिया था जबकि डॉ. संकल्प के बारे में दोपहर को पता चला इसलिए दिव्यांगों को अगले सप्ताह आने के लिए कहा गया।
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-डॉ. जेके मान, प्रभारी मेडिकल बोर्ड।