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सच की होती है हमेशा जीत : अरविंद शास्त्री
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31जेएनडी33: लाला प्रभुदयाल धर्मशाला में चल रही श्रीराम कथा में पहुंचे श्रद्धालु। संवाद
उचाना। लाला प्रभु दयाल चौधरी धर्मशाला में चल रही रामकथा में श्रद्धालुओं को कथा वाचक अरविंद शास्त्री चित्रकूट ने कहा कि सच की हमेशा जीत होती है। सच प्रताड़ित हो सकता है, लेकिन परास्त नही हो सकता। इसलिए सच के मार्ग पर चलना चाहिए। हमेशा अपने से बड़ों का सम्मान करने के साथ-साथ उनके द्वारा बताए मार्ग पर चलना चाहिए।
जो हमें अपने बुजुर्गों, माता-पिता से सीखने को मिल सकता है, वो कहीं नहीं सीखने को मिल सकता है। जीवन में सुख, दुख आना आम बात है। सुख में हमें ज्यादा खुश नहीं होना चाहिए, जो अपने साथ होते हैं, उनको भूलना नहीं चाहिए। दुख में हमें दुखी नहीं होना चाहिए, क्योंकि दुख में हमें पता चलता है कि कौन अपने साथ है और कौन साथ नहीं है। राम कथा में आने का सही मायनों में फायदा जब मिलेगा, जब यहां कथा सुनने के बाद उन पर अमल किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि जो अपने हक के लिए छोड़ देता है वहां रामायण होती है। भगवान रामचंद्र ने अपने हिस्से आने वाले राज को छोड़ कर वनों में जाने का निर्णय लिया, क्योंकि उनके पिता ने जो वचन दिया था वो उस वचन को निभाने के लिए राज को छोड़ कर वनों में चले गए। अपने भाई भरत के लिए राज छोड़ कर वनों में जब राम जाने लगे तो उनके साथ लक्ष्मण भी गए। भाई तो लक्ष्मण जैसा हो जिसने अपने बड़े भाई के साथ वनवास काटा। रामायाण से हमें काफी कुछ अपने जीवन में अपनाने को मिलता है।
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जो हमें अपने बुजुर्गों, माता-पिता से सीखने को मिल सकता है, वो कहीं नहीं सीखने को मिल सकता है। जीवन में सुख, दुख आना आम बात है। सुख में हमें ज्यादा खुश नहीं होना चाहिए, जो अपने साथ होते हैं, उनको भूलना नहीं चाहिए। दुख में हमें दुखी नहीं होना चाहिए, क्योंकि दुख में हमें पता चलता है कि कौन अपने साथ है और कौन साथ नहीं है। राम कथा में आने का सही मायनों में फायदा जब मिलेगा, जब यहां कथा सुनने के बाद उन पर अमल किया जाएगा।
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उन्होंने कहा कि जो अपने हक के लिए छोड़ देता है वहां रामायण होती है। भगवान रामचंद्र ने अपने हिस्से आने वाले राज को छोड़ कर वनों में जाने का निर्णय लिया, क्योंकि उनके पिता ने जो वचन दिया था वो उस वचन को निभाने के लिए राज को छोड़ कर वनों में चले गए। अपने भाई भरत के लिए राज छोड़ कर वनों में जब राम जाने लगे तो उनके साथ लक्ष्मण भी गए। भाई तो लक्ष्मण जैसा हो जिसने अपने बड़े भाई के साथ वनवास काटा। रामायाण से हमें काफी कुछ अपने जीवन में अपनाने को मिलता है।
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