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Jind News: चार अगस्त के महापड़ाव को सफल बनाने का संकल्प लिया
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जींद। चार अगस्त को कुरुक्षेत्र स्थित मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय पर आयोजित राज्यस्तरीय हड़ताल एवं महापड़ाव की तैयारियों को लेकर रविवार को जींद और उचाना में मिड-डे-मील वर्कर्स यूनियन की बैठक हुई। बैठक में दोनों ब्लॉकों से मिड-डे-मील वर्कर्स ने भाग लिया और महापड़ाव को सफल बनाने का संकल्प लिया।
यूनियन नेता कैलाश और सुनीता ने कहा कि सरकार लंबे समय से मिड-डे-मील वर्कर्स की मांगों की अनदेखी कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि कई वर्षों से मानदेय में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है और वर्तमान मानदेय भी समय पर नहीं मिलता। नेताओं ने कहा कि सरकार ने पूर्व में हुए समझौतों को भी लागू नहीं किया, जिससे कर्मचारियों में भारी रोष है।
उन्होंने दावा किया कि 4 अगस्त को जींद जिले से हजारों मिड-डे-मील वर्कर्स कुरुक्षेत्र पहुंचकर महापड़ाव में शामिल होंगी। यदि इसके बाद भी सरकार ने मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
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यूनियन ने सरकार से सभी मिड-डे-मील वर्कर्स को स्थायी कर्मचारी का दर्जा देने, न्यूनतम 30 हजार रुपये मासिक वेतन लागू करने, 12 महीने का मानदेय देने, प्रत्येक माह की सात तारीख तक भुगतान सुनिश्चित करने, सेवानिवृत्ति पर तीन लाख रुपये सम्मान राशि, दो हजार रुपये वार्षिक वर्दी भत्ता, ड्यूटी के दौरान मृत्यु पर पांच लाख रुपये आर्थिक सहायता तथा हटाई गई वर्कर्स को दोबारा कार्य पर रखने की मांग की।
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यूनियन नेता कैलाश और सुनीता ने कहा कि सरकार लंबे समय से मिड-डे-मील वर्कर्स की मांगों की अनदेखी कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि कई वर्षों से मानदेय में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है और वर्तमान मानदेय भी समय पर नहीं मिलता। नेताओं ने कहा कि सरकार ने पूर्व में हुए समझौतों को भी लागू नहीं किया, जिससे कर्मचारियों में भारी रोष है।
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उन्होंने दावा किया कि 4 अगस्त को जींद जिले से हजारों मिड-डे-मील वर्कर्स कुरुक्षेत्र पहुंचकर महापड़ाव में शामिल होंगी। यदि इसके बाद भी सरकार ने मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
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यूनियन ने सरकार से सभी मिड-डे-मील वर्कर्स को स्थायी कर्मचारी का दर्जा देने, न्यूनतम 30 हजार रुपये मासिक वेतन लागू करने, 12 महीने का मानदेय देने, प्रत्येक माह की सात तारीख तक भुगतान सुनिश्चित करने, सेवानिवृत्ति पर तीन लाख रुपये सम्मान राशि, दो हजार रुपये वार्षिक वर्दी भत्ता, ड्यूटी के दौरान मृत्यु पर पांच लाख रुपये आर्थिक सहायता तथा हटाई गई वर्कर्स को दोबारा कार्य पर रखने की मांग की।