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टोल पर आज कृषि कानूनों की प्रतियां जलाकर लोहड़ी मनाएंगे किसान
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प्रदर्शन करते सीटू व कर्मचारी संगठनों के सदस्य। अमर उजाला
- फोटो : Jind
जींद/ नरवाना/उचाना। कृषि कानूनों के विरोध में दिल्ली सीमा पर किसानों का आंदोलन जारी है। सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के बाद भी किसान बद्दोवाल व खटकड़ टोल पर डटे रहे। किसानों का कहना है कि दिल्ली से किसान नेताओं के निर्देश मिलने तक वे धरने पर डटे रहेंगे। वहीं किसान बुधवार को तीनों कानूनों की प्रतियां जलाकर लोहड़ी पर्व मनाएंगे। वहीं, करनाल में किसानों पर दर्ज किए गए केस के विरोध में किसानों ने सरकार का पुतला फूंका। उधर, सीटू के बैनर तले विभिन्न कर्मचारी व ट्रेड यूनियन के सदस्यों ने लघु सचिवालय पर प्रदर्शन किया।
खटकड़ टोल पर लीला मोहनगढ़ छापड़ा ने कहा कि करनाल पुलिस द्वारा किसानों पर दर्ज किए गए मामले तुरंत प्रभाव से वापस लिए जाएं। आजाद पालवां ने कहा कि 26 नवंबर से दिल्ली बॉर्डर पर जारी आंदोलन अब जन आंदोलन बन गया है। सतबीर पहलवान ने कहा कि दिल्ली बॉर्डर पर 23 जनवरी से किसान जाने शुरू हो जाएंगे। हर घर से एक किसान पहुंचे, इसके लिए गांव-गांव जाकर टीम प्रचार करेगी। मार्केट कमेटी के पूर्व चेयरमैन वीरेंद्र घोघड़िया ने कहा कि वह अपने युवा साथियों के साथ अनिश्चितकालीन हड़ताल पर बैठेंगे। हलके के हर गांव से एक युवा अनशन में शामिल होगा। शोक दनोदा ने बताया कि गांव मे कोई पुरुष नहीं रहेगा। हर बच्चा, बूढ़ा और जवान दिल्ली बॉर्डर पर सरकार के खिलाफ हुंकार भरेगा।
दिल्ली बॉर्डर पर जाकर युवा बना रहे मालपुआ
कृषि कानूनों को रद्द करने की मांग अब गांव स्तर पर भी किसान एकत्रित होकर करने लगे हैं। दिल्ली बॉर्डर पर धरना दे रहे किसानों के लिए गांव से दूध, सब्जी, लकड़ी पहुंचाई जा रही है। करसिंधु गांव से दूध का कैंटर व रजाई सहित अन्य सामान लेकर किसान गए तो छात्तर गांव में ग्रामीणों ने रैली निकाल कर केंद्र सरकार से कानूनों को रद्द करने की मांग की। वहीं युवा बॉर्डर पर किसानों के लिए माल पुवे बना रहे हैं।
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26 को खरक भूरा से दिल्ली जाएंगे ट्रैक्टर
पिछले 45 दिनों से कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली सीमा पर संघर्ष कर रहे हैं। मगर सरकार नौ दौर की बैठक के बाद भी बार-बार तारीख पर तारीख देकर किसानों का हौसला कम करने की कोशिश कर रही है। किसान आंदोलन को लेकर गांव खरक भूरा की बड़ी चौपाल में 36 बिरादरी के लोगों ने फैसला लिया कि 26 जनवरी को दिल्ली में किसानों की होने वाली परेड में ट्रैक्टरों के साथ हजारों की संख्या में हिस्सा लेंगे।
15 को ट्रैक्टर मार्च की योजना बनाएंगे संगठन
किसानों द्वारा 26 जनवरी को दिल्ली में की जाने वाली ट्रैक्टर परेड की योजना बनाने के लिए विभिन्न संगठनों की बैठक 15 जनवरी को जाट धर्मशाला में होगी। किसान नेता वीरभान ढुल ने बताया कि यह बैठक 16 जनवरी को होनी थी, लेकिन उस दिन जाट धर्मशाला में अन्य आयोजन है। ऐसे में इसे 15 जनवरी को किया गया है।
सीटू कार्यकर्ताओं ने किया प्रदर्शन
कृषि कानून, चार लेबर कोड्स, निजीकरण, बिजली संसोधन बिल 2020 के विरोध में सीटू के विभिन्न संगठनों व कर्मचारी संगठनों ने प्रदर्शन किया। जिला प्रधान सतबीर खरल व राज्य प्रधान सुरेखा ने कहा कि निजीकरण को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने श्रमिकों के अधिकारों पर भी कुठाराघात किया है।
करसोला गांव से किसान व महिलाओं ने दिल्ली के लिए किया कूच
कृषि कानूनों को रद्द कराने की मांग को लेकर दिल्ली बॉर्डर पर आंदोलन कर रहे किसानों का साथ देने के लिए और 26 जनवरी की परेड में हिस्सा लेने के लिए करसोला गांव से किसान व महिलाएं ट्रैक्टर-ट्रॉली में दिल्ली के लिए रवाना हुए। इस दौरान महिलाओं ने हरियाणवी गीत गाए। सरपंच राजपाल लाठर ने कहा कि गांव में सभा कर एक मत से सभी ने किसान आंदोलन का समर्थन किया और आंदोलन कर रहे किसानों का साथ देने के लिए महिलाओं के साथ दिल्ली सीमा के लिए रवाना हुए। इस मौके पर पूर्व सैनिक नरेंद्र लाठर, पवन लाठर, राजेश, सतीश, विजय, अजमेर, राकेश, महिलाओं में भतेरी, कमलेश,बिमला, शीला, कृष्णा, पताशो, ओमपति आदि मौजूद रहे।
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खटकड़ टोल पर लीला मोहनगढ़ छापड़ा ने कहा कि करनाल पुलिस द्वारा किसानों पर दर्ज किए गए मामले तुरंत प्रभाव से वापस लिए जाएं। आजाद पालवां ने कहा कि 26 नवंबर से दिल्ली बॉर्डर पर जारी आंदोलन अब जन आंदोलन बन गया है। सतबीर पहलवान ने कहा कि दिल्ली बॉर्डर पर 23 जनवरी से किसान जाने शुरू हो जाएंगे। हर घर से एक किसान पहुंचे, इसके लिए गांव-गांव जाकर टीम प्रचार करेगी। मार्केट कमेटी के पूर्व चेयरमैन वीरेंद्र घोघड़िया ने कहा कि वह अपने युवा साथियों के साथ अनिश्चितकालीन हड़ताल पर बैठेंगे। हलके के हर गांव से एक युवा अनशन में शामिल होगा। शोक दनोदा ने बताया कि गांव मे कोई पुरुष नहीं रहेगा। हर बच्चा, बूढ़ा और जवान दिल्ली बॉर्डर पर सरकार के खिलाफ हुंकार भरेगा।
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दिल्ली बॉर्डर पर जाकर युवा बना रहे मालपुआ
कृषि कानूनों को रद्द करने की मांग अब गांव स्तर पर भी किसान एकत्रित होकर करने लगे हैं। दिल्ली बॉर्डर पर धरना दे रहे किसानों के लिए गांव से दूध, सब्जी, लकड़ी पहुंचाई जा रही है। करसिंधु गांव से दूध का कैंटर व रजाई सहित अन्य सामान लेकर किसान गए तो छात्तर गांव में ग्रामीणों ने रैली निकाल कर केंद्र सरकार से कानूनों को रद्द करने की मांग की। वहीं युवा बॉर्डर पर किसानों के लिए माल पुवे बना रहे हैं।
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26 को खरक भूरा से दिल्ली जाएंगे ट्रैक्टर
पिछले 45 दिनों से कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली सीमा पर संघर्ष कर रहे हैं। मगर सरकार नौ दौर की बैठक के बाद भी बार-बार तारीख पर तारीख देकर किसानों का हौसला कम करने की कोशिश कर रही है। किसान आंदोलन को लेकर गांव खरक भूरा की बड़ी चौपाल में 36 बिरादरी के लोगों ने फैसला लिया कि 26 जनवरी को दिल्ली में किसानों की होने वाली परेड में ट्रैक्टरों के साथ हजारों की संख्या में हिस्सा लेंगे।
15 को ट्रैक्टर मार्च की योजना बनाएंगे संगठन
किसानों द्वारा 26 जनवरी को दिल्ली में की जाने वाली ट्रैक्टर परेड की योजना बनाने के लिए विभिन्न संगठनों की बैठक 15 जनवरी को जाट धर्मशाला में होगी। किसान नेता वीरभान ढुल ने बताया कि यह बैठक 16 जनवरी को होनी थी, लेकिन उस दिन जाट धर्मशाला में अन्य आयोजन है। ऐसे में इसे 15 जनवरी को किया गया है।
सीटू कार्यकर्ताओं ने किया प्रदर्शन
कृषि कानून, चार लेबर कोड्स, निजीकरण, बिजली संसोधन बिल 2020 के विरोध में सीटू के विभिन्न संगठनों व कर्मचारी संगठनों ने प्रदर्शन किया। जिला प्रधान सतबीर खरल व राज्य प्रधान सुरेखा ने कहा कि निजीकरण को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने श्रमिकों के अधिकारों पर भी कुठाराघात किया है।
करसोला गांव से किसान व महिलाओं ने दिल्ली के लिए किया कूच
कृषि कानूनों को रद्द कराने की मांग को लेकर दिल्ली बॉर्डर पर आंदोलन कर रहे किसानों का साथ देने के लिए और 26 जनवरी की परेड में हिस्सा लेने के लिए करसोला गांव से किसान व महिलाएं ट्रैक्टर-ट्रॉली में दिल्ली के लिए रवाना हुए। इस दौरान महिलाओं ने हरियाणवी गीत गाए। सरपंच राजपाल लाठर ने कहा कि गांव में सभा कर एक मत से सभी ने किसान आंदोलन का समर्थन किया और आंदोलन कर रहे किसानों का साथ देने के लिए महिलाओं के साथ दिल्ली सीमा के लिए रवाना हुए। इस मौके पर पूर्व सैनिक नरेंद्र लाठर, पवन लाठर, राजेश, सतीश, विजय, अजमेर, राकेश, महिलाओं में भतेरी, कमलेश,बिमला, शीला, कृष्णा, पताशो, ओमपति आदि मौजूद रहे।

करसोला गांव में हरियाणवी गीत गाकर महिलाओं और किसानों को दिल्ली सीमा के लिए रवाना करतीं महिलाएं। - फोटो : Jind

खटकड़ टोल पर सरकार का पुतला फूंकते किसान। संवाद।- फोटो : Jind