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रंगमंच टाइम पास करने की कला नहीं, जीवन जीने की कला है : शास्त्री
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जींद। हरियाणा कला परिषद हिसार मंडल द्वारा हिंदू कन्या महाविद्यालय में चल रही 20 दिवसीय थिएटर कार्यशाला में रविवार को मुख्य अतिथि के रूप में वरिष्ठ साहित्यकार मंगतराम शास्त्री ने शिरकत की। शास्त्री ने कहा की रंगमंच टाइम पास करने की कला, जीवन जीने की कला है।
उन्होंने कहा कि रंगमंच की शुरुआत 2500 साल पहले हुई थी। थेस्पीअन पहला कलाकार था, जिसने मंच पर अभिनय किया। भरतमुनि ने नाट्य शास्त्र में नाट्य शब्द का प्रयोग केवल नाटक के रूप में नहीं करके व्यापक अर्थ में किया है। इसके अंतर्गत रंगमंच, अभिनय, नृत्य, संगीत, रस, वेशभूषा, रंग शिल्प व दर्शक के रूप में इसका प्रयोग किया जा सकता है। आज के दौर में जहां युवा बहुत दबाव में हैं, उसके लिए बहुत जरूरी है। ऐसी कार्यशाला के माध्यम से युवाओं में आत्म विश्वास व बोलने की क्षमता का विकास होता है। इसमें युवा खुद को जानेंगे और समझेंगे। युवाओं के अंदर से हीन भाव को दूर किया जाएगा। कार्यशाला निदेशक रंगकर्मी रमेश कुमार ने कहा रंगमंच का विकास भारतीय परिवेश में बड़ा ही रोचक है। उन्होंने कहा कि जिस संदेश को हम शब्दों के माध्य से लोगों तक नहीं पहुंचा सकते, उन्हें हम दृश्यों के माध्यम से सरलता पूर्वक पहुंचा पाते हैं। डॉ. क्यूटी व आरती ने कहा कि विद्यार्थी कार्यशाला से बहुत कुछ सीखेंगे तथा पढ़ाई में भी एकाग्रता का विकास होगा।
फोटो कैप्शन
22जेएनडी13 : कार्यशाला में अभ्यास करती छात्राएं। संवाद।
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उन्होंने कहा कि रंगमंच की शुरुआत 2500 साल पहले हुई थी। थेस्पीअन पहला कलाकार था, जिसने मंच पर अभिनय किया। भरतमुनि ने नाट्य शास्त्र में नाट्य शब्द का प्रयोग केवल नाटक के रूप में नहीं करके व्यापक अर्थ में किया है। इसके अंतर्गत रंगमंच, अभिनय, नृत्य, संगीत, रस, वेशभूषा, रंग शिल्प व दर्शक के रूप में इसका प्रयोग किया जा सकता है। आज के दौर में जहां युवा बहुत दबाव में हैं, उसके लिए बहुत जरूरी है। ऐसी कार्यशाला के माध्यम से युवाओं में आत्म विश्वास व बोलने की क्षमता का विकास होता है। इसमें युवा खुद को जानेंगे और समझेंगे। युवाओं के अंदर से हीन भाव को दूर किया जाएगा। कार्यशाला निदेशक रंगकर्मी रमेश कुमार ने कहा रंगमंच का विकास भारतीय परिवेश में बड़ा ही रोचक है। उन्होंने कहा कि जिस संदेश को हम शब्दों के माध्य से लोगों तक नहीं पहुंचा सकते, उन्हें हम दृश्यों के माध्यम से सरलता पूर्वक पहुंचा पाते हैं। डॉ. क्यूटी व आरती ने कहा कि विद्यार्थी कार्यशाला से बहुत कुछ सीखेंगे तथा पढ़ाई में भी एकाग्रता का विकास होगा।
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22जेएनडी13 : कार्यशाला में अभ्यास करती छात्राएं। संवाद।