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Jind News: जिले में काला पीलिया के प्रतिदिन मिल रहे तीन मरीज
Wed, 18 Dec 2024 11:36 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Wed, 18 Dec 2024 11:36 PM IST
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18जेएनडी01-नागरिक अस्पताल में दवा लेने आए मरीज। संवाद
जींद। जिले में हेपेटाइटिस बी और सी (काला पीलिया) बीमारी तेजी से बढ़ रही है। नागरिक अस्पताल में हुई जांच रिपोर्ट में रोजाना तीन नए मरीज आ रहे हैं। गत एक वर्ष की बात करें तो जिले में 1154 लोग काला पीलिया की चपेट में आ चुके हैं। इनमें से 792 मरीजों ने नागरिक अस्पताल से उपचार लिया है। इनमें महिलाओं से अधिक पुरुष मरीज हैं।
चिकित्सकों का मानना है कि पुरुषों के काली पीलिया की चपेट में आने की अधिक वजह शराब और धूम्रपान करने से लिवर खराब होना है। हेपिटाइटिस बी और सी के कारण काला पीलिया का रोग बढ़ता है, जो लिवर के लिए अधिक घातक होता है। नागरिक अस्पताल में जनवरी से मई तक हेपेटाइटिस सी के 484 मरीज आए। इनमें से 338 मरीजों ने उपचार लिया। जून से अब तक 422 मरीज आ चुके हैं। उनमें से 248 मरीज उपचार ले रहे हैं। इसके अलावा हेपेटाइटिस बी के जनवरी से मई 130 और जून से दिसंबर तक 118 लोग पीड़ित मिले हैं। इनमें से 106 मरीजों का नागरिक अस्पताल में उपचार चल रहा है। हेपेटाइटिस चार प्रकार का होता है। हेपेटाइटिस ए और ई पीलिया खतरनाक नहीं है। साफ पानी और स्वच्छ खाना न खाने के कारण यह होता है।
आमतौर पर बारिश के मौसम में यह बीमारी फैलती है। इसमें आंखें पीली हो जाती है, जिससे पता चलता है कि मरीज को पीलिया है और दवा लेने के बाद ठीक हो जाता है। वहीं, हेपेटाइटिस बी और सी (काला पीलिया) है। यदि समय पर इसका उपचार न किया जाए तो मरीज की मौत भी सकती है। समय पर उपचार मिलने से तीन से छह महीने तक इसका उपचार चलता है और मरीज ठीक हो जाता है।
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नरवाना, सफीदों के अस्पतालों में भी शुरू हुआ उपचार
जिले के नागरिक अस्पताल के अलावा उपमंडल स्तर पर नरवाना और सफीदों के नागरिक अस्पताल में भी दो माह से काला पीलिया का टेस्ट और उपचार शुरू हो गया है। इसका टेस्ट और दवाइयां काफी महंगी हैं, लेकिन नागरिक अस्पताल में इसका टेस्ट निशुल्क होने के साथ दवाइयां भी फ्री मिलती हैं। वैसे तो हर रोज मरीजों की जांच की जाती है, लेकिन मंगलवार और वीरवार को विशेष ओपीडी होती है। नरवाना और सफीदों में भी काला पीलिया के टेस्ट व उपचार होने से मरीजों का काफी राहत मिली है, क्योंकि नरवाना और सफीदों के मरीजों को 50 किलोमीटर दूर से जिले के नागरिक अस्पताल में आना पड़ता था, लेकिन उनकी यह समस्या अब खत्म हो गई है।
यह हैं लक्षण और बचाव
हेपेटाइटिस बी अत्यधिक संक्रामक रोग है। यह संक्रमित रक्त और कुछ अन्य शारीरिक तरल पदार्थ के संपर्क के माध्यम से फैलता है। इसके अलावा बीमार के साथ शारीरिक संबंध बनाने से सबसे जल्दी फैलता है। हेपेटाइटिस बी का वायरस लार में पाया जा सकता है, लेकिन यह एक ही बर्तन में खाना खाने से नहीं फैलता है। यह छींकने, खांसने या स्तनपान से भी नहीं फैलता है। इसका वायरस शरीर के बाहर सात दिनों तक जीवित रह सकता है। पेट के ऊपरी हिस्से में दर्द, भूख कम लगना, बुखार आना, त्वचा और आंखों का पीला होना, मूत्र का रंग गहरा पीला हो जाना, ज्यादा थकान, उल्टी आना मुख्य लक्षण हैं।
हेपेटाइटिस से बचाव के लिए टूथ ब्रश किसी से शेयर न करें। टैटू बनवाते समय उपकरणों को सैनिटाइज कराएं। यदि ऐसे लक्षण दिखाई दे तो चिकित्सक को दिखाकर इलाज करवाएं।
हेपेटाइटिस बी खतरनाक संक्रमण है। यदि जांच में इसके लक्षण पाए जाते हैं तो इसका उपचार करवाएं। नागरिक अस्पताल में जांच और उपचार निशुल्क है। -डॉ. विनीता, फिजिशियन, नागरिक अस्पताल, जींद।
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चिकित्सकों का मानना है कि पुरुषों के काली पीलिया की चपेट में आने की अधिक वजह शराब और धूम्रपान करने से लिवर खराब होना है। हेपिटाइटिस बी और सी के कारण काला पीलिया का रोग बढ़ता है, जो लिवर के लिए अधिक घातक होता है। नागरिक अस्पताल में जनवरी से मई तक हेपेटाइटिस सी के 484 मरीज आए। इनमें से 338 मरीजों ने उपचार लिया। जून से अब तक 422 मरीज आ चुके हैं। उनमें से 248 मरीज उपचार ले रहे हैं। इसके अलावा हेपेटाइटिस बी के जनवरी से मई 130 और जून से दिसंबर तक 118 लोग पीड़ित मिले हैं। इनमें से 106 मरीजों का नागरिक अस्पताल में उपचार चल रहा है। हेपेटाइटिस चार प्रकार का होता है। हेपेटाइटिस ए और ई पीलिया खतरनाक नहीं है। साफ पानी और स्वच्छ खाना न खाने के कारण यह होता है।
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आमतौर पर बारिश के मौसम में यह बीमारी फैलती है। इसमें आंखें पीली हो जाती है, जिससे पता चलता है कि मरीज को पीलिया है और दवा लेने के बाद ठीक हो जाता है। वहीं, हेपेटाइटिस बी और सी (काला पीलिया) है। यदि समय पर इसका उपचार न किया जाए तो मरीज की मौत भी सकती है। समय पर उपचार मिलने से तीन से छह महीने तक इसका उपचार चलता है और मरीज ठीक हो जाता है।
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नरवाना, सफीदों के अस्पतालों में भी शुरू हुआ उपचार
जिले के नागरिक अस्पताल के अलावा उपमंडल स्तर पर नरवाना और सफीदों के नागरिक अस्पताल में भी दो माह से काला पीलिया का टेस्ट और उपचार शुरू हो गया है। इसका टेस्ट और दवाइयां काफी महंगी हैं, लेकिन नागरिक अस्पताल में इसका टेस्ट निशुल्क होने के साथ दवाइयां भी फ्री मिलती हैं। वैसे तो हर रोज मरीजों की जांच की जाती है, लेकिन मंगलवार और वीरवार को विशेष ओपीडी होती है। नरवाना और सफीदों में भी काला पीलिया के टेस्ट व उपचार होने से मरीजों का काफी राहत मिली है, क्योंकि नरवाना और सफीदों के मरीजों को 50 किलोमीटर दूर से जिले के नागरिक अस्पताल में आना पड़ता था, लेकिन उनकी यह समस्या अब खत्म हो गई है।
यह हैं लक्षण और बचाव
हेपेटाइटिस बी अत्यधिक संक्रामक रोग है। यह संक्रमित रक्त और कुछ अन्य शारीरिक तरल पदार्थ के संपर्क के माध्यम से फैलता है। इसके अलावा बीमार के साथ शारीरिक संबंध बनाने से सबसे जल्दी फैलता है। हेपेटाइटिस बी का वायरस लार में पाया जा सकता है, लेकिन यह एक ही बर्तन में खाना खाने से नहीं फैलता है। यह छींकने, खांसने या स्तनपान से भी नहीं फैलता है। इसका वायरस शरीर के बाहर सात दिनों तक जीवित रह सकता है। पेट के ऊपरी हिस्से में दर्द, भूख कम लगना, बुखार आना, त्वचा और आंखों का पीला होना, मूत्र का रंग गहरा पीला हो जाना, ज्यादा थकान, उल्टी आना मुख्य लक्षण हैं।
हेपेटाइटिस से बचाव के लिए टूथ ब्रश किसी से शेयर न करें। टैटू बनवाते समय उपकरणों को सैनिटाइज कराएं। यदि ऐसे लक्षण दिखाई दे तो चिकित्सक को दिखाकर इलाज करवाएं।
हेपेटाइटिस बी खतरनाक संक्रमण है। यदि जांच में इसके लक्षण पाए जाते हैं तो इसका उपचार करवाएं। नागरिक अस्पताल में जांच और उपचार निशुल्क है। -डॉ. विनीता, फिजिशियन, नागरिक अस्पताल, जींद।

18जेएनडी01-नागरिक अस्पताल में दवा लेने आए मरीज। संवाद