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Jind News: वुशु स्टेट चैंपियनशिप में तीन भाइयों ने जीते मेडल
Fri, 25 Jul 2025 12:20 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Fri, 25 Jul 2025 12:20 AM IST
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24जेएनडी17-शहीद राममेहर वुशु खेल नर्सरी की टीम। स्रोत कोच
उचाना। भौंगरा गांव के तीन भाइयों ने रोहतक में 22 से 24 जुलाई को हुई वुशु स्टेट चैंपियनशिप में अपना दम दिखाया है। लक्ष्य ने गोल्ड मेडल, आरयन ने सिल्वर मेडल और अनुज ने ब्रांज मेडल जीतकर अपने क्षेत्र का नाम रोशन किया है। लक्ष्य के पिता जगबीर फौजी और आरयन व अनुज के पिता रणधीर फौजी दोनों भाई हैं।
लक्ष्य इससे पहले अंबाला में हुई वुशु स्टेट चैंपियनशिप में भी ब्रांज मेडल अपने नाम कर चुका है। लक्ष्य का देश के लिए गोल्ड लाने का सपना है। इसके लिए वे दिन-रात मेहनत कर रहा है।
लक्ष्य पिछले डेढ़ साल से शहीद राममेहर वुशु खेल नर्सरी में अपनी प्रैक्टिस कर रहा है। वहां वूशु कोच बिट्टू एनआईएस सुबह-शाम मेहनत करवाते हैं। पूरे जींद जिला में वुशु के बिट्टू समेत केवल दो ही कोच हैं। लक्ष्य ने इस जीत का श्रेय अपने कोच बिट्टू व अपने स्कूल अध्यापकों को दिया है।
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उन्होंने कहा कि इस मेहनत के लिए उनके माता पिता अक्सर उन्हें प्रेरित करते रहते हैं। अगर उन्हें खेल नर्सरी में और भी सुविधा मिलती है तो उनके साथ गांव के और भी बच्चे प्रैक्टिस कर सकेंगे। अभी शहीद राममेहर वुशु खेल नर्सरी में 50 के करीब बच्चे सुबह-शाम अभ्यास करते हैं। उन्हें वुशु के लिए पेड़ पर बंधे पंचिंग बैग से प्रैक्टिस करनी पड़ती है।
कोच बिट्टू ने बताया कि लक्ष्य और उसके भाइयों ने मेडल जीतकर बांगर क्षेत्र का नाम रोशन किया गया है। कोच ने बताया कि नर्सरी में सुविधाओं का अभाव है। बच्चों के लिए अभी 32 रेसलिंग मैट की आवश्यकता है। खेलने के लिए काफी सामान की जरूरत है। उनका मानना है कि अगर खेल नर्सरी में पूरी सुविधाएं बच्चों को मिलती हैं तो ग्रामीण क्षेत्रों में लगातार मेडलों की बारिश होगी और कई प्रतिभाएं उभर कर सामने आएंगी।
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लक्ष्य इससे पहले अंबाला में हुई वुशु स्टेट चैंपियनशिप में भी ब्रांज मेडल अपने नाम कर चुका है। लक्ष्य का देश के लिए गोल्ड लाने का सपना है। इसके लिए वे दिन-रात मेहनत कर रहा है।
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लक्ष्य पिछले डेढ़ साल से शहीद राममेहर वुशु खेल नर्सरी में अपनी प्रैक्टिस कर रहा है। वहां वूशु कोच बिट्टू एनआईएस सुबह-शाम मेहनत करवाते हैं। पूरे जींद जिला में वुशु के बिट्टू समेत केवल दो ही कोच हैं। लक्ष्य ने इस जीत का श्रेय अपने कोच बिट्टू व अपने स्कूल अध्यापकों को दिया है।
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उन्होंने कहा कि इस मेहनत के लिए उनके माता पिता अक्सर उन्हें प्रेरित करते रहते हैं। अगर उन्हें खेल नर्सरी में और भी सुविधा मिलती है तो उनके साथ गांव के और भी बच्चे प्रैक्टिस कर सकेंगे। अभी शहीद राममेहर वुशु खेल नर्सरी में 50 के करीब बच्चे सुबह-शाम अभ्यास करते हैं। उन्हें वुशु के लिए पेड़ पर बंधे पंचिंग बैग से प्रैक्टिस करनी पड़ती है।
कोच बिट्टू ने बताया कि लक्ष्य और उसके भाइयों ने मेडल जीतकर बांगर क्षेत्र का नाम रोशन किया गया है। कोच ने बताया कि नर्सरी में सुविधाओं का अभाव है। बच्चों के लिए अभी 32 रेसलिंग मैट की आवश्यकता है। खेलने के लिए काफी सामान की जरूरत है। उनका मानना है कि अगर खेल नर्सरी में पूरी सुविधाएं बच्चों को मिलती हैं तो ग्रामीण क्षेत्रों में लगातार मेडलों की बारिश होगी और कई प्रतिभाएं उभर कर सामने आएंगी।

24जेएनडी17-शहीद राममेहर वुशु खेल नर्सरी की टीम। स्रोत कोच