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Jind News: हाइपोथीसिस टेस्टिंग को सूत्रों तक सीमित न रखें, शोध में तार्किक समझ जरूरी
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22जेएनडी26: सीआरएसयू में आयोजित एक्सटेंशन लेक्चरर में शामिल हुए विद्यार्थी व स्टॉफ। स्रोत: सीआर
जींद। चौधरी रणबीर सिंह विश्वविद्यालय के मनोविज्ञान विभाग की ओर से विद्यार्थियों में शोध अभिरुचि और सांख्यिकीय समझ विकसित करने के लिए हाइपोथीसिस टेस्टिंग विषय पर एक्सटेंशन लेक्चर आयोजित किया गया। इसमें पीटी बीडी शर्मा यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज, रोहतक के प्रो. हितेश खुराना ने विशेषज्ञ वक्ता के रूप में विद्यार्थियों को शोध में परिकल्पना परीक्षण की उपयोगिता समझाई।
व्याख्यान में प्रो. खुराना ने शून्य परिकल्पना, वैकल्पिक परिकल्पना, स्तर-ए-महत्त्व, पी-वैल्यू, क्रिटिकल वैल्यू तथा टाइप-1 और टाइप-2 एरर जैसी अवधारणाओं को उदाहरणों के माध्यम से समझाया।
उन्होंने बताया कि शोध समस्या के आधार पर परिकल्पना तैयार करने के बाद प्राप्त आंकड़ों का उपयुक्त सांख्यिकीय परीक्षण करना जरूरी है। केवल आंकड़ों के आधार पर निष्कर्ष निकालने के बजाय शोध की प्रकृति, नमूना, प्रयुक्त परीक्षण और स्तर-ए-महत्त्व को भी ध्यान में रखना चाहिए।
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विभाग प्रभारी डॉ. अलका सेठ ने विशेषज्ञ का स्वागत करते हुए कहा कि मनोविज्ञान शोध आधारित विषय है। ऐसे में विद्यार्थियों के लिए शोध पद्धति और सांख्यिकीय तकनीकों की समझ बेहद आवश्यक है। विशेषज्ञों के साथ अकादमिक संवाद से विद्यार्थियों को कक्षा में सीखे सिद्धांतों को वास्तविक शोध परिस्थितियों से जोड़ने का अवसर मिलता है।
विभाग की चेयरपर्सन डॉ. जसवीर सुरा ने कहा कि विद्यार्थियों के शैक्षणिक विकास के साथ उनमें शोध क्षमता विकसित करना भी जरूरी है। ऐसे व्याख्यान विद्यार्थियों को विषय की गहन समझ देने के साथ नवीन शोध प्रक्रियाओं से परिचित कराते हैं। व्याख्यान के दौरान विद्यार्थियों ने सांख्यिकीय विश्लेषण और हाइपोथीसिस टेस्टिंग से जुड़े सवाल पूछे।
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व्याख्यान में प्रो. खुराना ने शून्य परिकल्पना, वैकल्पिक परिकल्पना, स्तर-ए-महत्त्व, पी-वैल्यू, क्रिटिकल वैल्यू तथा टाइप-1 और टाइप-2 एरर जैसी अवधारणाओं को उदाहरणों के माध्यम से समझाया।
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उन्होंने बताया कि शोध समस्या के आधार पर परिकल्पना तैयार करने के बाद प्राप्त आंकड़ों का उपयुक्त सांख्यिकीय परीक्षण करना जरूरी है। केवल आंकड़ों के आधार पर निष्कर्ष निकालने के बजाय शोध की प्रकृति, नमूना, प्रयुक्त परीक्षण और स्तर-ए-महत्त्व को भी ध्यान में रखना चाहिए।
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विभाग प्रभारी डॉ. अलका सेठ ने विशेषज्ञ का स्वागत करते हुए कहा कि मनोविज्ञान शोध आधारित विषय है। ऐसे में विद्यार्थियों के लिए शोध पद्धति और सांख्यिकीय तकनीकों की समझ बेहद आवश्यक है। विशेषज्ञों के साथ अकादमिक संवाद से विद्यार्थियों को कक्षा में सीखे सिद्धांतों को वास्तविक शोध परिस्थितियों से जोड़ने का अवसर मिलता है।
विभाग की चेयरपर्सन डॉ. जसवीर सुरा ने कहा कि विद्यार्थियों के शैक्षणिक विकास के साथ उनमें शोध क्षमता विकसित करना भी जरूरी है। ऐसे व्याख्यान विद्यार्थियों को विषय की गहन समझ देने के साथ नवीन शोध प्रक्रियाओं से परिचित कराते हैं। व्याख्यान के दौरान विद्यार्थियों ने सांख्यिकीय विश्लेषण और हाइपोथीसिस टेस्टिंग से जुड़े सवाल पूछे।