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Jind News: फसल अवशेष प्रबंधन को लेकर किसानों को किया जागरूक

Wed, 23 Sep 2026 12:35 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Wed, 23 Sep 2026 12:35 AM IST
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Farmers were made aware about crop residue management.
जींद। चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के कृषि विज्ञान केंद्र, जींद की ओर से गांव रधाना में फसल अवशेष प्रबंधन को लेकर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें 100 से अधिक किसानों ने भाग लिया। कार्यक्रम में किसानों को फसल अवशेष जलाने से होने वाले नुकसान और खेत में ही इसके उचित प्रबंधन से होने वाले लाभों की जानकारी दी गई।
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कार्यक्रम के नोडल अधिकारी इंजीनियर रवि ने किसानों को बताया कि खेत में फसल अवशेष जलाने से पर्यावरण प्रदूषण बढ़ता है। आग लगाने से मिट्टी में मौजूद सूक्ष्म जीव भी नष्ट हो जाते हैं, जिसका सीधा असर मिट्टी की गुणवत्ता और उसकी उर्वरता पर पड़ता है।
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उन्होंने कहा कि विभिन्न तकनीकों के माध्यम से फसल अवशेष और पराली का खेत में ही प्रबंधन कर उसे खाद में बदला जा सकता है। इससे मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़ने के साथ फसल उत्पादन में भी सुधार होता है।
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उन्होंने किसानों के साथ फसल अवशेष प्रबंधन में उपयोग होने वाली विभिन्न मशीनों की जानकारी साझा की। साथ ही इन तकनीकों के उपयोग और उनसे मिलने वाले लाभों के बारे में विस्तार से बताया।
किसानों को समझाया गया कि पराली को जलाने के बजाय खेत में मिलाने से जैविक पदार्थ की मात्रा बढ़ती है और मिट्टी की संरचना में सुधार होता है। इस अवसर पर प्रगतिशील किसान दिनेश, सुनील सहित अन्य किसान मौजूद रहे। किसानों ने फसल अवशेष प्रबंधन की तकनीकों और मशीनों से संबंधित जानकारी प्राप्त की तथा पराली प्रबंधन को लेकर अपने सवाल भी अधिकारियों के सामने रखे।


पराली मिट्टी में मिलाने से बढ़ता है जैविक कार्बन
इंजीनियर रवि ने बताया कि फसल अवशेष जलाने से मिट्टी को कई तरह के नुकसान होते हैं। इसके विपरीत फसल अवशेषों को खेत में मिलाने से मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़ती है और जैविक कार्बन की मात्रा में भी वृद्धि होती है। इससे लंबे समय में मिट्टी की गुणवत्ता बेहतर बनी रहती है और किसानों को टिकाऊ खेती में लाभ मिलता है।
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