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Jind News: फलों की खेती से प्रति एकड ड़ेढ लाख कमा रहे तीन भाई
Mon, 06 Feb 2023 01:19 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Mon, 06 Feb 2023 01:19 AM IST
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जींद। परंपरागत खेती में बचत कम देख डाहौला निवासी तीन भाई सोनू, मोनू व अशोक ने तरबूज, खरबूजा और खीरे की खेती शुरू की। आधुनिक तकनीकों को अपनाया। मेहनत के दम पर आज तीनों भाई प्रति एकड़ डेढ़ लाख रुपये की कमाई कर रहे हैं।
दरअसल यह लोग पहले मौसम के हिसाब से पहले गेहूं, धान, आदि फसलों की परंपरागत खेती करते थे लेकिन मुनाफा काफी कम हो रहा था। इसके बाद तीन साल पहले उन्होंने फलों की खेती की थी। धीरे-धीरे बचत होने लगी और उन्होंने अन्य युवाओं को भी परंपरागत खेती को छोड़कर बागवानी फलों और अन्य जैविक खेती के लिए प्रेरित करना शुरू कर दिया। सोनू, मोनू व अशोक ने बताया कि वे इस समय दो एकड़ में तरबूज, दो एकड़ में खरबूजा और एक एकड़ में खीरे की खेती कर रहे हैं। तरबूज और खरबूजे को पठानकोट, अमृतसर और जालंधर में सप्लाई कर रहे हैं। खीरा खनौरी, पातड़ा व जींद की मंडी में भेजा जाता है। उनका प्रति एकड़ एक लाख रुपये खर्च हो रहा है। बचत करीब डेढ़ लाख रुपये प्रति एकड़ हो जाती है। तीन भाइयों का कहना है कि उसने जैविक खेती के लिए बागवानी विभाग से संपर्क किया था। वहां से सरकारी योजनाओं से टिप्स मिले। इसके बाद उसकी जिंदगी में बदलाव आया। इससे पहले सोनू गेहूं, चावल की खेती करता था, जिसमें उसे घर का खर्च निकालना मुश्किल हो जाता था। इसके बाद सोनू ने बागवानी की ओर रुख किया। सोनू का कहना है कि आज युवा जैविक खेती भी आय का अच्छा साधन है। जैविक खेती के माध्यम से एक ओर जहां जमीन की उपजाऊ शक्ति बनी रहती है, वहीं आय भी अच्छी होती है। ऐसे में युवाओं को जैविक खेती की ओर रुख करना चाहिए।
बॉक्स
वर्जन
जैविक खेती के लिए बागवानी विभाग द्वारा सब्सिडी दी जाती है। किसानों को चाहिए कि वह विभाग द्वारा दी जा रही सब्सिडी का फायदा उठाएं और अपनी आमदनी में बढ़ोतरी करें। जींद में काफी युवा जैविक खेती कर अच्छी कमाई कर रहे हैं। ऐसे में युवा जैविक खेती अपनाकर अपने क्षेत्र में आय का अच्छा स्त्रोत पैदा कर सकते हैं। इससे अन्य लोगों को भी रोजगार मिलता है।
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-डॉ. असीम जांगड़ा, सलाहकार, बागवानी विभाग
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दरअसल यह लोग पहले मौसम के हिसाब से पहले गेहूं, धान, आदि फसलों की परंपरागत खेती करते थे लेकिन मुनाफा काफी कम हो रहा था। इसके बाद तीन साल पहले उन्होंने फलों की खेती की थी। धीरे-धीरे बचत होने लगी और उन्होंने अन्य युवाओं को भी परंपरागत खेती को छोड़कर बागवानी फलों और अन्य जैविक खेती के लिए प्रेरित करना शुरू कर दिया। सोनू, मोनू व अशोक ने बताया कि वे इस समय दो एकड़ में तरबूज, दो एकड़ में खरबूजा और एक एकड़ में खीरे की खेती कर रहे हैं। तरबूज और खरबूजे को पठानकोट, अमृतसर और जालंधर में सप्लाई कर रहे हैं। खीरा खनौरी, पातड़ा व जींद की मंडी में भेजा जाता है। उनका प्रति एकड़ एक लाख रुपये खर्च हो रहा है। बचत करीब डेढ़ लाख रुपये प्रति एकड़ हो जाती है। तीन भाइयों का कहना है कि उसने जैविक खेती के लिए बागवानी विभाग से संपर्क किया था। वहां से सरकारी योजनाओं से टिप्स मिले। इसके बाद उसकी जिंदगी में बदलाव आया। इससे पहले सोनू गेहूं, चावल की खेती करता था, जिसमें उसे घर का खर्च निकालना मुश्किल हो जाता था। इसके बाद सोनू ने बागवानी की ओर रुख किया। सोनू का कहना है कि आज युवा जैविक खेती भी आय का अच्छा साधन है। जैविक खेती के माध्यम से एक ओर जहां जमीन की उपजाऊ शक्ति बनी रहती है, वहीं आय भी अच्छी होती है। ऐसे में युवाओं को जैविक खेती की ओर रुख करना चाहिए।
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जैविक खेती के लिए बागवानी विभाग द्वारा सब्सिडी दी जाती है। किसानों को चाहिए कि वह विभाग द्वारा दी जा रही सब्सिडी का फायदा उठाएं और अपनी आमदनी में बढ़ोतरी करें। जींद में काफी युवा जैविक खेती कर अच्छी कमाई कर रहे हैं। ऐसे में युवा जैविक खेती अपनाकर अपने क्षेत्र में आय का अच्छा स्त्रोत पैदा कर सकते हैं। इससे अन्य लोगों को भी रोजगार मिलता है।
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-डॉ. असीम जांगड़ा, सलाहकार, बागवानी विभाग