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सरकारी स्कूलों में छात्र संख्या बढ़ाने वालों को किया सम्मानित
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राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में आयोजित कार्यक्रम में शिक्षकों को सम्मानित करते एसडी?
- फोटो : Jind
गुरु-शिष्य की परंपरा देश की संस्कृति में पवित्र रिश्ता है। एक शिक्षक ही देश व समाज का शिल्पकार होता है। वह विद्यार्थियों के चरित्र, क्षमता और भविष्य को आकार देता है। शिक्षक समाज के पथ प्रदर्शक हैं तथा शिक्षा एवं संस्कार देने के साथ ही विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका है। यह विचार रविवार को शिक्षक दिवस पर राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में आयोजित सम्मान समारोह में कही एसडीएम दलबीर सिंह ने कही।
उन्होंने छात्र संख्या बढ़ाने में उत्कृष्ट कार्य करने वाले 18 सरकारी स्कूलों के मुखिया, 38 सीआरसी, एबीआरसी, बीआरपी और एसआईएम को सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि शिक्षक देश का भविष्य निर्माता है। कोरोना काल में शिक्षकों और बाकी स्टाफ ने सरकारी स्कूलों में छात्र संख्या बढ़ाने में सराहनीय कार्य किया। इसके लिए वह बधाई के पात्र हैं। निजी स्कूलों की तुलना में सरकारी स्कूलों में उच्च शिक्षित और ज्यादा प्रशिक्षित शिक्षक हैं। वहीं सुविधाओं के मामले में भी सरकारी स्कूल बेहतर हैं। इसलिए अभिभावक अपने बच्चों का सरकारी स्कूलों में दाखिला कराएं। प्रदेश सरकार शिक्षा की बेहतरी के लिए काम कर रही है।
एसडीएम ने कहा कि वास्तव मे गुरु का स्थान माता-पिता व भगवान से भी ऊपर है। हमें जन्म माता-पिता से मिलता है। लेकिन जीवन जीने व कामयाब बनने की शिक्षा सिर्फ गुरु देता है। शिक्षक सिर्फ वही नहीं होता जो हमें स्कूली शिक्षा देता है, बल्कि वह भी है जो हमें जीवन जीने की कला सिखाता है। शिक्षक छात्रों को जीने की राह दिखाता है। उन्होंने बताया कि समाज के शिल्पकार कहे जाने वाले शिक्षकों का महत्व कभी समाप्त नहीं होता, क्योंकि वह न सिर्फ विद्यार्थी को सही मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करता है, बल्कि उसके सफल जीवन की नींव भी उन्हीं के हाथों रखी जाती है।
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एसडीएम ने कहा कि शिक्षक का एक व्यक्ति, समाज और और देश के निर्माण में बहुत बड़ा योगदान होता है। उसका प्रभाव व्यक्तित्व निर्माण पर होने से शिक्षक समाज के हर पहलू को प्रभावित करने की क्षमता रखता है। लेकिन शिक्षक सिर्फ स्कूल या कॉलेज में ही नहीं होते, अपितु जिनसे भी कुछ सीखने को मिलता है, वह सभी हमारे शिक्षक होते हैं। जिला शिक्षा अधिकारी मदन चोपड़ा ने कहा कि सभी स्कूलों ने छात्र संख्या बढ़ाने में अच्छा काम किया है। मुख्यालय की गाइडलाइन के अनुसार 18 स्कूलों के मुखिया और अन्य स्टाफ को सम्मानित किया गया। इस मौके पर जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी सदानंद वत्स, डिप्टी डीईईओ बलजीत पूनिया भी मौजूद रहे।
जिनका नाम लिस्ट में नहीं वह शिक्षक निराश न हों : डीईओ
कार्यक्रम से पहले सीआरसी, एबीआरसी, बीआरपी और एसआईएम को सम्मानित किए जाने को लेकर शिक्षकों में काफी कानाफूसी होती रही। कुछ शिक्षकों का कहना था कि ऐसे सीआरसी, एबीआरसी, बीआरपी और एसआईएम को सम्मानित किया जा रहा है, जिनका हाल ही में तबादला हुआ है और उनका नाम लिस्ट में डाल दिया गया है। जबकि छात्र संख्या बढ़ाने के लिए अन्य शिक्षकों ने काफी मेहनत की है। जिला शिक्षा अधिकारी मदन सिंह ने कहा कि हर स्कूल में छात्र संख्या बढ़ी है, किसी में कम तो किसी में ज्यादा। शिक्षा विभाग द्वारा जारी गाइडलाइन के अनुसार लिस्ट तैयार की गई है, जिस कारण कुछ शिक्षकों का नाम लिस्ट में नहीं आ पाया। शिक्षक दिवस पर आयोजित सम्मान समारोह सभी शिक्षकों को समर्पित है। जिन्होंने छात्र संख्या बढ़ाए जाने को लेकर मेहनत की है।
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उन्होंने छात्र संख्या बढ़ाने में उत्कृष्ट कार्य करने वाले 18 सरकारी स्कूलों के मुखिया, 38 सीआरसी, एबीआरसी, बीआरपी और एसआईएम को सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि शिक्षक देश का भविष्य निर्माता है। कोरोना काल में शिक्षकों और बाकी स्टाफ ने सरकारी स्कूलों में छात्र संख्या बढ़ाने में सराहनीय कार्य किया। इसके लिए वह बधाई के पात्र हैं। निजी स्कूलों की तुलना में सरकारी स्कूलों में उच्च शिक्षित और ज्यादा प्रशिक्षित शिक्षक हैं। वहीं सुविधाओं के मामले में भी सरकारी स्कूल बेहतर हैं। इसलिए अभिभावक अपने बच्चों का सरकारी स्कूलों में दाखिला कराएं। प्रदेश सरकार शिक्षा की बेहतरी के लिए काम कर रही है।
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एसडीएम ने कहा कि वास्तव मे गुरु का स्थान माता-पिता व भगवान से भी ऊपर है। हमें जन्म माता-पिता से मिलता है। लेकिन जीवन जीने व कामयाब बनने की शिक्षा सिर्फ गुरु देता है। शिक्षक सिर्फ वही नहीं होता जो हमें स्कूली शिक्षा देता है, बल्कि वह भी है जो हमें जीवन जीने की कला सिखाता है। शिक्षक छात्रों को जीने की राह दिखाता है। उन्होंने बताया कि समाज के शिल्पकार कहे जाने वाले शिक्षकों का महत्व कभी समाप्त नहीं होता, क्योंकि वह न सिर्फ विद्यार्थी को सही मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करता है, बल्कि उसके सफल जीवन की नींव भी उन्हीं के हाथों रखी जाती है।
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एसडीएम ने कहा कि शिक्षक का एक व्यक्ति, समाज और और देश के निर्माण में बहुत बड़ा योगदान होता है। उसका प्रभाव व्यक्तित्व निर्माण पर होने से शिक्षक समाज के हर पहलू को प्रभावित करने की क्षमता रखता है। लेकिन शिक्षक सिर्फ स्कूल या कॉलेज में ही नहीं होते, अपितु जिनसे भी कुछ सीखने को मिलता है, वह सभी हमारे शिक्षक होते हैं। जिला शिक्षा अधिकारी मदन चोपड़ा ने कहा कि सभी स्कूलों ने छात्र संख्या बढ़ाने में अच्छा काम किया है। मुख्यालय की गाइडलाइन के अनुसार 18 स्कूलों के मुखिया और अन्य स्टाफ को सम्मानित किया गया। इस मौके पर जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी सदानंद वत्स, डिप्टी डीईईओ बलजीत पूनिया भी मौजूद रहे।
जिनका नाम लिस्ट में नहीं वह शिक्षक निराश न हों : डीईओ
कार्यक्रम से पहले सीआरसी, एबीआरसी, बीआरपी और एसआईएम को सम्मानित किए जाने को लेकर शिक्षकों में काफी कानाफूसी होती रही। कुछ शिक्षकों का कहना था कि ऐसे सीआरसी, एबीआरसी, बीआरपी और एसआईएम को सम्मानित किया जा रहा है, जिनका हाल ही में तबादला हुआ है और उनका नाम लिस्ट में डाल दिया गया है। जबकि छात्र संख्या बढ़ाने के लिए अन्य शिक्षकों ने काफी मेहनत की है। जिला शिक्षा अधिकारी मदन सिंह ने कहा कि हर स्कूल में छात्र संख्या बढ़ी है, किसी में कम तो किसी में ज्यादा। शिक्षा विभाग द्वारा जारी गाइडलाइन के अनुसार लिस्ट तैयार की गई है, जिस कारण कुछ शिक्षकों का नाम लिस्ट में नहीं आ पाया। शिक्षक दिवस पर आयोजित सम्मान समारोह सभी शिक्षकों को समर्पित है। जिन्होंने छात्र संख्या बढ़ाए जाने को लेकर मेहनत की है।