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Jind News: इस वर्ष 40,204 परिवारों को राशन मिलना हुआ बंद, 5,941 नए कार्ड बने
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संवाद न्यूज एजेंसी
जींद। जिले में इस वर्ष राशन कार्ड धारकों पर विभाग की जमकर कैंची चली और 40,204 परिवारों को राशन मिलना बंद हो गया। विभागीय आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में केवल 5,941 नए राशन कार्ड बनाए गए। वहीं, इसी अवधि में 40,204 राशन कार्ड काट दिए गए।
जनवरी माह में जिले में कुल 2,70,187 राशन कार्ड थे, जो अब घटकर 2,29,983 रह गए हैं। यानी एक साल में करीब 40,204 कार्ड सूची से बाहर हो गए हैं। राशन कार्ड कटने की यह प्रक्रिया आमजन के लिए परेशानी का कारण बनी रही।
बड़ी संख्या में उपभोक्ता अपने कार्ड बनवाने, ठीक करवाने या कटने के कारण जानने के लिए विभागीय कार्यालयों के चक्कर काटते रहे लेकिन उन्हें स्पष्ट जवाब नहीं मिल पाया।
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विभाग की ओर से अधिकतर उपभोक्ताओं को फैमिली आईडी में इनकम ठीक करवाने की सलाह देकर क्रीड और कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) संचालकों के पास भेज दिया गया। इस वर्ष में केवल चार महीनों में नए राशन कार्ड बनाए गए जबकि आठ महीनों में लगातार कटौती होती रही।
अक्तूबर माह में सबसे अधिक 14,182 राशन कार्ड कटे। इससे उस महीने में बड़ी संख्या में परिवार सरकारी राशन से वंचित हो गए। इसके बाद अन्य महीनों में भी हजारों की संख्या में कार्ड काटे गए।
क्यों कट रहे हैं राशन कार्ड?
राशन कार्ड कटने के पीछे कई प्रमुख कारण सामने आए हैं। इनमें सबसे बड़ा कारण फैमिली आईडी में दर्ज आय (इनकम) का निर्धारित सीमा से अधिक होना बताया जा रहा है। सरकार की नीति के अनुसार जिन परिवारों की वार्षिक आय तय सीमा से अधिक पाई जाती है, उनके बीपीएल या एएवाई श्रेणी के राशन कार्ड स्वतः कट जाते हैं।
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राशन कार्ड काटने से पहले नोटिस दिया जाए
राशन कार्ड कटने वाले उपभोक्ता विजय नगर निवासी नरेश ने बताया कि राशन कार्ड काटने से पहले संबंधित परिवार को नोटिस दिया जाए और सुधार का मौका मिले। साथ ही फैमिली आईडी में इनकम व अन्य विवरण ठीक करवाने की प्रक्रिया को सरल बनाया जाए ताकि वास्तव में पात्र परिवार सरकारी राशन से वंचित न हों।
परिवार पहचान पत्र में आमदनी के अनुसार ही राशन कार्ड बनते और कटते हैं। इसमें खाद्य एवं आपूर्ति विभाग का नए कार्ड बनाने और काटने में कोई योगदान नहीं होता। यह काम क्रीड का है। जब परिवार की पीपीपी में आमदनी निर्धारित राशि एक लाख 80 हजार से ज्यादा होती है तो कार्ड अपने आप कट जाता है। -सौरव चोयल, जिला खाद्य एवं आपूर्ति अधिकारी जींद।
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जींद। जिले में इस वर्ष राशन कार्ड धारकों पर विभाग की जमकर कैंची चली और 40,204 परिवारों को राशन मिलना बंद हो गया। विभागीय आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में केवल 5,941 नए राशन कार्ड बनाए गए। वहीं, इसी अवधि में 40,204 राशन कार्ड काट दिए गए।
जनवरी माह में जिले में कुल 2,70,187 राशन कार्ड थे, जो अब घटकर 2,29,983 रह गए हैं। यानी एक साल में करीब 40,204 कार्ड सूची से बाहर हो गए हैं। राशन कार्ड कटने की यह प्रक्रिया आमजन के लिए परेशानी का कारण बनी रही।
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बड़ी संख्या में उपभोक्ता अपने कार्ड बनवाने, ठीक करवाने या कटने के कारण जानने के लिए विभागीय कार्यालयों के चक्कर काटते रहे लेकिन उन्हें स्पष्ट जवाब नहीं मिल पाया।
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विभाग की ओर से अधिकतर उपभोक्ताओं को फैमिली आईडी में इनकम ठीक करवाने की सलाह देकर क्रीड और कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) संचालकों के पास भेज दिया गया। इस वर्ष में केवल चार महीनों में नए राशन कार्ड बनाए गए जबकि आठ महीनों में लगातार कटौती होती रही।
अक्तूबर माह में सबसे अधिक 14,182 राशन कार्ड कटे। इससे उस महीने में बड़ी संख्या में परिवार सरकारी राशन से वंचित हो गए। इसके बाद अन्य महीनों में भी हजारों की संख्या में कार्ड काटे गए।
क्यों कट रहे हैं राशन कार्ड?
राशन कार्ड कटने के पीछे कई प्रमुख कारण सामने आए हैं। इनमें सबसे बड़ा कारण फैमिली आईडी में दर्ज आय (इनकम) का निर्धारित सीमा से अधिक होना बताया जा रहा है। सरकार की नीति के अनुसार जिन परिवारों की वार्षिक आय तय सीमा से अधिक पाई जाती है, उनके बीपीएल या एएवाई श्रेणी के राशन कार्ड स्वतः कट जाते हैं।
राशन कार्ड काटने से पहले नोटिस दिया जाए
राशन कार्ड कटने वाले उपभोक्ता विजय नगर निवासी नरेश ने बताया कि राशन कार्ड काटने से पहले संबंधित परिवार को नोटिस दिया जाए और सुधार का मौका मिले। साथ ही फैमिली आईडी में इनकम व अन्य विवरण ठीक करवाने की प्रक्रिया को सरल बनाया जाए ताकि वास्तव में पात्र परिवार सरकारी राशन से वंचित न हों।
परिवार पहचान पत्र में आमदनी के अनुसार ही राशन कार्ड बनते और कटते हैं। इसमें खाद्य एवं आपूर्ति विभाग का नए कार्ड बनाने और काटने में कोई योगदान नहीं होता। यह काम क्रीड का है। जब परिवार की पीपीपी में आमदनी निर्धारित राशि एक लाख 80 हजार से ज्यादा होती है तो कार्ड अपने आप कट जाता है। -सौरव चोयल, जिला खाद्य एवं आपूर्ति अधिकारी जींद।