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Jind News: हीमोफीलिया से रक्तस्राव का बना रहता है खतरा
Mon, 04 Mar 2024 12:10 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Mon, 04 Mar 2024 12:10 AM IST
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जींद। हीमोफीलिया सोसाइटी जींद एवं इंटास फाउंडेशन की भागीदारी से हीमोफीलिया रोगियों के लिए निजी होटल में शिविर का आयोजन किया गया। इसमें मुख्यातिथि के रूप में सिविल अस्पताल से हीमोफीलिया नोडल इंचार्ज डॉ. श्याम सुंदर ने शिरकत की।
डॉ. श्याम सुंदर व डॉ. राजेश कपूर ने कहा कि हीमोफीलिया में मरीज के शरीर में खून का थक्का जमाने वाले प्रोटीन की कमी के कारण ऐसे मरीजों में हर समय शरीर के भीतर और बाहर रक्तस्राव का खतरा बना रहता है। इसके कारण इनके हाथ-पैर के जोड़ में हीमोअर्थराइटिस हो जाता है। कभी कभी मरीज के पेट, गर्दन, मस्तिक, पेशाब, शौच व मसूड़ों में भी रक्तस्राव हो जाता है, जोकि बेहद गंभीर अवस्था मानी जाती है। इसकी रोकथाम के लिए विशेष भूमिका एंटी हीमोफीलिया फैक्टर की रहती है। इन खून का थक्का बनाने वाले ब्लड प्रोटीन जैसे फैक्टर 7, 8 , 9 और फीबा आदि से चिकित्सक ऐसे मरीजों के रक्तस्राव की रोकथाम करता है। मरीजों में ऐसी गंभीर स्थिति उत्पन्न नहीं हो, इसके लिए आजकल प्रोफाइलेक्सेस विधि से इलाज दिया जाता है। सप्ताह में दो से तीन बार इनको फैक्टर इंजेक्शन दिया जाता है और इनके फैक्टर के स्तर को नियंत्रित रखा जाता है।
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डॉ. श्याम सुंदर व डॉ. राजेश कपूर ने कहा कि हीमोफीलिया में मरीज के शरीर में खून का थक्का जमाने वाले प्रोटीन की कमी के कारण ऐसे मरीजों में हर समय शरीर के भीतर और बाहर रक्तस्राव का खतरा बना रहता है। इसके कारण इनके हाथ-पैर के जोड़ में हीमोअर्थराइटिस हो जाता है। कभी कभी मरीज के पेट, गर्दन, मस्तिक, पेशाब, शौच व मसूड़ों में भी रक्तस्राव हो जाता है, जोकि बेहद गंभीर अवस्था मानी जाती है। इसकी रोकथाम के लिए विशेष भूमिका एंटी हीमोफीलिया फैक्टर की रहती है। इन खून का थक्का बनाने वाले ब्लड प्रोटीन जैसे फैक्टर 7, 8 , 9 और फीबा आदि से चिकित्सक ऐसे मरीजों के रक्तस्राव की रोकथाम करता है। मरीजों में ऐसी गंभीर स्थिति उत्पन्न नहीं हो, इसके लिए आजकल प्रोफाइलेक्सेस विधि से इलाज दिया जाता है। सप्ताह में दो से तीन बार इनको फैक्टर इंजेक्शन दिया जाता है और इनके फैक्टर के स्तर को नियंत्रित रखा जाता है।
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