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ब्लैक फंगस से निपटने के लिए नागरिक अस्पातल में कोई व्यवस्था नहीं
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कोरोना के साथ ब्लैक फंगस के मामले बढ़ रहे हैं, लेकिन स्थानीय स्तर पर इससे निपटने की कोई व्यवस्था नहीं है। इसलिए ब्लैक फंगस के संदिग्धों को पीजीआई रोहतक रेफर किया जा रहा है। नागरिक अस्पताल जींद में चिकित्सक ही नहीं दवा के अलावा फंगल की जांच की व्यवस्था भी नहीं है।
एसएमओ डॉ. गोपाल गोयल ने कहा कि जिले में फिलहाल किसी भी व्यक्ति में ब्लैक फंगस की पुष्टि नहीं हुई है। यहां पर किसी भी मरीज की जांच नहीं हो सकती। उन्हें किसी मरीज में ब्लैक फंगस जैसे लक्षण मिलते हैं तो उसे पीजीआई रोहतक रेफर कर देते हैं। ऐसे दस लोगों को नागरिक अस्पताल से पीजीआई रोहतक रेफर किया गया है। नागरिक अस्पताल में ब्लैक फंगस की जांच की कोई व्यवस्था नहीं है। इसलिए जींद में किसी भी मरीज में ब्लैक फंगस की पुष्टि नहीं की जा सकती। ब्लैग फंगस पोस्ट कोविड मरीजों में मिलता है। जब मरीज कोरोना से ठीक हो जाता है तो उसके शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता बहुत कम हो जाती है। इसकी वजह से ब्लैक फंगस उस व्यक्ति को अपनी चपेट में ले लेता है। ब्लैक फंगस से व्यक्ति कहीं भी संक्रमित हो सकता है।
ब्लैक फंगस के लक्षण
कोरोना से ठीक होने के बाद व्यक्ति में ब्लैक फंगस से लक्षण देखे जा सकते हैं। इसमें मनुष्य के किसी दांत में दर्द होने के बाद चेहरे के एक तरफ सूजन आ जाती है। आधे सिर में दर्द, इसके बाद धीरे-धीरे इसका असर आंखों पर देखने को मिलता है। इसमें आंख की रोशनी भी जा सकती है। यह शरीर के एक तरफ के हिस्से में होता है। कई बार तो नाक से काले रंग का तरल पदार्थ भी बहने लगता है। शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने के बाद यह रोग हो सकता है।
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जींद में नहीं कोई सुविधा
ब्लैक फंगस की जांच के लिए पहले व्यक्ति की एमआरआई की जाती है। इसमें यह पता लगाया जाता है कि व्यक्ति के किस भाग में ब्लैक फंगस का प्रभाव है। इसके बाद उसी शरीर के हिस्से से मांस का एक टुकड़ा लेकर जांच की जाती है। इसके बाद ही ब्लैक फंगस की पुष्टि हो पाती है। इसके लिए ईएनटी सर्जन, दंत सर्जन तथा नेत्र रोग विशेषज्ञ की टीम होती है। मरीज को एंटी फंगल इंजेक्शन दिया जाता है, जो फिलहाल जींद में नहीं है। वहीं जींद में न तो ईएनटी सर्जन है और न ही नेत्र रोग विशेषज्ञ।
पिल्लूखेड़ा क्षेत्र के एक राजनेता भी चपेट में
स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों के अनुसार पिल्लूखेड़ा क्षेत्र के एक राजनेता भी ब्लैक फंगस की चपेट में आए हैं। वे कुछ दिन पहले ही कोरोना संक्रमित हुए थे। उनका इलाज करनाल में चल रहा है।
जींद में फिलहाल कोई भी ब्लैक फंगस का मामला सामने नहीं आया है। कुछ संदिग्ध लोगों को पीजीआई रोहतक रेफर किया गया है। यदि किसी व्यक्ति के दांत में दर्द के बाद सूजन हो तथा आंखों में भी परेशानी हो तो वह व्यक्ति तुरंत अस्पताल में संपर्क करे। इसमें शरीर के एक ही हिस्से में दिक्कत आती है। अधिक स्टेरॉयड देने से भी ब्लैक फंगस के मामले बढ़ रहे हैं। डॉ. बडिमला राठी, पीएमओ।
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एसएमओ डॉ. गोपाल गोयल ने कहा कि जिले में फिलहाल किसी भी व्यक्ति में ब्लैक फंगस की पुष्टि नहीं हुई है। यहां पर किसी भी मरीज की जांच नहीं हो सकती। उन्हें किसी मरीज में ब्लैक फंगस जैसे लक्षण मिलते हैं तो उसे पीजीआई रोहतक रेफर कर देते हैं। ऐसे दस लोगों को नागरिक अस्पताल से पीजीआई रोहतक रेफर किया गया है। नागरिक अस्पताल में ब्लैक फंगस की जांच की कोई व्यवस्था नहीं है। इसलिए जींद में किसी भी मरीज में ब्लैक फंगस की पुष्टि नहीं की जा सकती। ब्लैग फंगस पोस्ट कोविड मरीजों में मिलता है। जब मरीज कोरोना से ठीक हो जाता है तो उसके शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता बहुत कम हो जाती है। इसकी वजह से ब्लैक फंगस उस व्यक्ति को अपनी चपेट में ले लेता है। ब्लैक फंगस से व्यक्ति कहीं भी संक्रमित हो सकता है।
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ब्लैक फंगस के लक्षण
कोरोना से ठीक होने के बाद व्यक्ति में ब्लैक फंगस से लक्षण देखे जा सकते हैं। इसमें मनुष्य के किसी दांत में दर्द होने के बाद चेहरे के एक तरफ सूजन आ जाती है। आधे सिर में दर्द, इसके बाद धीरे-धीरे इसका असर आंखों पर देखने को मिलता है। इसमें आंख की रोशनी भी जा सकती है। यह शरीर के एक तरफ के हिस्से में होता है। कई बार तो नाक से काले रंग का तरल पदार्थ भी बहने लगता है। शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने के बाद यह रोग हो सकता है।
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जींद में नहीं कोई सुविधा
ब्लैक फंगस की जांच के लिए पहले व्यक्ति की एमआरआई की जाती है। इसमें यह पता लगाया जाता है कि व्यक्ति के किस भाग में ब्लैक फंगस का प्रभाव है। इसके बाद उसी शरीर के हिस्से से मांस का एक टुकड़ा लेकर जांच की जाती है। इसके बाद ही ब्लैक फंगस की पुष्टि हो पाती है। इसके लिए ईएनटी सर्जन, दंत सर्जन तथा नेत्र रोग विशेषज्ञ की टीम होती है। मरीज को एंटी फंगल इंजेक्शन दिया जाता है, जो फिलहाल जींद में नहीं है। वहीं जींद में न तो ईएनटी सर्जन है और न ही नेत्र रोग विशेषज्ञ।
पिल्लूखेड़ा क्षेत्र के एक राजनेता भी चपेट में
स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों के अनुसार पिल्लूखेड़ा क्षेत्र के एक राजनेता भी ब्लैक फंगस की चपेट में आए हैं। वे कुछ दिन पहले ही कोरोना संक्रमित हुए थे। उनका इलाज करनाल में चल रहा है।
जींद में फिलहाल कोई भी ब्लैक फंगस का मामला सामने नहीं आया है। कुछ संदिग्ध लोगों को पीजीआई रोहतक रेफर किया गया है। यदि किसी व्यक्ति के दांत में दर्द के बाद सूजन हो तथा आंखों में भी परेशानी हो तो वह व्यक्ति तुरंत अस्पताल में संपर्क करे। इसमें शरीर के एक ही हिस्से में दिक्कत आती है। अधिक स्टेरॉयड देने से भी ब्लैक फंगस के मामले बढ़ रहे हैं। डॉ. बडिमला राठी, पीएमओ।