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कई दिनों तक नहीं हो रही खरीद, खुले आसमान के नीचे रात बिता रहे किसान
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पुरानी अनाज मंडी में रात को धान की ढेरी के पास सोते किसान। संवाद
- फोटो : Jind
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उचाना। मेहनत और काफी खर्च लगाकर किसान अपने खेत में फसल पैदा करता है। इसके बावजूद मंडी में लाने पर उसकी उपज की बेकद्री होती है। उचाना की पुरानी अनाज मंडी में आजकल ऐसा ही हाल है
किसानों ने बताया कि सरकार व प्रशासन सिर्फ दावे करता है। वीरवार को पीआर धान भी नहीं खरीदा गया। ऐसे में किसान जाएं तो कहां जाए। किसानों ने बताया कि एक एजेंसी ही यहां पर खरीद कर रही है। कभी बारदाने की समस्या आती है तो कभी अन्य समस्याएं आ जाती हैं। इन सभी के कारण परेशान किसानों को होना पड़ता है। किसान मग्गू, सूरता व बलवान ने कहा कि अब तक तीन दिन पहले हुई खरीद का बारदाना नहीं मिला है। मंडी पीआर धान से भर चुकी है। बारदाना खरीद के साथ आना चाहिए। 72 घंटे में किसानों को रुपये तो तब मिलेंगे, जब धान का उठान होगा। यहां किसानों का धान तीन-चार दिनों से नहीं बिक रहा है। ऐसे में किसानों को खुले आसमान के नीचे ही धान की ढेरियों के पास रात बितानी पड़ रही है। हालांकि किसानों के लिए रेस्ट हाउस की व्यवस्था की गई है, लेकिन यह महज एक कमरे का है। यहां चारपाई तो हैं, लेकिन मच्छर रेस्ट हाउस में सोने नहीं देते। किसानों का कहना है कि यदि वे रेस्ट हाउस में जाकर सोते हैं तो पीछे से मंडी में सूखने के लिए फैलाए गए धान को बेसहारा पशु खा जाते हैं। ऐसे में किसानों को दोहरी मार पड़ रही है।
बनाया गया है अस्थायी रेस्ट हाउस
उचाना मार्केट कमेटी के सचिव नरेंद्र कुंडू ने कहा कि मंडी में धान की खरीद नियमित रूप से हो रही है। अधिक नमी वाला धान नहीं खरीदा जा रहा है। पुरानी मंडी में रेस्ट हाउस नहीं है। ऐसे में किसानों के लिए एक कमरे में अस्थायी रेस्ट हाउस बनाया गया है। पशुओं की समस्या पर भी ध्यान दिया जाएगा।
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किसानों ने बताया कि सरकार व प्रशासन सिर्फ दावे करता है। वीरवार को पीआर धान भी नहीं खरीदा गया। ऐसे में किसान जाएं तो कहां जाए। किसानों ने बताया कि एक एजेंसी ही यहां पर खरीद कर रही है। कभी बारदाने की समस्या आती है तो कभी अन्य समस्याएं आ जाती हैं। इन सभी के कारण परेशान किसानों को होना पड़ता है। किसान मग्गू, सूरता व बलवान ने कहा कि अब तक तीन दिन पहले हुई खरीद का बारदाना नहीं मिला है। मंडी पीआर धान से भर चुकी है। बारदाना खरीद के साथ आना चाहिए। 72 घंटे में किसानों को रुपये तो तब मिलेंगे, जब धान का उठान होगा। यहां किसानों का धान तीन-चार दिनों से नहीं बिक रहा है। ऐसे में किसानों को खुले आसमान के नीचे ही धान की ढेरियों के पास रात बितानी पड़ रही है। हालांकि किसानों के लिए रेस्ट हाउस की व्यवस्था की गई है, लेकिन यह महज एक कमरे का है। यहां चारपाई तो हैं, लेकिन मच्छर रेस्ट हाउस में सोने नहीं देते। किसानों का कहना है कि यदि वे रेस्ट हाउस में जाकर सोते हैं तो पीछे से मंडी में सूखने के लिए फैलाए गए धान को बेसहारा पशु खा जाते हैं। ऐसे में किसानों को दोहरी मार पड़ रही है।
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बनाया गया है अस्थायी रेस्ट हाउस
उचाना मार्केट कमेटी के सचिव नरेंद्र कुंडू ने कहा कि मंडी में धान की खरीद नियमित रूप से हो रही है। अधिक नमी वाला धान नहीं खरीदा जा रहा है। पुरानी मंडी में रेस्ट हाउस नहीं है। ऐसे में किसानों के लिए एक कमरे में अस्थायी रेस्ट हाउस बनाया गया है। पशुओं की समस्या पर भी ध्यान दिया जाएगा।
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