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Jind News: कागजों में रैन बसेरा...व्यवस्था पर लटका ताला

Wed, 24 Dec 2025 12:26 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Wed, 24 Dec 2025 12:26 AM IST
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The state-run bus parked at the railway station remained closed all night.
23जेएनडी-11-रेलवे स्टेशन पर बनाए गए रैन बसेरे की बस की ​खिड़की पर लटका ताला। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
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जींद। प्रशासन की ओर से मुसाफिरों के लिए बनाए गए अस्थायी रैन बसेरे की पोल खुल गई है। रेलवे स्टेशन पर रैन बसेरे के तौर पर खड़ी की गई कंडम रोडवेज बस की खिड़की पर रातभर ताला लटका रहा। मंगलवार रात सवा नौ बजे तक भी बस नहीं खुली, जबकि बाहर मुसाफिर कड़कड़ाती सर्दी में ठिठुरते रहे। मौके पर कोई कर्मचारी भी नजर नहीं आया।
सर्दी के मौसम में यात्रियों को राहत देने के उद्देश्य से जिला प्रशासन ने बस अड्डा और रेलवे स्टेशन पर कंडम बसों को खड़ा करवाया है। उन बसों में मुसाफिरों के लिए बिस्तर की व्यवस्था की हुई है लेकिन बस की खिड़की का ताला दिन में तो क्या रात को भी नहीं खुलता है।
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पड़ताल में सामने आया कि यह सुविधा सिर्फ कागजों तक ही सीमित है। मंगलवार रात बस की खिड़की पर ताला लटक मिला। ऐसे में मुसाफिरों को खुले आसमान के नीचे रात गुजारनी पड़ी।
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स्टेशन पर कोई ठंड से बचने के लिए प्लेटफॉर्म के किनारे अखबार बिछाकर बैठा हुआ था तो कोई स्टेशन की दीवार से चिपककर ठंड से बचने की कोशिश करता दिखा। कई मजदूर वर्ग के लोग भी यहां पहुंचे, जो काम की तलाश में आए थे और उन्हें रहने की कोई जगह नहीं मिल पाई।
हालांकि प्रशासन की ओर से दावा किया गया था कि रात के समय रेलवे स्टेशन पर बस खड़ी रहेगी ताकि कोई भी व्यक्ति खुले में न सोए। हकीकत यह रही कि बस तो खड़ी थी लेकिन उस पर ताला लटका था। न तो कोई जिम्मेदार कर्मचारी मौके पर मौजूद था और न ही किसी ने बस खोलने की जहमत उठाई।
बस की खिड़की पर लटका ताला साफ बता रहा था कि व्यवस्था सिर्फ दिखावे के लिए की गई है। इससे यह भी साफ होता है कि प्रशासन ने न तो मॉनिटरिंग की और न ही अधिकारियों ने मौके का निरीक्षण किया। वहीं, प्रशासन ने बस अड्डा पर भी एक कंडम बस को रैन बसेरा बनाया है। इसके अलावा दो कमरों को भी खाली करवाया है ताकि मुसाफिरों को ठंड में परेशानी न हो।

सुविधा नहीं, केवल दिखावा
यात्री रुपेश, जुगतराम, रामसिंह, संतोष, नरेश, बलजीत ने बताया कि जब प्रशासन को व्यवस्था करनी ही नहीं थी तो दिखावा क्यों किया गया? ठंड में ठिठुरते मुसाफिरों के लिए यह फैसला राहत की जगह परेशानी का सबब बन गया। यदि प्रशासन सच में संवेदनशील है तो ऐसी व्यवस्था को सिर्फ कागजों में न रखकर जमीनी स्तर पर लागू करे। रैन बसेरे और बस को रात भर खुरा रखा जाए और जिम्मेदार कर्मचारी तैनात हों। ठंड से बचने के लिए पर्याप्त कंबल और अन्य व्यवस्था उपलब्ध करवाई जाएं।

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प्रशासन की तरफ से रेलवे स्टेशन और बस अड्डा पर एक-एक कंडम बस खड़ी कर उनको रैन बसेरे बनाए गए हैं। इनमें रजाई, कंबल और अन्य सुविधाएं दी गई हैं। वहीं, देखभाल के लिए एक-एक कर्मचारी की तैनाती गई है। बस की खिड़की खोलने का समय साढ़े पांच बजे है। -रामजी लाल, सचिव, रेडक्रॉस जींद

23जेएनडी-11-रेलवे स्टेशन पर बनाए गए रैन बसेरे की बस की खिड़की पर लटका ताला। संवाद

23जेएनडी-11-रेलवे स्टेशन पर बनाए गए रैन बसेरे की बस की खिड़की पर लटका ताला। संवाद

23जेएनडी-11-रेलवे स्टेशन पर बनाए गए रैन बसेरे की बस की खिड़की पर लटका ताला। संवाद

23जेएनडी-11-रेलवे स्टेशन पर बनाए गए रैन बसेरे की बस की खिड़की पर लटका ताला। संवाद

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