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Jind News: 29 बच्चों की पाठशाला में संसाधनों की कमी, शिक्षिकाएं निभा रहीं दोहरी भूमिका
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06जेएनडी09 पाठशाला की कक्षा में बैठे बच्चों को पढ़ाते हुए इंचार्ज मोनिका शर्मा। संवाद
सफीदों। बागड़ू खुर्द स्थित राजकीय प्राथमिक पाठशाला मूलभूत सुविधाओं के अभाव से जूझ रही है। स्कूल में पीने के पानी की व्यवस्था नहीं होने पर शिक्षिकाएं घर से पानी लाती हैं जबकि सफाईकर्मी नहीं होने के कारण खुद झाड़ू लगाकर कक्षाओं की सफाई करती हैं। परिसर में उगी घास, सीमित बजट और संसाधनों की कमी के बीच पाठशाला में 29 बच्चों की पढ़ाई किसी तरह जारी है। वहीं केवल दो शिक्षिका तैनात हैं।
बागडृ खुर्द की राजकीय प्राथमिक पाठशाला में बुनियादी सुविधाओं की कमी के कारण छात्र-छात्राओं और शिक्षिकाओं को कई दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
स्कूल परिसर में घास इतनी अधिक उगी हुई है कि नियमित सफाई के लिए स्प्रे पर लगभग दो हजार रुपये प्रति बार खर्च करना पड़ता है जबकि पूरे वर्ष की सफाई के लिए मात्र आठ हजार रुपये ही मिले हैं। विद्यालय में पीने के पानी की कोई व्यवस्था नहीं है और सफाई के लिए कोई स्वीपर भी नियुक्त नहीं है। इसके चलते शिक्षिकाओं को खुद ही झाड़ू लगाकर कक्षाएं शुरू करनी पड़ती हैं।
पांच कमरे, दो में लग रही कक्षाएं
विद्यालय में कुल पांच कमरे हैं लेकिन बच्चों की कम संख्या के कारण सभी कक्षाएं केवल दो कमरों में ही संचालित की जाती हैं। बाकी कमरों में एक कमरा इंचार्ज कार्यालय के रूप में उपयोग होता है। स्कूल में पहली से पांचवीं तक कुल 29 बच्चे पढ़ते हैं जबकि बाल वाटिका से लेकर विभिन्न कक्षाओं में छात्रों की संख्या बेहद कम है।
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वर्जन
सरकार के मानक के हिसाब से 25 बच्चों पर एक शिक्षक का प्रावधान है इसलिए दो शिक्षिकाओं की नियुक्ति उचित है। पीने के पानी की सुविधा के अलावा ग्राउंड की सफाई और एक स्वीपर की नियुक्ति विभाग को करानी चाहिए। -मोनिका शर्मा, इंचार्ज पाठशाला गांव बागडू खुर्द।
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बागडृ खुर्द की राजकीय प्राथमिक पाठशाला में बुनियादी सुविधाओं की कमी के कारण छात्र-छात्राओं और शिक्षिकाओं को कई दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
स्कूल परिसर में घास इतनी अधिक उगी हुई है कि नियमित सफाई के लिए स्प्रे पर लगभग दो हजार रुपये प्रति बार खर्च करना पड़ता है जबकि पूरे वर्ष की सफाई के लिए मात्र आठ हजार रुपये ही मिले हैं। विद्यालय में पीने के पानी की कोई व्यवस्था नहीं है और सफाई के लिए कोई स्वीपर भी नियुक्त नहीं है। इसके चलते शिक्षिकाओं को खुद ही झाड़ू लगाकर कक्षाएं शुरू करनी पड़ती हैं।
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पांच कमरे, दो में लग रही कक्षाएं
विद्यालय में कुल पांच कमरे हैं लेकिन बच्चों की कम संख्या के कारण सभी कक्षाएं केवल दो कमरों में ही संचालित की जाती हैं। बाकी कमरों में एक कमरा इंचार्ज कार्यालय के रूप में उपयोग होता है। स्कूल में पहली से पांचवीं तक कुल 29 बच्चे पढ़ते हैं जबकि बाल वाटिका से लेकर विभिन्न कक्षाओं में छात्रों की संख्या बेहद कम है।
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सरकार के मानक के हिसाब से 25 बच्चों पर एक शिक्षक का प्रावधान है इसलिए दो शिक्षिकाओं की नियुक्ति उचित है। पीने के पानी की सुविधा के अलावा ग्राउंड की सफाई और एक स्वीपर की नियुक्ति विभाग को करानी चाहिए। -मोनिका शर्मा, इंचार्ज पाठशाला गांव बागडू खुर्द।

06जेएनडी09 पाठशाला की कक्षा में बैठे बच्चों को पढ़ाते हुए इंचार्ज मोनिका शर्मा। संवाद