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Jind News: रात में जिम का कम सामान पूरा करने का चल रहा खेल
Sat, 27 Apr 2024 03:22 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Sat, 27 Apr 2024 03:22 AM IST
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सफीदों। पंचायत समिति सफीदों ने खंड के 25 गांवों में खोले जा रहे ओपन जिम में कम उपकरण लगाने व कई गांवों में जिम ही स्थापित नहीं किए जाने के मामले को लेकर एसडीएम की ओर से जांच बैठाए जाने के बाद अब कंपनी इन उपकरणों को रात में पूरा करने का खेल खेल रही है। अपने इस मकसद में कंपनी के कर्मचारी कई गांवों में तो कामयाब हो गए, लेकिन गांव मुआना व सिंघपुरा में उन्हें खदेड़ दिया गया।
गांव सिंघपुरा में ब्लॉक समिति के सदस्य सुशील सिंघपुरा व गांव मुआना में ब्लॉक समिति के सदस्य अजय राणा ने उपकरण लगाने आए कंपनी के कर्मचारियों का विरोध किया। जनप्रतिनिधियों का कहना है कि यह कार्य रात में क्यों किया जा रहा है। मामले की जांच एसडीएम करवा रहे हैं तो इन उपकरणों को अब पूरा करने का कोई औचित्य नहीं बनता। अगर कोई कार्य करना है तो उसे दिन में किया जाए और गांव के लोगों को सूचित करके किया जाए। ग्रामीणों ने उपकरण लगाने आए कंपनी के कर्मचारियों का विरोध करने का वीडियो भी वायरल किया है। इस वीडियो में ब्लॉक समिति सदस्य अजय राणा कंपनी की ओर से आए कर्मचारी गौरव व अन्य दो के साथ जवाब-तलबी करते हुए नजर आ रहे हैं। कर्मचारी कह रहे हैं कि उनका कोई कसूर नहीं है। जैसा उन्हें कहा गया है वैसा वे कर रहे हैं। इस पार्क में काम शुरू करने से पहले उन्होंने चौकीदार को सूचित कर दिया था। कर्मचारियों का कहना था कि वे इससे पहले कई गांवों में कार्य करते हुए यहां पर पहुंचे हैं।
बॉक्स
क्या था मामला
बीडीपीओ कार्यालय में 16 अप्रैल को सीएम फ्लाइंग की टीम ने छापा डाला था। छापा के दौरान पंचायत समिति की ओर से 25 गांवों में से 13 में ओपन जिम नहीं खोले जाने का मामला सामने आया था। इसके अलावा जिन गांवों में ओपन जिम खोला गया था उनमें उपकरण पूरे नहीं लगाए गए थे। बीडीपीओ कार्यालय के लेखाकार अशोक ने 20 फरवरी को डीसी जींद, एसडीएम सफीदों व सीएम विंडो पर शिकायत करके कहा था कि तत्कालीन बीडीपीओ राज सिंह ने जैम पोर्टल से 19 फरवरी की रात्रि को उन्हें बिना बिल दिए ही पेमेंट कर दी है, जबकि सभी 25 गांवों में मौके पर ओपन जिम नहीं मिली। उन्होंने इस मामले में गहराई से जांच की मांग की थी।
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एसडीएम ने सौंपी थी जांच
एसडीएम मनीष कुमार फोगाट ने डीसी के आदेश पर एक जांच कमेटी का गठन किया था। इस कमेटी में 25 गांवों के सरपंचों, ग्राम सचिवों व संबंधित जेई को शामिल किया गया था। जांच करने में आठ ग्राम सचिव व 4 जेई मौके पर जाकर ओपन जिम के लिए खरीद गए सम्मान को चेक करके एवं सामान की अदायगी रिपोर्ट पेश करने के आदेश एसडीएम ने 22 अप्रैल को पत्र जारी करके दिए थे। आदेशों में कहा गया था कि गठित कमेटी जांच करके रिपोर्ट अतिशीघ्र पेश करे, ताकि उसे उपायुक्त जींद को भेजा सके। एसडीएम ने यह भी कहा था कि वे गठित कमेटी के साथ खुद भी कभी भी मौके पर जाकर जांच करेंगे। अगर सरपंच, ग्राम सचिव व जेई गलत रिपोर्ट पेश करेंगे तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
क्या कहते हैं ब्लॉक समिति सदस्य
ब्लॉक समिति सदस्य सुशील कुमार ने कहा कि पूरे मामले में खानापूर्ति चल रही है। इस सारे मसले की उच्चाधिकारियों की ओर से जांच किए जाने की जरूरत है। पहले तो कई गांवों में जिम ही नहीं लगाई गई और जहां लगाई गई वहां पर उपकरण कम लगाए गए। अब जब एसडीएम ने जांच सौंपी है तो इन उपकरणों को आनन-फानन में लगाने का कार्य क्यों किया जा रहा है। इस मामले में कहीं न कही मिलीभगत प्रदर्शित हो रही है।
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गांव सिंघपुरा में ब्लॉक समिति के सदस्य सुशील सिंघपुरा व गांव मुआना में ब्लॉक समिति के सदस्य अजय राणा ने उपकरण लगाने आए कंपनी के कर्मचारियों का विरोध किया। जनप्रतिनिधियों का कहना है कि यह कार्य रात में क्यों किया जा रहा है। मामले की जांच एसडीएम करवा रहे हैं तो इन उपकरणों को अब पूरा करने का कोई औचित्य नहीं बनता। अगर कोई कार्य करना है तो उसे दिन में किया जाए और गांव के लोगों को सूचित करके किया जाए। ग्रामीणों ने उपकरण लगाने आए कंपनी के कर्मचारियों का विरोध करने का वीडियो भी वायरल किया है। इस वीडियो में ब्लॉक समिति सदस्य अजय राणा कंपनी की ओर से आए कर्मचारी गौरव व अन्य दो के साथ जवाब-तलबी करते हुए नजर आ रहे हैं। कर्मचारी कह रहे हैं कि उनका कोई कसूर नहीं है। जैसा उन्हें कहा गया है वैसा वे कर रहे हैं। इस पार्क में काम शुरू करने से पहले उन्होंने चौकीदार को सूचित कर दिया था। कर्मचारियों का कहना था कि वे इससे पहले कई गांवों में कार्य करते हुए यहां पर पहुंचे हैं।
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क्या था मामला
बीडीपीओ कार्यालय में 16 अप्रैल को सीएम फ्लाइंग की टीम ने छापा डाला था। छापा के दौरान पंचायत समिति की ओर से 25 गांवों में से 13 में ओपन जिम नहीं खोले जाने का मामला सामने आया था। इसके अलावा जिन गांवों में ओपन जिम खोला गया था उनमें उपकरण पूरे नहीं लगाए गए थे। बीडीपीओ कार्यालय के लेखाकार अशोक ने 20 फरवरी को डीसी जींद, एसडीएम सफीदों व सीएम विंडो पर शिकायत करके कहा था कि तत्कालीन बीडीपीओ राज सिंह ने जैम पोर्टल से 19 फरवरी की रात्रि को उन्हें बिना बिल दिए ही पेमेंट कर दी है, जबकि सभी 25 गांवों में मौके पर ओपन जिम नहीं मिली। उन्होंने इस मामले में गहराई से जांच की मांग की थी।
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एसडीएम ने सौंपी थी जांच
एसडीएम मनीष कुमार फोगाट ने डीसी के आदेश पर एक जांच कमेटी का गठन किया था। इस कमेटी में 25 गांवों के सरपंचों, ग्राम सचिवों व संबंधित जेई को शामिल किया गया था। जांच करने में आठ ग्राम सचिव व 4 जेई मौके पर जाकर ओपन जिम के लिए खरीद गए सम्मान को चेक करके एवं सामान की अदायगी रिपोर्ट पेश करने के आदेश एसडीएम ने 22 अप्रैल को पत्र जारी करके दिए थे। आदेशों में कहा गया था कि गठित कमेटी जांच करके रिपोर्ट अतिशीघ्र पेश करे, ताकि उसे उपायुक्त जींद को भेजा सके। एसडीएम ने यह भी कहा था कि वे गठित कमेटी के साथ खुद भी कभी भी मौके पर जाकर जांच करेंगे। अगर सरपंच, ग्राम सचिव व जेई गलत रिपोर्ट पेश करेंगे तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
क्या कहते हैं ब्लॉक समिति सदस्य
ब्लॉक समिति सदस्य सुशील कुमार ने कहा कि पूरे मामले में खानापूर्ति चल रही है। इस सारे मसले की उच्चाधिकारियों की ओर से जांच किए जाने की जरूरत है। पहले तो कई गांवों में जिम ही नहीं लगाई गई और जहां लगाई गई वहां पर उपकरण कम लगाए गए। अब जब एसडीएम ने जांच सौंपी है तो इन उपकरणों को आनन-फानन में लगाने का कार्य क्यों किया जा रहा है। इस मामले में कहीं न कही मिलीभगत प्रदर्शित हो रही है।